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कोटखाई गैंगरेप-मर्डर – जबरन गुनाह कबूल करवाने को पुलिस ने तान दी थी पिस्तौल

Kotkhai Gangrap
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शिमला। कोटखाई गैंगरेप-मर्डर केस में हिमाचल पुलिस के दामन पर दाग यूं ही नहीं लगे हैं। बुरी तरह से बदनाम हुई हिमाचल पुलिस के कारनामें सीबीआई की चार्जशीट में सामने आए हैं। 10वीं कक्षा की छात्रा के साथ हुए जघन्य अपराध में हिमाचल पुलिस ने भारी लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार समेत बेशर्मी भी दिखाई। Kotkhai Gangrap

गैंगरेप व मर्डर के आरोप में पुलिस की एसआईटी ने जिन छह लोगों को पकड़ा, उनसे थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर गुनाह कबूल करवाने के लिए पिस्तौल तक तानी गई थी। सीबीआई की चार्जशीट में ये खुलासे किए गए हैं। सीबीआई को पुलिस की एसआईटी द्वारा पकड़े गए छह लोगों के जघन्य अपराध में शामिल होने के सुबूत नहीं मिले।

एक कथित आरोपी सूरज की तो थर्ड डिग्री के कारण हवालात में मौत हो गई थी। कस्टोडियल डेथ के केस में ही आईजी रैंक के अफसर सहित नौ पुलिस अफसर व कर्मी जेल में हैं। सीबीआई ने परत-दर-परत कस्टोडियल डैथ केस को लगभग सुलझा लिया है। सीबीआई की चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि एसआईटी में शामिल एक आला पुलिस अफसर ने तो छह में से एक कथित आरोपी दीपक पर पिस्तौल तान दी थी।

हवालात में बेरहमी से की गई थी पिटाई Kotkhai Gangrap

सीबीआई की चार्जशीट में दर्ज है कि छात्रा केसाथ दुष्कर्म व हत्या के आरोप में जिन छह लोगों को पकड़ा गया था, उन्हें हवालात में बुरी तरह से मारा गया। यही नहीं आरोपियों में से एक युवक दीपक पर तो सर्विस पिस्टल भी दिखाई गई। पिस्टल दिखाने का मकसद सिर्फ उससे जबरन जुर्म कबूल करवाना था।

सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि गुडिय़ा का शव मिलने के बाद इस केस में आईपीसी की धाराओं 302व 376 तथा पोक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत कोटखाई पुलिस थाना में केस दर्ज किया गया। इसी दिन ठियोग के तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी व उनकी टीम ने राजेंद्र सिंह, दीपक, सूरज नेपाली, लोकजन व सुभाष को हलाईला से गिरफ्तार किया था। इन्हें एक निजी वाहन में पूछताछ के लिए छैला लाया।

छैला में इन सभी से पूछताछ की गई और इन्हें बुरी तरह से पीटा गया। पूछताछ में जब कुछ सामने नहीं आया तो इन्हें देर रात को छोड़ दिया गया। इसी पूछताछ के दौरान दीपक पर सर्विस पिस्टल भी तानी गई। जांच में कुछ भी नतीजा न निकलता देख डीजीपी ने 10 जुलाई को एसआईटी का गठन किया।

एसआईटी ने महासू पहुंच कर दीपक, सुभाष, सूरज नेपाली, लोकजन व राजेंद्र से महासू के वन विभाग के रेस्ट हाउस में पूछताछ की। सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि पूछताछ में सख्ती बरते जाने के बावजूद कुछ नहीं निकला। सीबीआई के अनुसार वहां महासू फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में एक शख्स देवेंद्र नेगी भी मौजूद थे। उन्होंने पुलिस के इस पूछताछ के तौर तरीकों पर भी आपत्ति जताई।

नेगी ने यातनापूर्वक पूछताछ के बजाय वैज्ञानिक तरीके से जांच की सलाह दी थी। इसके बाद पुलिस ने इन पांच को छोड़ दिया। इसके बाद 12 जुलाई को एसआईटी ने आशीष चौहान को गिरफ्तार किया। साथ ही मुख्य आरोपी बताते हुए राजेंद्र सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया। फिर रात के वक्त एसआईटी ने सुभाष को दांदी मंदिर, दीपक को उसके घर से तथा 13 जुलाई को लोकजन व सूरज को हुल्ली से पकड़ा।
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सीबीआई चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि पुलिस ने इन लोगों की गिरफ्तारी के बाद अपने दावों को सत्य साबित करने के मकसद से पूछताछ के दौरान थर्ड डिग्री तरीका भी अपनाया। प्रेस कांफ्रेस भी पुलिस के अधिकारियों के दावों को सही साबित करने के मकसद से की गई थी। थर्ड डिग्री के कारण टूट चुके दीपक ने 13 जुलाई तथा लोकजन ने 17 जुलाई को जुर्म कबूल लिया। दोनों ही मौकों पर वीडियोग्राफी की गई, मगर रिकार्ड पर न ही कबूलनामा तथा न ही वीडियो रिकार्डिंग लाई गई।

सीबीआई को शुरू से ही था पुलिस जांच पर शक
सीबीआई को आरंभ से ही पुलिस की जांच पर शक था। यही कारण है कि सीबीआई ने केस हाथ में आते ही फूंक-फूंक कर कदम रखा। सीबीआई ने चुस्ती दिखाते हुए पहले कस्टोडियल डैथ केस पर फोकस किया। सीबीआई को अंदेशा था कि ऐसा क्या हुआ कि हवालात में आपस में भिडक़र कैसे एक कथित आरोपी की मौत हो गई। सीबीआई ने वैज्ञानिक तरीके से जांच को आगे बढ़ाया। सभी के मोबाइल जब्त किए गए। मोबाइल रिकार्ड को खंगाला गया तो सीबीआई का शक पुख्ता हो गया। बाद में सारा मामला साफ होने के बाद आईजी जहूर जैदी व अन्य पुलिस अफसरों व कर्मियों को पकड़ा गया। अब इसी से सीबीआई छात्रा के गुनहगारों तक पहुंचेगी।

Source – eenaduindia

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