Himachal

युवक ने तड़फ तडफ कर तोड़ा दम,लोग बनाते रहे वीडियो, स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने लोगों से की अपील

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शिमला/बिलासपुर/मंडी। जिले के रानीकोटला गांव के पास ट्रक द्वारा एक व्यक्ति को कुचलने के बाद उसकी मौत के मामले ने जहां सरकारी व्यवस्था की पोल खोली वहीं, संकीर्ण सामाजिक सोच को भी उजागर कर दिया। एक तरफ जहां घायल लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा तो दूसरी तरफ लोग घायल का वीडियो बनाने और फोटो खिंचने में व्यस्त रहे।

बताया जा रहा है कि एम्बुलेंस को भी फोन किया गया लेकिन, इसके लिए कर्मचारियों की हड़ताल होने के कारण एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंच सकी। घटनास्थल में लोगों ने भी घायल को अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई और भीड़ फोटो खींचने और वीडियो बनाने में लगी रही। बाद में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि ने घायल को अपनी नीजि कार से अस्पताल तो पहुंचाया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

लोगों ने दिखाई संवेदनहीनताः स्वास्थ्य मंत्री इस घटना पर बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि लोगो द्वारा युवक की मदद न करके सेल्फी और वीडियो बनना संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि दुर्घटना के समय वीडियो बनाने में वक्त गवाए बिना लोगों को मदद करने के लिए आगे आना चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री परमार ने कहा कि कहीं पर स्वास्थ्य सेवा समय पर नहीं मिल रही है तो जो लोग घटना स्थल पर है उन्हें बेझिझ होकर घायलों को अस्पताल तक पहुंचाना चाहिए ताकि समय पर घायल का इलाज हो सके। बिलासपुर हादसे को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा की किसी कारणवंश एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंची, लेकिन जो लोग वहां पर थे उन्हें उसी समय युवक को अस्पताल ले जाना चाहिए था। कोर्ट ने भी प्रावधान भी किया है कि जो मदद के लिए आगे आता है उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी और न ही उसे गवाह बनाया जाएगा।

बिलासपुर जिला के नैना देवी विधानसभा के पूर्व विधायक रणधीर शर्मा ने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा कि लोगों ने मदद के बजाय वीडियो बनाते रहे। उन्होंने कहा कि लोगों को युवक को बचाने का प्रयास करना चाहिए था। 
इस घटना को लेकर जहां राज्य सरकार के प्रबंधनों की किरकिरी हो रही है, वहीं लोगों की संकीर्ण मानसिकता पर भी जमकर कटाक्ष किया जा रहा है। मंडी जिला के नीटू, गगन कुमार और एसआर राजू ने कहा कि अगर एम्बुलेंस की हड़ताल थी तो सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। सरकार ने ऐसा क्यों नहीं किया। 
यदि एम्बुलेंस नहीं भी आई तो स्थानीय लोगों का फर्ज बनता था कि वो घायल को किसी अन्य माध्यम से अस्पताल पहुंचाते ताकि उसकी जान बचाई जा सके। वहीं लोगों का यह भी कहना है कि संवेदनशील विभागों के कर्मचारियों की हड़ताल पर सरकारों को रोक लगा देनी चाहिए और इन विभागों के कर्मचारियों की मांगों को समय रहते पूरा कर लेना चाहिए।
वहीं प्रदेश के अन्य जिलों के से भी इस घटना में लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। लोगों ने कहा कि लोग सोशल मीडिया में मुद्दों को उजागर करने के चक्कर में मदद करना भूल जाते है जिसके कारण कई लोग जान गंवा देते हैं। लोगों ने कहा कि ऐसे समय में लोगों को मदद करने के लिए आगे आना चाहिए। 

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