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अजीबोगरीब फतवे, जिसमें महिलाओं को सब्जी तक छूने से किया गया मना

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हम महिलाएं हैं कोई कटपुतली नहीं. जो चाहे जैसा चाहे हम पर हक जताएं. जहां आज सरकारें महिलाओं के सशक्तीकरण के लिये न जानें क्या क्या स्कीमें चला रही हैं. वहीं आज भी कुछ रुढ़ीवादी और दमनकारी परंपराओं से बाहर निकलने के लिये महिलाएं अपनी आवाज उठा रही हैं. उनके प्रत्येक काम को धर्म से जोड़कर फतवा जारी कर दिया जाता है. 

चाहे आपको वो मंजूर हो या न हो. उनके कामों को गैर मजहबी कह कर उन्हे समुदाय से अलग करने की बातें की जाती हैं. ऐसे में इस तरह के फतवे या फरमान लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि आखिर ये लोग होते कौन हैं हमारे लिए कोई फैसला लेने वाले? यदि कोई समुदाय यह तर्क दे कि उसका मजहबी कानून महिलाओं के प्रति पक्षपात की अनुमति देता है तो क्या सभ्य समाज को इसकी अनुमति देनी चाहिए?

फतवा है क्या
इस्लाम से जुड़े किसी मसले पर कुरान व हदीस के अंतर्गत जो हुक्म जारी किया जाता है उसे फतवा कहते हैं. फतवा केवल मुफ्ती ही जारी कर सकता है और मुफ्ती बनने के लिए शरिया कानून, कुरान और हदीस का अध्ययन जरूरी है.ऐसे न जाने कितने विवादित फतवे मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ आए हैं.

दुनिया के अजीबोगरीब फतवे

अपने ऑफिस सहयोगी के साथ ये करें महिलाएं

साल 2007 में मिस्र की अल अजहर यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ हदीस के हेड की ओर से अजीबोगरीब फतवा जारी किया गया था. उन्होने कहा था कि जो महिलाएं ऑफिस में काम करती हैं. उन्हे अपने मेल कलीग्स को खुदका दूध पिलाना चाहिए. फतवे के अनुसार, मर्दों को अपनी छाती का दूध दिन में कम से कम पांच बार पिलाना चाहिए.

इसके पीछे उनका मानना था कि ऑफिस में काम करने वाली महिलाएं अगर ऐसा करती हैं, तो उनके बीच मां–बेटे का रिश्ता कायम हो जाएगा.इसके चलते वे आपस में शारीरिक संबंध नहीं बनाएंगे.

इस्तांबुल के धार्मिक स्कॉलर

मुकाहिद सिहाद हाल ने फतवा जारी करते हुए चेतावनी दी कि जो लोग मास्टरबेशन यानि हस्तमैथुन करते हैं, तो उनके मरने के बाद उनका हाथ गर्भवती हो जाता है. और वो अपने अधिकारों की मांग करता है. ऐसे में उनके फतवे का सोशल मीडिया पर यूजर्स ने खूब मजाक उड़ाया था. कुछ लोगों ने तो ये भी सवाल किया कि हाथ का अबॉर्शन कैसे कराया जाता है.

महिलाएं केले और खीरे को ना छुएं

इन फतवों में बिना सिर-पैर वाली बातें जारी की गयी थी. इंग्लैंड के मौलाना ने फतवा जारी करते हुए औरतों को सलाह दी थी कि उन्हें खीरा और केला नहीं छूना चाहिए. मौलान का मानना था कि उनको छूने से महिलाओं के मन में गंदे विचार आते हैं. इन फलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ही महिलाओं को खिलाना चाहिए.

हराम है बफे का खाना

साल 2014 में सऊदी अरब में स्टैंडिंग कमेटी ऑफ काउंसिल ऑफ सीनियर स्कॉलर्स, शेख सलेह बिन अब्दुला अल फावजान ने कहा था कि रेस्टोरेंट में बफे का खाना हराम होता है. क्योंकि इसमें खाने की क्वालिटी का पता नहीं चलता. इसलिए ये पूरी तरह से बैन है.

समोसा भी इस्लाम के खिलाफ

जो भारत का सबसे पुराना स्नैक्स है समोसा. उसको भी सोमालिया में बैन कर दिया गया था. क्योंकि साल 2011 में सोमालिया पर कब्जा करने वाले आतंकी संगठन अल शबाब ने लोकप्रिय स्नैिक्स समोसे के खिलाफ फतवा निकाला था. इसमें कहा गया कि इस्लारम में समोसा खाना हराम है. अल शबाब ने तीन तरफा समोसा की तुलना ईसाई होली ट्रिनिट्रि के प्रतीक से की थी.

सीताफल यानि कद्दू है हिंदू और टमाटर इसाई

इन फतवों ने तो सब्जियों को भी नहीं छोड़ा, मिस्र के इस्लामिक एसोसिएशन ने सब्जियों को भी धर्म में बांट दिया था. इस फतवे के जरिए सलाफी शेख ने टमाटर को ईसाई धर्म का बताया था.

इसमें कहा गया कि टमाटर के दो हिस्से काटने पर उसमें क्रॉस की तरह आकृति दिखती है, जो मुसलमानों के लिए सही नहीं है. इसके बाद ककड़ी और केले को लेकर भी फतवा जारी किया और सलाह दी कि सीताफल को सिर्फ हिंदू धर्म के लोग ही खाएं.

कुर्सी पर न बैंठें मुस्लिम महिलाएं

साल 2014 में आतंकवादी संगठन आईएसआईएस ने एक फतवा जारी किया था. उसने महिलाओं के कुर्सी पर बैठने को लेकर फतवा जारी किया था. उसने कहा कि महिलाओं को कुर्सी पर नहीं बैठना चाहिए. क्योंकि जब महिलाएं इस गलत तरीके से मूव करती हैं तो ये मर्दों को उत्तेजित करता है.

भूखा पति अपनी बीवी को काटकर खा सकता है

इन फतवों में निर्दयता भी कूटकूट कर भरी है. सऊदी अरब के शाही इमाम मुफ्ती शेख अब्दुल अजीज ने एक ऐसा फतवा जारी किया था, जिससे उन्हें काफी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था. उन्होंने फतवा दिया कि अगर कोई शौहर भूखा है तो वो भूख मिटाने के लिए अपनी पत्नी के अंगों को काट कर खा सकता है. अगर पत्नी का शरीर पति की भूख मिटा सकता है, तो उस पत्नी के लिए गौरव की बात होती है.

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