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हिमाचल की इस जगह मौत की सड़कों से गुजरता है जीवन, हर साल हादसों में थम रही एक हजार सांसें

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हिमाचल प्रदेश अपनी मनमोहक पहाड़ियों की बजह से जाना जाता है। यहाँ हर साल दूर दूर से सेलानी आते  हैं। मगर इस  पहाड़ी राज्य  का जीवन हर रोज खतरनाक सड़कों से होकर गुजरता है। दुर्गम इलाकों के तंग रोड हों या फिर नेशनल हाई-वे की चौड़ी सड़कें, यहां कदम-कदम पर मौत खड़ी है। वाहन चलाने में जरा सी चूक एक साथ कई जीवन मौत के मुंह में झोंक देती है। Himachal

इसी साल विभिन्न सड़क हादसों में एक हजार के करीब लोग जान गंवा चुके हैं। दुर्गम इलाकों में तो रोड एक्सीडेंट एक दुखद: हकीकत है ही, नेशनल हाई-वे व अन्य सड़कों पर भी 127 ब्लैक स्पॉट जीवन को मौत में बदल रहे हैं। हिमाचल में इसी साल एक हजार लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई है। पिछले नौ साल में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 9783 रही है। चिंताजनक बात है कि नेशनल हाई-वे व अन्य मार्गों के 127 ब्लैक स्पॉट्स पर एक साल में 452 जीवन मौत के मुंह में चले गए। उनमें से 77 ब्लैक स्पॉट्स तो नेशनल हाई-वे पर हैं। इससे ये स्पष्ट है कि चाहे दुर्गम इलाकों की संकरी सड़कें हों या फिर मैदानी इलाकों की चौड़ी सड़कें, जीवन का खतरा हर तरफ है।

सोमवार को हिमाचल में हुए हादसे इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। मंडी के कांगू में नेशनल हाई-वे पर हादसा हुआ तो कुल्लू-शिमला की सीमा पर दुर्गम इलाके की सड़क ने छह लोगों को मौत का शिकार बना दिया। बरसात में भी हिमाचल में सैंकड़ों सड़क हादसे होते हैं। इसी साल मंडी के कोटरूपी में पहाड़ी धंसने से 47 लोग दब कर मर गए थे। बरसात के सीजन में हिमाचल में 221 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इनमें से अधिकांश मौतें सड़क हादसों में हुई थीं।

Himachal के नेशनल हाई-वे भी नहीं सुरक्षित

हिमाचल के नेशनल हाई-वे भी मौत का दूसरा नाम साबित हो रहे हैं। प्रदेश की अन्य सड़कों समेत नेशनल हाई-वे पर 127 ब्लैक स्पॉट ऐसे पाए गए हैं, जहां बार-बार सड़क हादसे घट रहे हैं। इन 127 डैथ पॉइंट्स में से 77 तो अकेले नेशनल हाईवेज पर हैं। यहां हादसों में 452 अनमोल जीवन काल का ग्रास बन चुके हैं। नेशनल हाई-वे व अन्य सडक़ों के ब्लैक स्पॉट पर अध्ययन को लेकर एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि अधिकतर दुर्घटनाएं तीखे मोड़ पर हो रही हैं।

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हिमाचल सरकार ने वर्ष 2013 से 2015 के बीच नेशनल हाई-वे, स्टेट हाई-वे, एमडीआर (मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड्स) व अन्य सडक़ों पर हुए हादसों पर रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अध्ययन दल ने इन सड़कों पर दुर्घटना के लिहाज से संवेदनशील 127 ब्लैक स्पॉट चिहिन्त किए हैं। यहां तीन साल में 500 मीटर के दायरे में एक ही स्थान विशेष पर 898 एक्सीडेंट हो चुके हैं। इन हादसों में 452 अनमोल जीवन मौत की भेंट चढ़े हैं और 1571 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं।

हिमाचल की तंग सड़कें।

किसी सड़क के 500 मीटर के दायरे में तीन सालों में कम से कम दो एक्सीडेंट हुए हों, जिसमें 10 से अधिक लोगों को मौत हुई हो, उन्हें ब्लैक स्पॉट बोला जाता है। दो साल पहले यानी वर्ष 2015 में जिला किन्नौर में नेशनल हाई-वे-5 पर भयावह सड़क दुर्घटना में 21 लोगों की मौत हो गई थी और 11 लोग गंभीर तौर पर जख्मी हुए थे। पिछले साल जून महीने में दो दिन में तीन सड़क हादसों में 41 लोग काल का शिकार हो गए।

खौफ पैदा करता है Himachal  हर साल सड़क हादसों में मौत का ग्राफ

वर्ष        हादसे           मौतें        घायल
2008        2756        848        4836
2009        3051        1140        5579
2010        3069        1102        5335
2011        3099        1072        5325
2012        2899        1109        5248
2013        2981        1054        5081
2014        3058        1199        5680
2015        3015        1096        5109
2016        3153        1163        5587
2017        2583         999         4434
(वर्ष 2017 का ये आंकड़ा अक्टूबर महीने के अंत तक का है)

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