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वीरभद्र-सुक्खू मतभेद सामने न लाएं उतना ही कांग्रेस के लिए अच्छा: बाली

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पी.सी.सी. अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और वीरभद्र सिंह के बीच चल रही लड़ाई बारे में पूर्व परिवहन मंत्री जी.एस. बाली ने कहा कि मनभेद तो होना नहीं चाहिए, मतभेद हो सकते हैं तथा इन मतभेदों को जितना कम सार्वजनिक लाएं उतना ही पार्टी के लिए अच्छा है। इन मतभेदों को यदि हम हर रोज सार्वजनिक मंचों पर लाएंगे तो इसका नुक्सान लोकसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि यह जनता है और यह सब कुछ जानती है और हमें पहले अपने घर को ठीक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के लोग लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को वापस लाना चाहते हैं। इसके लिए लोगों की सोच चल पड़ी है।

लोकसभा चुनावों में प्रत्याशी के रूप में चुनावों को लडऩे की बात पर बाली ने कहा कि वह भविष्य की राजनीति नहीं करते और न ही लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अपने आप तैयार हैं। लोकसभा चुनावों में सुधीर-बाली की चर्चाओं पर बोलते हुए बाली ने कहा कि ये बड़े-बड़े नेता हैं और इनके मुकाबले में मैं कुछ भी नहीं हूं। इस बारे में मैं कुछ भी नहीं बोलना चाहता। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस में हो रही लंच व डिनर डिप्लोमैसी पर पूछे गए प्रश्न पर बाली ने कहा कि लंच व डिनर चलते रहते हैं और लंच वो होगा जो धाम लगेगी जिसको प्रदेश की जनता खाएगी। 

सरकार की खूबी पर बाली बोले..
वर्तमान सरकार की खूबी पर बाली ने कहा कि वर्तमान सरकार फिलहाल साइलैंट गेयर पर है और साइलैंट गेयर पर होने वाली चीज कहीं भी जा सकती है। उन्होंने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि मुख्यमंत्री को ठीक को ठीक और गलत को गलत बोलने का साहस रखना पड़ेगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भले आदमी हैं और उन्हें कठोर फैसले भी लेने चाहिए। 

यह बताई कांग्रेस की कमी
कांग्रेस पार्टी की वर्तमान में कमी को लेकर बाली ने कहा कि हमारे संसाधन को जनरेट करने पर कार्य करना चाहिए जोकि फिलहाल नहीं हो रहा है। 

अब पछताए क्या होत…
विधानसभा चुनावों में अपनी हार पर बाली ने कहा कि उनका यह पांचवां चुनाव था और चुनावों में मिली हार की एक ही वजह थी जो हमारे कार्यकर्ता व मतदाता थे रोजगार को लेकर उनकी उम्मीदें इतनी थीं जिनको पूरा करने के लिए और समय लगना था। उन्होंने कहा कि ऐसी ही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों को कही है कि वह सत्ता में आते ही 2 करोड़ लोगों को नौकरियां देंगे। अगर वह इस वायदे को पूरा नहीं करते हैं तो उसका खमियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ेगा। विधानसभा चुनावों में बाली की हार में अपनी ही पार्टी के लोगों का हाथ होने की बात पर उन्होंने कहा कि जब वह जीतते थे तो अपने दम से जीतते थे और जो हार इस बार मिली है वह भी मुझे ही मिली है। उन्होंने इस बात को ‘अब पछताए क्या होत जब चिडिय़ा चुग गई खेत’ पर बोलकर खत्म कर दिया। 

विधानसभा में ओवर कॉन्फीडैंस से हारे
पूर्व मंत्री ने माना कि विधानसभा चुनावों में ऐसी काफी गलतियां हुई हैं जिनको अब दोहराना नहीं चाहिए। यदि उन गलतियों को फिर दोहराएंगे तो उससे पार्टी को फिर नुक्सान झेलना पड़ सकता है। ‘पंजाब केसरी’ के साथ विशेष वार्ता में जी.एस. बाली ने कांग्रेस पार्टी की लोकसभा चुनावों की तैयारियों व विधानसभा चुनावों में मिली हार को लेकर खुलकर बातचीत की। प्रदेश कांग्रेस में वीरभद्र सिंह के रोल के बारे में पूछे गए प्रश्न पर जी.एस. बाली ने कहा कि वीरभद्र सिंह कांग्रेस में प्रदेश के वरिष्ठ नेता हैं और वह आज इस पायदान पर हैं कि कांगे्रस में उनका रोल उन्होंने स्वयं ही निश्चित करना है। हम सब उनका सम्मान करते हैं। विधानसभा चुनावों में बड़े नेताओं की हार के कारणों पर बाली ने कहा कि एक कारण विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली हार का कारण ओवर कॉन्फीडैंस रहा। 

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