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सरहद पर दुश्मनों को किया चित्त, MS धोनी को दी सिक्योरिटी, अब बच्चों को मुफ्त कराटे सिखा रहा ये कमांडो

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कांगड़ा। मेरी अपनी कोई बेटी नहीं है, लेकिन पिछड़े ग्रामीण इलाकों के हालात और बेटियों का दर्द समझता हूं। बेटियों में इतना साहस होना चाहिए कि जब यह गांव से बाहर जाएं तो यह किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकें। ये कहना है लोहारड़ी में लड़कों और लड़कियों को मुफ्त मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रहे पूर्व एनएसजी कमांडो मुकेश ठाकुर का।

गांव से बाहर बेटियां अपने दम पर खुद को सुरक्षित महसूस कर सके इसका बीड़ा पूर्व फौजी और एनएसजी के कमांडो रह चुके रिटायर्ड मुकेश ठाकुर ने उठाया है। मुकेश इन दिन पिछड़े इलाकों को लड़के और लड़कियों को मुसीबत से निपटने के लिए उन्हें मार्शल आर्ट सिखा रहे हैं और चेन्नई की बुदोकाई एसोसिएशन की ओर से प्रमाण पत्र भी दिलवाते हैं। बता दें कि फौज में नौकरी करने के बाद मुकेश ठाकुर वर्तमान में लोहारड़ी स्कूल में बतौर शिक्षक सेवारत्त है।

मुकेश का कहना है कि जब उन्होंने बतौर टीजीटी लोहारड़ी का स्कूल ज्वाइन किया तो इस पिछड़े क्षेत्र की महिलाओं और लड़कियों के हालात देख इनमें आत्म विश्वास जगाने के लिए कराटे सीखने का मन बनाया। जिसके बाद उन्होंनें लोहारड़ी स्कूल को ग्राउंड में ही ये ट्रेनिंग शुरू कर दी। स्कूल के प्रांगण से कुछ एक बच्चों के साथ आरंभ हुआ यह सफर दो साल में 60 बच्चों तक पहुंच गया।

मुकेश रोज सुबह स्कूल शुरू होने से पहले लड़कियों और लड़कों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देते हैं। इनमें प्राइमरी स्कूल से सेकेंडरी लेवल तक के बच्चे कराटे सीख रहे हैं। मुकेश लड़कियों और लड़कों का हौसला और बढ़ाने के लिए मार्शल आर्ट की चेन्नई में स्थित एसोसिएशन के जरिए स्पेशल कैंप करवाकर बच्चों को प्रमाण पत्र भी दिलवाते हैं।

कौन हैं मुकेश ठाकुर ?
साढ़े तीन साल कमांडो और 17 साल की आर्मी की नौकरी से सेवारत्त होने के बाद मुकेश भारतीय किक्रेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की चीफ सिक्योरटी ऑफिसर रहे। इसके बाद उन्होंने बतौर टीजीटी लोहरड़ी स्कूल ज्वाइन किया। जहां वह वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मुकेश ठाकुर ने आर्मी के बाद पुलिस की नौकरी ज्वाइन की थी, लेकिन कुछ महीने उस नौकरी को करने के बाद उन्होंने वहां से त्यागपत्र देकर बतौर टीजीटी लोहारड़ी में ज्वाइनिंग दी। मुकेश कहते हैं कि मेरे साथी मेरा मजाक उड़ाते थे, लेकिन मैं बिना इसकी परवाह किए शिक्षा क्षेत्र में आया।

‘मेरा सपना पूरा हो रहा है’
मुकेश कहते हैं कि वह यहां दो साल से मार्शल आर्ट सिखा रहे हैं और ऐसे में धीरे-धीरे उन्हें अपना सपना सच होता दिख रहा है। वह कहते हैं कि इन बच्चों को देखकर एक अजीब सा सुकून और खुशी मिलती है। बता दें के लोहारड़ी स्कूल के बच्चे नेशनल प्रतियोगिताएं भी जीत चुके हैं।

‘बेकार न घूमें लड़के’
मुकेश ठाकुर स्कूल के बच्चों के भविष्य को लेकर भी कितने चिंतित हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह कराटे सीखने वाले बच्चों को भविष्य में इसे बतौर व्यवसाय अपनाने का आग्रह भी करते हैं। बकौल मुकेश आज के दौर में नौकरी मिलना आसान नहीं है, ऐसे में अगर लड़कों में कराटे ज्ञान होगा तो वइ इसे बतौर व्यवसाय भी आरंभ कर सकते हैं।

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