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न शव रोके, न ही घरों से वापिस अस्पताल लाए, 17 को एक-एक पहलू अदालत में रखेगी जयराम सरकार

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शिमला। बेहद हृदयविदारक नूरपुर बस हादसे को लेकर जयराम सरकार हाईकोर्ट में एक-एक बिंदु पर अपना पक्ष रखेगी। नूरपुर बस हादसे में 24 बच्चों सहित 27 लोगों की दर्दनाक मौत के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है।

उधर, एक समाचार पत्र की खबर से उपजे विवाद के बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को अवगत करवा चुकी है कि न तो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आगमन को देखते हुए बच्चों के शवों को रोका गया और न ही किसी बच्चे के पार्थिव शरीर को घर से वापिस अस्पताल मंगवाया गया। राज्य सरकार ने अदालत में कहा है कि 17 अप्रैल को अगली सुनवाई पर बिंदुवार हर पहलू पर रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष रखी जाएगी।

 

हाईकोर्ट ने इस मामले में पूर्व एडवोकेट जनरल श्रवण डोगरा को एमिक्स क्यूरी बनाया है। अगली सुनवाई पर राज्य सरकार के मुख्य सचिव व एमिक्स क्यूरी पूरे मामले पर विस्तार से रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इस बीच, सरकार ने जिला प्रशासन, अस्पताल प्रशासन, सीएमओ व पुलिस प्रशासन से पल-पल की रिपोर्ट मंगवाई है। उसी रिपोर्ट के आधार पर तथ्यों सहित सरकार का पक्ष हाईकोर्ट में रखा जाएगा। राज्य सरकार अदालत में ये भी बयान दे चुकी है कि शवों को रोके रखने व घर से वापिस अस्पताल मंगवाने का समाचार निराधार व गलत है। ये खबरें पूरी तरह से झूठ हैं।

दरअसल, बीते दिन राज्य सरकार के मुख्य सचिव एक केस के सिलसिले में अदालत में तलब थे। वहीं, पर नूरपुर हादसे से जुड़ी विवाद भरी खबरों का जिक्र आया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष एमिक्स क्यूरी श्रवण डोगरा ने उक्त खबर का जिक्र किया। इस पर अदालत में मौजूद राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने पहले तो मौखिक रूप से इस खबर का खंडन किया और फिर अदालत के समक्ष लिखित में भी जवाब दाखिल किया कि ऐसा कुछ नहीं है और प्रकाशित खबर भ्रामक है। मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने भी कहा कि सरकार अगली सुनवाई पर विस्तार से रिपोर्ट पेश करेगी।

यहां बता दें कि हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार सहित वजीर राम सिंह पठानिया मेमोरियल स्कूल प्रबंधन को भी नोटिस दिया है। वहीं, गुरूवार को नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया मीडिया के समक्ष पल-पल का सिलसिलेवार घटनाक्रम रख चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय प्रशासन ने पीडि़ परिवारों की पूरी तरह से मदद की है। शवों को रोके रखने और घरों से वापिस अस्पताल मंगवाने संबंधी सारे समाचार निराधार हैं।

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