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वीरभद्र की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, CM जयराम ने इस मामले की विजिलेंस जांच के दिए आदेश

Virbhadra Singh
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अगस्त 2017 की एक कैबिनेट मीटिंग में तुरत-फुरत फैसला लिया गया कि सोने का शोधन यानी गोल्ड रिफाइन का कारोबार करने वाली दो कंपनियों का 14 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स माफ कर दिया जाए। बताया जाता है कि उस समय संबंधित महकमों के आला अफसर इस फैसले के पक्ष में नहीं थे।
जानकारी के अनुसार ये गोल्ड कारोबारी सत्ता पक्ष के अलावा विपक्ष के भी कई नेताओं के चहेते थे और इनके साथ इलेक्शन फंडिंग का फंडा भी जुड़ा था, लिहाजा उनकी पैरवी करने वाले कम नहीं थे। हैरत की बात है कि ये गोल्ड कारोबारी सात साल से टैक्स की अदायगी करने से बच रहे थे। फिर भी, 22 अगस्त 2017 को वीरभद्र सिंह सरकार की कैबिनेट मीटिंग में उन्हें टैक्स माफ करने वाला फैसला ले लिया गया था।

सोने को चमकाने यानी गोल्ड को रिफाइन करने वाली इन दो कंपनियों की किस्मत चमकाने वाला फैसला वीरभद्र सिंह सरकार ने ले लिया था। ये कंम्पनियां हमीरपुर जिला के नादौन और सोलन जिला के परवाणु की हैं। नादौन की कम्पनी मैसर्स एजे गोल्ड रिफाइनरी नाम से और परवाणु की कंपनी मैसर्स साई रिफाइनरी के तौर पर पहचान रखती है।
इन दोनों कंपनियों से 14 करोड़ रुपये से अधिक का एंट्री टैक्स लिया जाना था। दोनों ही कंपनियां टैक्स देने में आनाकानी कर रही थीं। इन कंपनियों के चाहने वाले सरकार में भी थे और विपक्ष में भी, लिहाजा सख्ती नहीं हुई। हालात ये था कि परवाणु वाली कंपनी तो बिना टैक्स अदा किए बंद भी हो चुकी थी। बताया जाता है कि वीरभद्र सिंह सरकार के नौकरशाहों ने भी टिप्पणी की थी कि ये छूट देना कानूनन सही नहीं है।

आबकारी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने भी उस दौरान यही टिप्पणी की थी। चौंकाने वाली बात ये भी सामने आई थी कि सरकार ने एंट्री टैक्स को वर्ष 2011 में एक प्रतिशत से घटाकर आधा प्रतिशत कर दिया था। मेहरबानी का ये सिलसिला कुछ यूं चला कि अगले ही साल यानी वर्ष 2012 में ये छूट .25 फीसदी कर दी गई। चार साल बीते, टैक्स अदा करना तो दूर कंपनियों को सरकार ने और बड़ी छूट दे दी। एंट्री टैक्स की दर वीरभद्र सिंह सरकार ने .10 फीसदी कर दी। नादौन की फर्म मैसर्स एजे गोल्ड पर 8.45 करोड़ और परवाणु की फर्म पर 5.65 करोड़ रुपए से अधिक का एंट्री टैक्स बकाया था।

लॉ डिपार्टमेंट ने बाद में रोक दिया था टैक्स माफी का फैसला
सोने की इन दो रिफाइनरीज को उपकृत करने के लिए वीरभद्र सिंह सरकार ने कई प्रयास किए थे। सरकार की मंशा थी कि चुनाव से पहले इन दोनों कंपनियों पर 14 करोड़ रुपये की मेहरबानी कर दी जाए। बताया जा रहा है कि ये मेहरबानी चुनावी फंडिंग से भी जुड़ी हुई थी, लेकिन कैबिनेट के टैक्स माफी वाले फैसले में लॉ डिपार्टमेंट ने अड़ंगा लगा दिया था।

लॉ डिपार्टमेंट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि जीएसटी लागू होने के बाद पुराना टैक्स माफ करने का अधिकार प्रदेश सरकार के पास नहीं है। लिहाजा इन दो फर्मों को अगर कोई इन्सेटिव दिया जाना है तो उसकी टर्म एंड कंडीशन क्या होगी? लॉ डिपार्टमेंट ने कहा कि इस संदर्भ में एक पॉलिसी बनाकर भेजी जाए, जिससे इस पर कानूनी राय दी जा सके।

लॉ डिपार्टमेंट के इस कदम से टैक्स माफी की प्रक्रिया लंबी हो रही थी। अक्टूबर 2017 में चुनाव संहिता लगने के आसार थे। ऐसे में टैक्स माफी वाला किस्सा खत्म होने के आसार पैदा हो गए। हालांकि 22 अगस्त की कैबिनेट मीटिंग में सरकार ने सभी तर्कों को दरकिनार करते हुए टैक्स माफी का आदेश दे दिया था।

अब जयराम सरकार ने इस सारे मामले की विजिलेंस जांच का आदेश दिया है। ऐसे में टैक्स माफी वाली प्रक्रिया शुरू करने वाली एजेंसियां विजिलेंस जांच में फंस सकती हैं। जयराम सरकार ने कहा कि इस तरह का आपराधिक षडयंत्र रचने वाले दंडित किए जाएंगे।

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