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यहां देवता से लगाई जाती है बारिश की फरियाद, सूखे से बचने के लिए पहुंचते हैं हजारों लोग

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 बागवानों का कहना है कि सिर्फ सेब सीजन के दौरान ही यहां बारिश हुई थी, उसके बाद यहां किसानों और बागवानों को बारिश नसीब नहीं हुई है। जिससे खेतों को उचित नमी नहीं मिल रही है। सेब सीजन अब खत्म हो गया है। बागबान बागबानी के कार्य को अंजाम देने वाले हैं, लेकिन बारिश न होने के कारण उनका यह कार्य ठप्प पड़ा हुआ है।

बिना बारिश के सूखे की चपेट में सेब के पौधे 

घाटी के बागवानों का कहना है कि उन्होंने सेब के पौधों में तौलिए का काम शुरू करके खाद आदि डालने की प्रक्रिया शुरू कर दी। वहीं समय पर यदि बारिश नहीं हुई तो उनके सेब के पौधे सूखे की चपेट में आ सकते हैं। साथ ही कृषि कार्य भी बारिश न होने से सूखे की भेंट चढ़ गया है।

मक्की के बाद अब बागबान गेहूं की फसल की बुआई करना चाहते हैं। ऐसे में अब लोग बारिश के लिए देवी-देवताओं की शरण में भी पहुंचने लगे हैं। बता दें कि घाटी में लोग बारिश की फरियाद के लिए देवताओं के दर पहुंचते हैं। मान्यता है कि  देवता के दर जाने से सूखे की समस्या से निजात मिलती है।

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