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जेब में तंबाकू है तो इन गांवों में नहीं मिलेगी एंट्री

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कुल्लू (शम्भू प्रकाश): देवसत्ता का प्रभाव ऐसा है कि यहां हर कोई नियम तोड़ने से डरता है। बीड़ी, सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद नशे के आदी कई लोग अपनी जेब में रखते हैं और घरों के भीतर भी तंबाकू उत्पादों को लेकर जाते हैं। हालांकि किसी के घर में तंबाकू उत्पादों को ले जाने की मनाही नहीं होती। हैरत वाली बात यह है कि लगघाटी के कई गांवों में बीड़ी-सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों को लेकर प्रवेश तक नहीं किया जा सकता। यदि कोई व्यक्ति गलती से ऐसा करता है तो उसे देवता के आदेशों पर दंड स्वरूप जुर्माना अदा करना पड़ता है। जेब में यदि तंबाकू उत्पाद है तो उसे तुरंत जला दिया जाता है। देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों के देवालय इन गांवों में हैं और सदियों से इन्हीं के आदेशों पर ऐसे नियम बने हैं।

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लोग आज भी इन नियमों का पालन कर रहे हैं और गांव के भीतर तंबाकू उत्पाद को लेकर प्रवेश नहीं करते। यदि कोई मेहमान स्वरूप गांव में आ रहे हों तो उन्हें भी पहले ही हिदायत दी जाती है कि जेब में तंबाकू उत्पाद हैं तो इन्हें गांव से बाहर ही फैंक दें। इन गांवों में देवी-देवताओं के आदेशों को सर्वोपरि माना जाता है। देवता ने जो आदेश दिए उन्हें पत्थर की लकीर मानते हुए उन्हीं के अनुसार देव कारज निपटाए जा रहे हैं। लोग देव आदेशों से ऐसे बंधे हुए हैं कि वे इन आदेशों से बाहर नहीं जा सकते। चमड़े की बैल्ट, बैग या अन्य चीजें लेकर भी इन गांवों में प्रवेश निषेध माना जाता है। यदि गांव में चमड़े का कोई सामान लेकर गलती से भी कोई प्रवेश करे तो उसे भी देव आदेश पर दंड स्वरूप जुर्माना अदा करना पड़ता है।

गलती से यदि किसी देवालय में तंबाकू उत्पाद लेकर कोई गया तो जुर्माना राशि भी अधिक होगी और शुद्धि के लिए मंदिर में अनुष्ठान भी करवाना पड़ेगा। हालांकि जिला कुल्लू के अन्य मंदिरों में भी तंबाकू उत्पाद और चमड़े का सामान लेकर जाना निषेध है लेकिन गांव के भीतर जाने की कोई मनाही नहीं है। लगघाटी के कई गांवों के भीतर तंबाकू उत्पादों के साथ प्रवेश पर भी कड़ी मनाही है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को लोग आज भी निभा रहे हैं और देव आदेश से बंधकर कोई भी ऐसा जुर्म करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाता।

अलग-अलग हैं नियम
कुल्लू जिला में अलग-अलग मंदिरों में अलग-अलग नियम भी हैं। कई मंदिर ऐसे भी हैं जहां लोग मनोकामना पूर्ण होने पर लोहे का सामान, कहीं सफेद रंग के फूल, कहीं अन्य किस्मों के फूल, कहीं विशेष तरीके से तैयार किया गया प्रसाद चढ़ाते हैं। कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां मनोकामना पूर्ण होने पर लोग आभूषण चढ़ाते हैं। देवी जगन्नाथी के देवरथ को सूर्यास्त के बाद कहीं नहीं ले जाया जा सकता। देवी-देवताओं के देवालय तक पहुंचने के भी अपने चिन्हित रास्ते हैं और इन्हीं रास्तों से देवी-देवता आते-जाते हैं। दैवीय शक्ति के प्रभाव से किसी अनहोनी का भी देवी-देवता पहले ही आभास करवाते हैं। दशहरा उत्सव के लिए निमंत्रण पत्र हालांकि 305 देवी-देवताओं को भेजे जाते हैं लेकिन उत्सव में अढ़ाई सौ के लगभग देवी-देवता पहुंचते हैं।

देवी-देवताओं के आदेश मान्य
लगघाटी के जिन गांवों में तंबाकू उत्पाद और चमड़े का सामान लेकर जाने की मनाही है उनमें जठाणी, ग्रामग, तिऊण, समालंग, जिंदी व फलाण शामिल हैं। इन गांवों में फलाणी नारायण, कतरूसी नारायण, माता फुंगणी सहित अन्य देवी-देवताओं के आदेश मान्य हैं। कतरूसी नारायण के कारदार रूम सिंह नेगी, चंद्र नेगी, हुकम राम, नारायण सिंह ठाकुर, पूर्ण चंद व देवराज आदि ने कहा कि यदि इन गांवों में कोई बतौर मेहमान भी प्रवेश करना चाहे तो उन्हें भी हिदायत दी जाती है कि जेब में तंबाकू उत्पाद हैं तो उन्हें गांव से बाहर ही फैंक दें। लोग देव आदेशों पर यहां नियमों का पालन करते हैं और ऐसा परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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