Himachal

वैज्ञानिकों की टीम को हिमाचल की इस जगह मिले पाषाण कालीन संस्कृति के औजार

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भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण केंद्र देहरादून की टीम को हिमाचल के बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र से पाषाण कालीन संस्कृति के औजार मिले हैं। ये औजार खेतीबाड़ी और शिकार में इस्तेमाल किए जाते थे। टीम पिछले कुछ दिनों से बिलासपुर के उपमंडल में सर्वेक्षण कार्य में जुटी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस खोदाई में कुछ और अवशेष मिल सकते हैं।

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इस क्षेत्र से पूर्व में कपि मानव के अवशेष मिले थे। टीम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि इन औजारों की लैब में जांच होगी। यहां पूर्व में भी कपि मानव के अवशेष मिले हैं। इसी महत्व को देखते हुए भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण केंद्र देहरादून ने राष्ट्रीय परियोजना के रूप में शिवालिक उत्खनन परियोजना की संकल्पना की है।

इसी के तहत वैज्ञानिकों की टीम जिला बिलासपुर में काम कर रही है। भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण देहरादून द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत शिवालिक परियोजना के लिए सर्वेक्षण के काम विभागाध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन की अध्यक्षता में किया जा रहा है।

इस अनुसंधान टीम में सुदर्शन वैद्य संग्रहालय अधीक्षक, कुमार मंगल, बलवंत राय, डॉ. मानवेंद्र सिंह, वरल कुमार बैन, कुमारी अहाना घोष शामिल हैं। रिसर्च टीम द्वारा मध्य शिवाली क्षेत्र में प्रदेश के घुमारवीं तहसील की सीर खड्ड की धारा बम्म में सर्वेक्षण कार्य कर रही है। इसी दौरान टीम को पाषाण कालीन संस्कृति से जुड़े औजार मिले हैं।

इसे असुलियन संस्कृति के नाम से जाना जाता है। उस समय के कई प्रकार के औजार जैसे हस्त कुठार, हंडेक्स, कलिबर, हिमुखीय चॉपर, स्क्रैपर, असुलियन पीक, कुदाल आदि टीम को मिले हैं।

जांच टीम को असूलियन अवस्थापना के साथ-साथ सोहानियन संस्कृति के औजार भी प्राप्त हुए हैं। जो और भी दिलचस्पी जगाने वाला है। अभी टीम अगले कई दिनों तक जिला में सर्वेक्षण कार्य करेगी।

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