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हिमाचल प्रदेश में सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जों के मामले में हाईकोर्ट ने फिर से फटकार लगाई

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शिमला: हिमाचल प्रदेश में सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जों के मामले में हाईकोर्ट ने फिर से फटकार लगाई है। प्रदेश वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त करवाने में डिमार्केशन के कारण हो रही देरी पर संज्ञान लेते हुए अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि वन विभाग खुद डिमार्केशन के लिए आवेदन कर बेदखली को लंबा न खींचे। विभाग को जब अपनी भूमि का पता है तो उन्हें डिमार्केशन करवाने का कोई प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता। यदि किसी को उनकी कार्यवाही से तकलीफ हो तो वो डिमार्केशन करवाए, न कि विभाग। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कोर्ट में उपस्थित प्रदेश के सभी वन मंडलों के वन अधिकारियों, राजस्व विभाग के उपमंडल अधिकारियों व तहसीलदारों को ईमानदारी से अपने-अपने क्षेत्र के सबसे बड़े अवैध कब्जाधारियों पर बिना किसी राजनीतिक व ब्यूरोक्रेसी के दबाव में आकर 2 सप्ताह में बड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

2 सप्ताह में बड़ी कार्रवाई करने को कहा

कोर्ट ने सभी उपस्थित अधिकारियों को 2 सप्ताह के भीतर अपने निजी शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को यह बताने के आदेश दिए कि उन्होंने प्रतिदिन के हिसाब से अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ क्या-क्या कार्रवाई। कोर्ट ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले सभी संबंधित अधिकारियों की कार्रवाइयां को सभी प्रकार के मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने के आदेश भी दिए, ताकि आम जनमानस को यह मालूम हो सके कि कानून तोडऩे वाले सबसे बड़े चोरों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। खंडपीठ ने वन भूमि के सबसे बड़े गोरखधंधे का असली दोषी राजस्व विभाग के संबंधित लोगों को ठहराया।

ज्ञात रहे कि कोर्ट ने 5 बीघा से अधिक भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ  कार्रवाई न करने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए वन विभाग व राजस्व विभाग के बड़े अधिकारियों को हाईकोर्ट के समक्ष तलब किया था। इन अधिकारियों को कोर्ट में तलब करने के पश्चात वन विभाग हरकत में आया और कोर्ट के समक्ष कब्जाधारियों से संबंधित चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए गए। मात्र 13 परिवारों ने पौने 3 हजार बीघा वन भूमि पर अवैध कब्जा कर सेब के बगीचे लगा रखे हैं। 4 वर्षों से हाईकोर्ट द्वारा बड़े कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेशों के बावजूद वन विभाग ने इन कब्जाधारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में लाना जरूरी नहीं समझा। हाईकोर्ट ने जिम्मेदार वन मंडलाधिकारियों को निलंबित तक किए जाने की चेतावनी दी, फिर भी उन अफसरों पर कोई असर नहीं हुआ।

इन्होंने किया है कब्जा

अब तक सामने आए इन आंकड़ों के अनुसार जुब्बल उपमंडल के अंतर्गत आने वाले पहाड़ गांव के मोती राम पुत्र पदम सिंह, बबलू पुत्र मंगत राम और लायक राम पुत्र पदम सिंह के पास संयुक्त रूप से 345 बीघा, इसी गांव के अशोक कुमार पुत्र श्याम लाल, हेमंत ठाकुर पुत्र सोहन सिंह और ज्ञान सिंह पुत्र कर्म सिंह के पास संयुक्त रूप से 318 बीघा, बर्थाटा गांव के चंपा लाल पुत्र चुन्नी लाल, भूपेंद्र सिंह पुत्र प्रताप सिंह, रमेश कुमार पुत्र माधु राम व मोहन लाल पुत्र भागमल के पास संयुक्त रूप से 292 बीघा, बर्थाटा व बधाल गांव के ज्ञान चंद पुत्र लच्छी राम, बलबीर दौलटा पुत्र मेघराम, शीशी राम जेट्टा पुत्र चेतराम, जोगिंद्र किनट्टा पुत्र राम सिंह व सुरेंद्र गुमता पुत्र प्यारे लाल के पास संयुक्त रूप से 279 बीघा, बर्थाटा गांव के कुशाल चंद पुत्र हीरा सिंह व संत राम पुत्र लजीआ राम के पास संयुक्त रूप से 239 बीघा, पहाड़ गांव के गोवर्धन पुत्र भगत राम व सुनील पुत्र शाम नंद के पास संयुक्त रूप से 199 बीघा, इसी गांव के जोगिंद्र सिंह पुत्र मंगत राम, अजय सूद पुत्र मस्त राम, बेली राम पुत्र बुद्धि राम व सुनील कुमार पुत्र श्यामानंद के पास संयुक्त रूप से 199 बीघा, धार गांव के प्रकाश धौलटा पुत्र नाथू राम, बलवंत पुत्र बाला मोहन सिंह पुत्र रेलू राम, नंद व महेंद्र सिंह पुत्र मोहन लाल, जीवन सिंह पुत्र भीका राम के पास संयुक्त रूप से 199 बीघा, इसी गांव के नरेंद्र चौहान पुत्र लच्छी राम, प्रमोद पुत्र तुलसी दास, सोहन सिंह बाली पुत्र ठाकुर राम व प्रताप चौहान पुत्र परसराम के पास संयुक्त रूप से 199 बीघा, पुराने जुब्बल और बेरली गांव के सुरेंद्र ऑक्टा, गंगा राम रेलु व गोविंद पुत्र गीता राम के पास संयुक्त रूप से 146 बीघा, बलाई गांव के राय सिंह घूमटा, विपन लाल, उधम सिंह व संत राम घूमटा व रमेश के पास संयुक्त रूप से 132 बीघा, शिलार गांव के आनंद धानटा व भक्त राम पुत्र मदन सिंह, विजय आनंद पुत्र मोहन लाल व अरुण चंद पुत्र पदम सिंह के पास संयुक्त रूप से 119 बीघा और छाजपुर गांव के राजीव चौहान पुत्र जिया लाल के पास 110 बीघा वन भूमि पर अवैध कब्जों का पता चला है।

अधिकारियों की लगाई क्लास

ये कब्जे जब सामने आए, तब हाईकोर्ट ने वन व राजस्व विभाग के सभी आलाधिकारियों की क्लास लगाई। 4 वर्षों से यह विभाग हाईकोर्ट की आंखों में धूल झोंक रहा था और छोटे-मोटे कब्जाधारियों की लिस्ट सौंप कर समय निकाल रहा था। मामले के लंबित रहते कई लोगों ने मुख्य न्यायाधीश व एमिक्स क्यूरी जिया लाल भारद्वाज को पत्र लिख कर बड़े कब्जाधारियों के नाम बताए। वन विभाग की लिस्ट में उन कब्जाधारियों का उल्लेख न होना दर्शाता है कि वन विभाग किस तरह पिक एंड चूज की नीति पर चल रहा है। मामले पर सुनवाई 25 अप्रैल को होगी।

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