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‘कैंसर जैसी कोई बिमारी नहीं होती, ये सिर्फ आपके व्यवहार व खानपान पर निर्भर करता है’

Dr. Yeshi Dhonden
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शिमला/धर्मशाला। पद्मश्री सम्मानित व तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा के पूर्व चिकित्सक Dr. Yeshi Dhonden का कहना है कि कोई भी बिमारी और कैंसर शुरुआत से बिमारी नहीं होती। ये केवल व्यक्ति के व्यवहार व खानपान पर निर्भर करता है।

तिब्बती चिकित्सा पद्धति में कैंसर की दवा देने व इलाज करने वाले डॉ. येसी धोंडेन का कहना है कि कैंसर जैसी कोई बिमारी नहीं होती। ये सब आपके खाने-पीने, रहन सहन व व्यवहार पर निर्भर करता है। बस आपको इसका पता शुरुआती चरणों में लगाना होता है।

Dr. Yeshi Dhonden तिब्बती चिकित्सा पद्धति के द्वारा करते है मरीजों का इलाज 

बता दें तिब्बती चिकित्सा पद्धति की नींव रखने वाले डॉ. येशी धोंदेन को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। येशी पुरातन तिब्बती चिकित्सा से मरीजों का इलाज करते हैं। 85 वर्षीय डॉ. येशी धोंदेन वर्ष 1960 से लेकर 1980 तक दलाईलामा के निजी चिकित्सक रह चुके हैं और कई विश्वविद्यालयों में तिब्बती चिकित्सा पद्धति पर लेक्चर दे चुके हैं। मौजूदा समय में वो मैक्लोडगंज में अपना निजी क्लीनिक चला रहे हैं।

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90 वर्षीय डॉ. येशी धोंदेन तिब्बती चिकित्सा पद्धति के भारत व तिब्बत में सबसे वरिष्ठ डॉक्टर हैं। येशी धोंदेन ने सिंगर और म्यूजिक कंपोजर आदेश श्रीवास्तव का भी कैंसर का इलाज किया था। येशी धोदेन हिमाचल प्रदेश के दूर दराज के इलाकों में भी अपनी सेवाएं देते रहे हैं।

क्या है तिब्बती चिकित्सा पद्धति

आयुर्वेदिक तिब्बती उपचार एक पारंपरिक और प्राचीन विधा है। जिसमें नब्ज, चेहरे, जीभ, आंखों व सुबह के यूरिन आदि की जांच व मरीज से बातचीत के आधार पर रोग का पता लगाया जाता है और फिर उसी के आधार पर रोगी का उपचार भी किया जाता है।

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