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कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा ने बताया, हिमाचल में चुनाव क्यों हारी पार्टी

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धर्मशाला: कांग्रेस सरकार में शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को भी इस बार हार का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक हिमाचल में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार में भितरघात को भी नकारा नहीं जा सकता है। उनका कहना है कि जिन्होंने भितरघात किया है, वह हम भी जानते हैं तथा जिन्होंने किया है, वे भी भली-भांति इससे परिचित हैं। पूर्व शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा से पंजाब केसरी संवाददाता जिनेश कुमार की बातचीत के मुख्य अंश।

हाल ही में चुनावों में धर्मशाला ने आपको नकारा है। हार की वजह क्या रही है। हार के क्या कारण हैं।
एक या 2 वजह से जीत या हार नहीं होती है। हार या जीत के लिए कई कारण बनते हैं। अपने चुनाव क्षेत्र में 5 साल में हर किसी को आप खुश नहीं कर सकते हैं। बदलाव की लहर चल रही थी और अंदर ही अंदर लोगों के मन में था, जिसका परिणाम आपके सामने हैं। बदलाव के चलते कांगड़ा में 3 ही लोग जीते और बाकी हार गए। विकास भी हुआ और धर्मशाला में कार्य भी कई हुए हैं।

लोगों के मन ऐसा क्या था कि सुधीर शर्मा को हराना है। आपने हार का पोस्टमार्टम किया होगा।
मुझे अगर यह बात पता होती तो परिणाम कुछ और होते। खुद सत्ता में थे, पंचायत समिति व नगर निगम भी अपनी थी। दूसरे की कमी रही होगी तो वह भी शीर्ष नेताओं पर निकाल देते हैं। भारतीय जनता पार्टी की अंदरूनी लहर भी थी और भारतीय जनता पार्टी के संगठन (कैडर) ने न सिर्फ धर्मशाला बल्कि बाकी प्रदेशों में अच्छा काम किया।

धर्मशाला में क्या भितरघात भी हुआ है।
राजनीति में सब चलता है। जो हो गया, वह हो गया। यह सभी दलों में होता है। भितरघात को हम नकार नहीं सकते हैं।

कौन कर सकता है भितरघात
अब परिणाम आ गए हैं, उस पर टिप्पणी करने का कोई औचित्य नहीं है। हम भी जानते हैं किसने भितरघात किया है और जिन्होंने भितरघात किया है, वे भी जानते हैं और लोग भी जानते हैं।

चुनाव से पहले गद्दी समुदाय के साथ लाठीचार्ज हुआ था। क्या यह भी एक कारण हो सकता है। गद्दी समुदाय का वोट बैंक भी इससे प्रभावित हुआ हो।
लाठीचार्ज हुआ था। ऐसा माहौल बना था। गद्दी समुदाय वाले बूथों में पिछले चुनावों के मुकाबले अधिक बढ़त मिली है। गद्दी फैक्टर केवल बोलने के लिए था, जो लोगों ने चलाया, लेकिन वह इतना चला नहीं।

आपने धर्मशाला को नगर निगम दिया। स्मार्ट सिटी दी। अब और क्या लोग आपसे चाहते थे, उनके मन में क्या रहा होगा।
चुनावों के दौरान लोग कई तरह के मुद्दों पर प्रचार करते हैं। भ्रामक बातें भी फैलाते हैं। जीत और हार के लिए चीज निकालनी है। जिस क्षेत्र से आप नुमाइंदे हैं, उस क्षेत्र में ऐसा काम करें कि लोग मिसाल दें। उसको हम पैमाना नहीं बना सकते कि स्मार्ट सिटी, पक्की सड़क या नगर निगम देखकर सारे वोट पड़ जाएंगे, यह चुनाव का परिणाम भी बताता है।

पूर्व सरकार के 5 मंत्री हारे हैं। जो बी.जे.पी. के मुख्यमंत्री होने वाले थे, उनकी हार हुई, प्रदेशाध्यक्ष की हार हुई है। लोगों ने किस तरह से जनादेश दिया है।
जिनको घोषित मुख्यमंत्री कर दिया हो, उनकी हार हुई है। मतलब लोग वह मुख्यमंत्री भी नहीं चाहते हैं। प्रदेशाध्यक्ष के साथ भारतीय जनता पार्टी के कई दिग्गज नेता व हमारे मंत्रिमंडल से भी हारे हैं। जिस तरह से चुनावों के परिणाम आए हैं, उसको देखकर हम यह नहीं कह सकते कि हार का एक पैमाना हो। हो सकता है कि अगले चुनाव में और चौंकाने वाले परिणाम आएं। लोगों के अंदर एक्सपैक्टेशन बढ़ गई हैं। लोग क्विक डिलीवरी सिस्टम चाहते हैं, जिसका नुक्सान बड़े कद के नेता को हुआ है।

बेशक लोगों ने आपको नकार दिया हो। राजनीति में आपका आगे क्या प्लान है।
अभी तो धर्मशाला में हूं। यही घर है यही चुनाव क्षेत्र। जो भी शुरू से राजनीति करते हैं, राजनीतिक परिवेश में रहते हैं, वह चुनाव से जुड़े रहेंगे। यही जनता है जो आपको बनाती है और गिराती है। यहां की स्थानीय जनता की इच्छाओं के अनुरूप कार्य करते रहेंगे। हर दूसरे-तीसरे घर से नाता रहता है एक बेटा के रूप में, एक नेता के रूप में, एक भाई के रूप में। 5 वर्षों में जो कमियां रही हैं, उनको दूर करके फिर से पार्टी को मजबूत रूप से खड़ा करेंगे।

चुनाव में आर.एस.एस. की क्या भूमिका रही, मैं नहीं जानता 
धूमल की हार के पीछे आर.एस.एस. का साथ न देना कहा जा रहा है। इस पर सुधीर शर्मा ने कहा कि आर.एस.एस. क्या कर रहा था। चुनाव में उसकी क्या भूमिका रही है, यह मैं नहीं जानता हूं, लेकिन धूमल और उनके आसपास के कई लोग चुनाव हार गए। चुनाव के बाद कई मतलब लोग अब निकाल रहे हैं, किसने क्या किया होगा।

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