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आखिर क्यूँ काले महीने में नवविवाहित दुल्हन और सास एक साथ नहीं रह सकती

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दुल्हन और सास काले महीने में नहीं रह सकती साथ, बजह है खास

भारत में हिमाचल प्रदेश की संस्कृति को काफी    समृद्ध   माना गया है ।   यहाँ का खानपान ,   रहन सहन   और  मान्यताओं की बजह से  हिमाचल   को    पुरे भारत   में अलग ही पहचान मिली हुई है ।   आज के लेख में   बात करते   हैं   उस मान्यता की जिसमे   काले महीने में नवविवाहित दुल्हन और सास एक साथ नहीं रह सकती  है ।     भाद्रपद महिना   जिसे हिमाचल में काला महिना  (Kala Mahina) के नाम  से जाना जाता है।
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Credit -Travellingcamera.com
वरसात के दिनों में सावन महीने के अंत के बाद जब भाद्रपद महिना शुरू होता है तो रीति-रिवाजों के अनुसार सभी नवविवाहित लड़कियां अपने मायके आती हैं। लोगों की मान्यता  है कि इस महीने में नवविवाहित बहू और सास को एक घर में रात नहीं गुजारनी चाहिए। ऐसा करने से सास या बहू को नुकसान हो सकता है।
अब इसे एक अंधविश्वास कहें या फिर एक बहाना, लेकिन इसी बहाने नवविवाहित लड़की अपने मायके में पूरा एक महीना बिता पातीं हैं। इस पूरे महीने वे अपने मायके में रहतीं हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं। अगले यानी आश्विन महीने को सक्रांति के बाद ही नवविवाहिता अपने ससुराल जाती हैं। कईं बार काला महीना खत्म होते ही श्राद्ध शुरू हो जाते हैं तो उनको मायके में और समय मिल जाता है और फिर नवरात्रि में वापिस जाती हैं।
कहा जाता है पहले पति भी अपनी पत्नी से नहीं मिल पाते थे। लेकिन अब समय के साथ सब बदल रहा है। यहाँ तक तो अब कईं लोग इन सब मान्यताओं में विश्वास नहीं रखते हैं।
जब भी नवविवाहिता वापिस अपने ससुराल जाती हैं तो माँ उनको ससुराल वालों के लिए कपड़े, मिठाई और पकवान बनाकर भिजवाती हैं। जितने दिन वे मायके में रहतीं हैं वापिस अपने अल्हड़पन में पहुंच जातीं हैं लेकिन वापिस ससुराल जाते ही एक बार फिर एक जिम्मेदार बहू के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने में जुट जातीं हैं। इस तरह हर नवविवाहिता इस महीने का इंतजार करती है ताकि वे अपने मायके जा सके।
इसके साथ ही कहा जाता है इस महीने में रातें काली होतीं हैं तो लोग सरसों के दिए यानी बट्ठियां भी जलाई जाती हैं। इसके पीछे की मान्यता यह है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी महीने में काली रातों में हुआ था और रात को उजाला करने के लिए ही दिए जलाए जाते हैं।

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