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अब हिमाचल में लीगल होगी भांग की खेती, जानिए क्यों

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पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भांग की खेती को कानूनी मान्यता मिलने के बाद हिमाचल में भी भांग की खेती को लीगलाइज करने की मांग उठनी शुरू हो गई है. कुल्लू के पूर्व विधायक महेश्वर सिंह और वर्तमान विधायक सुंदर ठाकुर ने भांग की खेती को कानूनी मान्यता देने की वकालत की है.

अब सवाल ये उठता है कि आखिर क्यों भांग की खेती को लीगल करने की मांग की जा रही है. भारत में भांग की खेती प्रतिबंधित है और इससे बनने वाले नशीले पदार्थों के साथ पकड़े जाने पर छह महीने से लेकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है.

दूसरा सवाल ये है कि यदि भांग की खेती को कानूनी मान्यता मिल जाती है तो क्या इसके प्रयोग नशे के लिए किया जा सकेगा. तो इसका जवाब है नहीं. भांग की खेती के लिए बाकायदा लाइसेंस जारी किए जाएंगे और इसका प्रयोग औद्योगिक रुप से दवाएं बनाने और रेशों से सामान बनाने में किया जाएगा.

क्या हैं भांग के फायदे?

भांग से निकलने वाले कैमिकल्स का प्रयोग कई रोगो की की दवाइयां जैसे मोटापा, शुगर, पीलिया, दर्द निवारक दवाएं, गुप्त रोग आदि में किया जा सकता है. इसके अलावा भांग का तेल निकाल कर औषधि के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. कई जगहों पर इसे कैंसर तक के इलाज में उपयोग किया जा रहा है.

आयुर्वेद में है भांग का जिक्र
योग गुरु बाबा रामदेव के साथी आचार्य बालकृष्ण ने कहा था कि प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में भांग का इस्तेमाल होता आया है. भांग का इस्तेमाल औषधी के रूप में किया जा सकता है और वह इस पर अभी अध्ययन कर रहे हैं. उन्होने ये भी कहा कि भांग की उपयोगिता और सही इस्तेमाल के बारे में विचार करना चाहिए.

क्यों अवैध हुआ गांजा

1961 में अमरीका ने यूएन के समिट में भांग को ये कहते हुए बैन करने का प्रस्ताव रखा कि ये एक प्रकार का सिंथैटिक ड्रग है और इसका असर भी कोकेन और हेरोइन ड्रक्स की तरह होता है. यूएन ने इसे बैन कर दिया और भारत से भी बैन करने को कहा गया, पर उस समय भारत की तत्कालीन सरकार ने इसे बैन करने से मना कर दिया. इसके बाद 1985 में अमरीका ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर कथित तौर पर दबाव दाल कर इसे भारत में अवैध घोषित करवा दिया.
यहां ये गौर करने वाली बात है कि अवैध घोषित करने के पहले भांग को एक औषधि के रूप में देखा जाता था, बाद में इसे ड्रग्स की केटेगरी में रखा गया.

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