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लड़कों को जरूर देखनी चाहिए ये 10 फिल्में लेकिन छुप-छुप कर

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हम सभी बचपन के उस दौर से गुजरे हैं, जब हम अपने पेरेंट्स के साथ कोई फिल्म देख रहे होते थे और तभी उसमें कोई बोल्ड सीन आता था तो हमें पानी लेने भेज दिया जाता था। फिर हम समझदार हुए तो ऐसे सीन्स पर खुद ही उठकर टॉयलेट करने जाने लगे। मगर थिएटर में ये सुविधा नहीं होती थी तो पेरेंट्स अचानक से ऐसे सीन के वक्त हमसे बातें करने लगते थे। इसके बाद जब हम बड़े हुए और जिंदगी में गर्लफ्रेंड आ गई।

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गर्लफ्रेंड के साथ भी दिक्कतें खत्म नहीं हुईं। जो फिल्में हमें पसंद होती हैं वो या तो उसे ‘वल्गर’ लगती हैं या ‘घिनौनी’। ऐसे में हमें पेरेंट्स के साथ ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ टाइप फिल्में देखनी पड़ती हैं और गर्लफ्रेंड के साथ ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ टाइप। मगर इन दो टाइप के अलावा भी कई ऐसी फिल्में होती हैं, जो हमें पसंद आती हैं।

आज उसी टाइप की फिल्मों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। तो फिर देर किस बात की है। आइए सबसे पहले बात उन्हीं चुनिंदा फिल्मों की।

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’

अनुराग कश्यप की इस फिल्म में गोलियां और गालियां जी खोलकर बरसाई गई हैं। मगर इस बदले की कहानी को जिस वास्तविक तरीके से फिल्माया गया है उसका कोई जवाब नहीं है। यही कारण है कि आप इसे एक बार नहीं बल्कि बार-बार देखना चाहते हैं।

‘हंटर’

फिल्म ‘हंटर’ का हीरो मंदार सेक्स की तुलना पोटी करने से करता है। उसका मानना है कि सेक्स करना पोटी करने की तरह इंसान की बेसिक नीड होती है। अब आप समझ ही गए होंगे कि ये फिल्म लड़कों को अकेले में क्यों देखनी चाहिए? इस फिल्म का स्ट्रॉन्ग कंटेंट इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है।

‘मातृभूमि’

2003 में बनी इस फिल्म में दिखाया गया है कि, ‘बेटी बचाना कितना जरूरी है।’ इस फिल्म में एक गाँव दिखाया गया है, जिसमें लड़कियों की कमी हो जाने की वजह से 5 भाइयों की शादी एक लड़की से कर दी जाती है। उसका शोषण लगभग पूरा गाँव करता है। इस फिल्म में भी बोल्ड सीन्स और गालियों की भरमार है।

‘रक्त चरित्र’

रक्त चरित्र’ राम गोपाल वर्मा की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की तरह ये फिल्म भी बदले की कहानी है। ये भी दो पार्ट्स में बनाई गई है। इसमें भी गोलियां, गालियां और खून की भरमार है। अगर आपको ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ पसंद आई है तो इस फिल्म को मिस न करें।

‘अनफ्रीडम’

इस फिल्म में होमोसेक्सुअलिटी और आतंकवाद जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। ये अपने बोल्ड कंटेंट के चलते भारत में बैन कर दी गई थी। अगर आप अलग सब्जेक्ट्स पर बनी बोल्ड फिल्में देखने के शौकीन हैं तो ये फिल्म आपके लिए है। बस इसे देखते समय इस बात का खयाल रखें कि इसे अकेले में ही देखें।

‘तितली’

कानू बहल के निर्देशन में बनी इस फिल्म को देखकर आप परेशान भी हो सकते हैं। इसमें खुलकर खून-खराबा दिखाया गया है। फिर भी ज़िंदगी का यह बदसूरत पहलू आपको जरूर देखना चाहिए, मगर अकेले में।

‘लव सेक्स और धोखा’

वैसे तो फिल्म का टाइटल ही काफी है ये बताने के लिए कि इस फिल्म को अकेले में क्यों देखा जाना चाहिए। इस फिल्म में लव, सेक्स और धोखे की तीन अलग-अलग कहानियां दिखाई गई हैं। यकीन मानिये ये कहानियां आपको झकझोर कर रख देंगी।

‘बी.ए. पास’

कई सारे अवार्ड्स अपने नाम करने वाली फिल्म ‘बी.ए. पास’ इरोटिक होने के वावजूद एक स्ट्रांग मैसेज देती है। सेक्स और क्राइम के तड़के वाली इस फिल्म को आपके लिए अकेले में ही देखना बेहतर है।

‘प्यार का पंचनामा’

इस फिल्म में दिखाया गया है कि मर्द रिलेशनशिप में किस तरह लड़कियों के हाथों पिसता है। इस फिल्म को अगर आपने गर्लफ्रेंड के साथ देख लिया तो वो बुरा मान जाएगी और अगर फैमिली के साथ देख लिया तो आपकी सच्चाई सामने आ जाएगी। इसे अकेले में ही देखें।

अगर आपने ये फिल्में नहीं देखी हैं तो इन्हें जरूर देखें और ‘थैंक यू’ की कोई बात नहीं।

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