Thursday, January 17, 2019
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जाको राखे साइयां, मार सके न कोय: कुछ इस तरह सना ने दी मौत को मात

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‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’, यह कहावत यहां के कल्याणपुर की रहने वाली नौ साल की सना पर पूरी तरह से सही साबित होती: बिहार के मुंगेर में मंगलवार को दोपहर करीब 3 बजे 3 साल की मासूम सना बोरवेल में गिरी और तब से ही पूरा का पूरा परिवार इस बोरवेल के पास और पड़ोसी घर के बाहर जमा हो गये . प्रशासनिक अमले ने भी पूरी मुस्तैदी दिखाई और फौरन मौके पर पहुंच कर बोरवेल में ऑक्सिज़न पाइप पहुंचाई गई ताकि सना की सांसें चलती रहें हिंदुस्तान के नक्शे में बना ये गड्ढा हमें इस बात का अहसास करा रहा है कि सालों से हमने सिर्फ शिकायतें की हैं.

 मगर सीखा कुछ नहीं. यही वजह है कि हर साल ना जाने कितने ही बच्चे इन गड्ढों में जा गिरते हैं. कुछ इन अंधेरे गड्ढों से बच कर निकल आते हैं, तो कुछ उसी में दम तोड़ देते हैं. दो- चार दिन शोर होता हैं. फिर हम सब भूल जाते हैं. तब तक जब तक कि अगला कोई गड्ढे में ना गिर जाए. और इस बार तीन साल की सना की बारी थी. सना ज़मीन के नीचे 110 फीट गहरे गड्ढे में थी. वो कई घंटों तक जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही.

110 फीट नीचे फंसी थी सना

सना की जिंदगी अब पुलिस, प्रशासन और रेस्क्यू टीम के रहमो-करम पर थी. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना मौके पर थी. अब इस टीम को जमीन के नीचे 110 फीट गहरे गड्ढे में उतरना था. मगर उतरने के लिए रास्ता तो होना चाहिए ना और रस्ता था नहीं. लिहाजा हेमशा की तरह पहले रास्ता बनाया गया और ये रास्ता बना

ऐसे शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

बुधवार की सुबह होते ही मुंगेर के मुर्गियाचक मोहल्ले में सेना और प्रशासन की चहल पहल बढ़ने लगी. बेहद घना इलाका होने की वजह से रेस्क्यू टीम के पास इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं था कि इस सड़क को ही खोदकर घर की उस जगह तक पहुंचा जाए जहां सना नीचे फंसी हुई थी. जेसीबी मशीन के ज़रिए सड़क खोदने का काम यूं तो रात में ही शुरू हो गया था. मगर सुबह होते होते ये काम युद्ध स्तर पर चलने गया. कई टीमों ने मिलकर चंद घंटों में ही सड़क पर लंबा चौड़ा गड्ढ़ा खोद डाला.

सबसे पहले सीधी गहराई करते हुए सड़क पर गड्ढ़ा बनाया गया और फिर वहां से समतल टनल तैयार की गई जिससे सना तक पहुंचा जा सके. हालांकि इस खुदाई में कई तरह की दिक्कतें आईं मगर सना को बचाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी.

कब्र बनाने वालों ने खोदा गड्ढ़ा

बेहद घना इलाका होने और तमाम मुश्किलों के बावजूद पैरलल चैनल बनाने का काम आसान नहीं था. कहीं कोई गलती की गुंजाइश ना रह जाए लिहाज़ा प्रशासन ने बचाव कार्य में उन मजदूरों को भी लगा लिया जो कब्र खोदते हैं. क्योंकि ये मजदूर तरतीब से गड्ढ़े खोदने में माहिर होते हैं. बड़ा अजब मंज़र था बिहार के मुंगेर में. अभी तक मौत के बाद कब्र खोदते रहे हाथ आज जिंदगी के लिए गड्ढे खोद रहे थे.
सना को बचाने में लगा दी पूरी ताकत

उधर, जमीन के अंदर कैमरा लगातार चालू था. उसी कैमरे से दिख रहा था कि सना 35 फीट की गहराई में बोरिंग के लिए डाले गए प्लास्टिक के पाइप में फंसी है. घर में बोरिंग का काम कर रहे कारीगरों के मुताबिक जिस गड्ढ़े में सना फंसी हुई थी उसे बोरिंग के लिए 220 फीट गहरा किया गया था. जिसमें करीब 125 फीट तक ग्रेबुल भी डाला जा चुका था. लिहाज़ा सना तक पहुंचने के लिए रेस्क्यू टीम को बहुत एहतियात बरतना पड़ेगा वरना सना नीचे की तरफ भी जा सकती है. इस बीच पूरे इलाके को तकरीबन ठप कर के सारी कोशिश सना को बचाने में लगा दी गई

..और बच गई मासूम की जिंदगी

ये कोशिश रंग लाई. शाम होते-होते रेस्क्यू टीम सना से सात फीट की दूरी तक पहुंच जाती है. अब यहां से और एहतियात बरतने की जरूरत थी. काम धीमा हो जाता है. फिर आहिस्ता-आहिस्ता आखिरकार जिंदगी के दो हाथ सना के हाथों तक पहुंच जाते हैं. और करीबन 30 घंटे बाद सना को बचा लिया जाता है. और इस तरह से सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की कोशिश कामयाब हुई. सना की जिंदगी बचा ली गई.

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