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गुड़िया की पहली बरसी आज, न्याय के लिए आज भी तरस रहा परिवार

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गुड़िया की पहली बरसी आज, न्याय के लिए आज भी तरस रहा परिवार – पिछले साल 4 जुलाई के दिन ही गुड़िया स्कूल से घर लौटते समय लापता हो गई थी। इसके 2 दिन बाद उसका शव स्थानीय जंगल में पड़ा मिला था। उसका रेप के बाद मर्डर कर दिया गया था लेकिन एक साल पूरा हो जाने के बाद भी दरिंदगी का शिकार हुई मासूम को न्याय नहीं मिल पाया। 

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) भले ही एक आरोपी को पकड़ कर मामला सुलझाने का दावा कर चुकी हो लेकिन गुड़िया के परिजनों के जहन में ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब उन्हें अभी तक नहीं मिल पाया है। गुड़िया के परिजनों की मानें तो इस वारदात में एक व्यक्ति से अधिक की संलिप्त हो सकती है।

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यदि जंगल में वारदात को अंजाम दिया गया होता तो गुड़िया की एक जुराब और क्लिप मौके पर क्यों नहीं मिली? उन्होंने अंदेशा जताते हुए कहा कि वारदात में एक आदमी से अधिक की संलिप्ता हो सकती है। उन्होंने कहा कि जांच एजैंसी को भी इस बारे में उन्होंने बताया था कि नीलू संलिप्त हो सकता है लेकिन एक का ही काम हो, ऐसा नहीं लगता? 

उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी दरिंदे संलिप्त हों, वे छूटने नहीं चाहिए और उन्हें फांसी होनी चाहिए तथा उनकी प्रॉपर्टी भी जब्त होनी चाहिए। पीड़ित पिता ने कहा कि मामला सामने आने के बाद उनके घर नेता से लेकर कई लोग आए लेकिन एक गांव के लोग नहीं आए। उनके अनुसार यह शातिर आदमी का काम है। जहां लाश मिली है, वहां वारदात नहीं हुई। पुलिस को भी यह बताया था।

क्या बोली गुड़िया की मां

गुड़िया की मां ने बताया कि बेटी के साथ पेश आई ऐसे वारदात के बाद घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है। किसी के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। आरोपियों को फांसी होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे मामले सामने नहीं आएं।

घर पहुंचा तो पता चला गुड़िया नहीं पहुंची : भाई
गुड़िया के भाई ने बताया कि बीते वर्ष 4 जुलाई की सुबह वह और उसकी बहन एक साथ स्कूल गए थे। स्कूल में उस दिन टूर्नामैंट थे तो मैं और मेरा दोस्त मामू के घर हीरुक गए जबकि गुड़िया ने कहा कि वह घर जाएगी। जब मैंने कहा कि जंगल का रास्ता है तो वह बोली में नहीं डरती और वहां से स्कूल से निकल गई। भाई ने बताया कि इसके बाद जब वह 5 जुलाई को घर पहुंचा तो पता चला कि वह घर नहीं पहुंची है। इसके बाद तलाश शुरू हुई तो उसका शव जंगल में पड़ा मिला।

एस.आई.टी. खुद हो गई अंदर
गुड़िया केस की जांच को विभाग ने एस.आई.टी. का गठन किया था। इसी कड़ी में एस.आई.टी. ने 6 कथित आरोपियों को पकड़ा और मामला सुलझाने का दावा किया। इसी बीच कोटखाई पुलिस लॉकअप में पकड़े गए एक कथित आरोपी सूरज की हत्या हो गई। सूरज की हत्या का आरोप एस.आई.टी. ने पकड़े एक अन्य कथित आरोपी राजू पर डाला। इसके बाद जब सी.बी.आई. ने मामले की छानबीन की तो जांच में पाया गया कि एस.आई.टी. ने गलत व्यक्तियों को मामले में गिरफ्तार किया और सूरज की हत्या का आरोप का षड्यंत्र रच राजू पर डाला जबकि उसकी हत्या पुलिस की पिटाई से हुई।

10 लाख के इनाम का भी किया था ऐलान
गुड़िया के कातिलों को सुराग ढूंढने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 10 लाख रुपए का ईनाम देने का भी ऐलान किया है। सी.बी.आई. ने यह ऐलान बीते 20 दिसम्बर को अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दायर करने से पहले किया था।

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