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इस मंदिर में तेल से नहीं पानी से जलता है दीपक

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बताया जाता है कि माता के सामने रखे एक दिए में पानी डालने से यह अपने-आप तैलीय हो जाता है और यह दिया ऐसे ही जलता रहता है। भक्तों की माने तो यह दिया वर्षों से ऐसे ही पानी से जल रहा है। माता का यह चमत्कार देखने के लिए यहां दूर दूर से लोग आते हैं।

इस मंदिर में  तेल से नहीं पानी से जलता है दीपक

कहते हैं कि यहां के पुजारी सिद्धूसिंह सोंधिया बचपन से माता की सेवा करते आ रहे हैं, लेकिन कुछ साल पहले मां उनके सपने में आईं और उन्होंने सोंधिया को दर्शन देकर कहा कि आज से पानी से दीए जलाना।

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इसके बाद दूसरे दिन जब सोंधिया ने मां के दीए में पानी डाला, तो वह दीया पहले की ही तरह जलता रहा। यह चमत्कार देखर वह भी अचम्भित हो गए।   इस चमत्कार के बारे में कुछ ग्रामीणों ने भी पहले यकीन नहीं किया, लेकिन जब उन्होंने भी दीए में पानी डालकर ज्योत जलाई और ज्योति सामान्य रूप से जल गई, तो उसके बाद इस चमत्कार के बारे में पूरे गांव में चर्चा फैल गई।


बताया जाता है कि इस मंदिर के पास बहने वाली नदी कालीसिंध के पानी को लेकर इस दीए में डाला जाता है। यह क्रम लगातर तब तक चलता रहता है जब तक की वर्षा ऋतु नहीं आ जाती,  क्योंकि हर साल यह मंदिर वर्षा ऋतु में कालीसिंध नदी में डूब जाता है।  

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