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देवभूमि कुल्लू में मिट्टी में पत्थर गाड़कर भक्त देते हैं देवता को अपनी उपस्थिति का संकेत

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देवभूमि कुल्लू में मिट्टी में पत्थर गाड़कर भक्त देते हैं देवता को अपनी उपस्थिति का संकेत: देवभूमि कुल्लू में देवी-देवताओं के भक्तजन जब देव स्थल में दर्शन करने के लिए जाते हैं तो मंदिर में माथा टेककर घंटी बजाते हैं। जिससे भक्तजन अपनी उपस्थिति का संकेत देवता को देता है लेकिन देव घाटी कुल्लू में अलग-अलग देव स्थलों में अनेक प्रकार से देवी-देवता को संकेत दिए जाते हैं। धरोहर गांव नग्गर से सटी पहाड़ी पर स्थित अठारह करडू की सौह चंद्रखणी पर्वत पर भक्त अपने देवता को अनोखी परंपरा अनुसार संकेत देते हैं। इस देव स्थल पर जब कोई भी पहली बार भक्त दर्शन के लिए पहुंचता है तो उसे सबसे पहले नुकीले लंबे पत्थर को जमीन में गाड़ना पड़ता है। इस पत्थर पर अपना नाम व देवी-देवता का नाम भी लिखना पड़ता है।

इस परंपरा का निर्वहन करने के बाद ही अठारह करडू देवी-देवता व देव कन्याओं का दर्शन किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से भक्तों की सर्व मनोकामना पूर्ण होती है। अब तक चंद्रखणी पर्वत देव स्थल में भक्तजन सैंकड़ों नुकीले पत्थरों को जमीन में गाड़ चुके हैं। यहां सदियों से देव स्थल के बीचोंबीच घाटी के समस्त देवी-देवताओं के प्रतीक चिन्ह के रूप में पत्थर के स्तंभ विद्यमान हैं और इसके इर्द-गिर्द प्राचीन काल से भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए मिट्टी में पत्थर गाड़ रखे हैं। देवलुओं की धार्मिक आस्था आज भी बरकरार है। देवलुओं की मानें तो चंद्रखणी पर्वत पर 60 देव कन्याओं का निवास स्थान है। क्षेत्र के देवी-देवता हर साल शक्तियां अर्जित करने के लिए कारकूनों सहित यहां देव कन्याओं का पूजन करते हैं। यदि हारियान क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा कहर मचाती हैं तो इसके निवारण के लिए भी क्षेत्र के देवलू इस पवित्र स्थल में जाकर देव कन्याओं का विधिवत पूजन करते हैं।

यहां पर हुआ था अठारह करडू देवी-देवताओं का बंटबारा

माना जाता है कि जब सृष्टि का निर्माण हुआ था तब इंद्रकीला और चंद्रखणी पर्वत जल से बाहर आए थे, उस समय अठारह करडू देवी-देवताओं का बंटबारा हुआ था। देवलू कहते हैं कि मणिकर्ण घाटी के पीणी क्षेत्र की कन्या रूपी माता भागासिद्ध ने सभी देवताओं को अलग-अलग स्थान बांट दिया था। सबसे पहले बिजली महादेव ने अपना स्थान चुना था। देवों के देव महादेव ने चंद्रखणी पर्वत से ही अपना त्रिशूल बिजली महादेव की पहाड़ी पर फैंककर स्थान चुना था और उसके बाद सभी देवी-देवताओं ने अपना स्थान चुना था।

यहां ओस के पानी से स्नान करते हैं देवलू

अठारह करडू की सौह चंद्रखणी देव स्थल में श्रद्धालु जहां देवी-देवता के दर्जन करते हैं, वहीं यहां पवित्र तीर्थ स्थल भी माना गया है। घाटी के देवलू भाद्र माह की 20 और ज्येष्ठ माह के 20 प्रविष्टे को ओस के पानी से स्नान करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से चमड़ी रोग दूर होता है। यहां तीर्थ स्नान के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं।

देव कन्याओं को पसंद नहीं शोर-शराबा

धार्मिक देव स्थल चंद्रखणी पर्वत में 60 देव कन्याओं का वास होने के कारण यहां शोर-शराबा जैसे जोर-जोर से आवाज लगाना व सीटी बजाना आदि वर्जित है। यहां पर वास करने वाली देव कन्याओं को शोर-शराब बिल्कुल भी पसंद नहीं। अगर कोई श्रद्धालु शोर-शराबा करता है तो देव कन्याएं नाराज हो जाती हैं जिससे अनहोनी हो जाती है, वहीं जब देव कन्याएं नाराज हो जाती हैं तो उन्हें मनाने के लिए काफी समय लग जाता है, ऐसे में देवलुओं को इस नियम का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

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