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हिमालय की गोद में बसी बेताल की गुफा, दीवारों से टपकता है देसी घी

बेताल की गुफा
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हिमालय की गोद में बसी बेताल की गुफा, दीवारों से टपकता है देसी घी : हिमाचल को भारतीय देवी-देवताओं के प्रवित्र स्थान के रूप में जाना जाता है। देवभूमि हिमाचल में कई प्राचीन मंदिर व गुफाएं स्थित है। सभी मंदिरों और गुफाओं की अलग-अलग गाथाएं है। हिंदुस्तान में कई ऐसी कहानियां मिल जाती है, जिन पर एक बार विश्वास करना आसान नहीं होता है, लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था और विश्वास देखकर लगता है कि इन बातों में कहीं ना कहीं कोई सच्चाई हो सकती है। हिमालय की गोद में बसी एक ऐसी गुफा, जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं।

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एक ऐसी ही हिमाचल की पहाड़ियों में बेताल की गुफा स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसकी दीवारों से देसी घी टपकता रहता था।

यहां स्थित है बेताल की गुफा : हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के सुंदरनगर में बेताल की गुफा स्थित है। मान्यता है कि जो भी इस गुफा से बर्तन या देसी घी मांगता था, उसकी वह इच्छा अवश्य पूर्ण होती थी। इतना ही नहीं यहां की दीवारों से घी टपकता रहता था। गुफा की लंबाई लगभग 40 से 50 मी० और ऊंचाई 15 फीट है। अगर कोई सच्चे दिल के साथ यहां कोई मन्नत मांगता है तो उसकी इच्छा अवश्य पूरी होती है, ये लोगों की मान्यता है। यह गुफा दो तरफ से खुलती है, जिसका एक मुख थोड़ा चौड़ा और दूसरा मुख कम व्यास वाला है। बेताल गुफा के भीतर 30-40 ऐसी मूर्तियां हैं, जिन पर ईश्वर के चित्र अंकित हैं। गुफा में हिंदू देवी-देवताओं की पुरानी प्रतिमाएं बनी हुई है। स्थानीय लोग इन प्रतिमाओं की पूजा करते हैं। गुफा के अंदर नहर बहती है, जिसका मधुर संगीत हर समय सुनाई देता है।

पौराणिक कथा : मान्यता के अनुसार पहले समय में जिस भी घर में विवाह होता था, उस घर का मुखिया पूजा की थाली सजाकर गुफा के द्वार पर सिंदुर से निमंत्रण लिखकर आता था। उसके बाद विवाह के लिए जो भी बर्तन चाहिए होते थे उन्हें वे सच्चे दिल से मांगता था, अगले दिन उसके द्वारा मांगे गए बर्तन गुफा के द्वार पर होते थे, जब विवाह समाप्त होता था तो मुखिया उन बर्तनों को गुफा के बाहर रख आता था। वहां से बर्तन अपने-आप ही गायब हो जाते थे। कहा जाता है कि एक बार किसी व्यक्ति ने बर्तन वापिस नहीं किए, जिसके बाद से इस गुफा से बर्तन मिलने बंद हो गए।

बेताल गुफा की दीवारों से टपकते देसी घी का राज़ : लोगों की मान्यता के अनुसार यह भी माना जाता है कि गुफा की दीवारों से देसी घी भी टपकता था, लेकिन बाद में बंद हो गया। एक रात एक ग्वाला अपने पशुओं के साथ गुफा में आया। ग्वाला गुफा से टपक रहे घी को बार-बार अपनी रोटी में लगाता और खा जाता था, जिससे घी जूठा हो गया और उसी दिन से गुफा से घी टपकना बंद हो गया। गुफा से संबंधित रहस्य प्राचीन काल में ही समाप्त हो गए, लेकिन गुफा का महत्व अभी भी बरकरार है।

स्थानीय लोगों की मान्यता : स्थानीय लोगों का मानना है कि बेताल की गुफा मनोकामना पूरी करती है, जिसके चलते यह एक आस्था का स्थल बन चुकी है। लोगों की आस्था आज भी इस गुफा से जुड़ी हुई है। लोगों का कहना है कि जब गांव के पशु बीमार पड़ते हैं या दूध देना बंद कर देते हैं तो गुफा के पास पूजा-पाठ करने से सारी समस्याएं दूर हो जाती है। रहस्यमय गुफाओं के किस्से तो हम कई बार सुनते आए हैं। लेकिन असल बात यह है कि इनमें से बहुत से किस्से बस एक कहानी ही होते हैं, जिन्हें दिलचस्प और रोमांचक जामा पहनाकर परोस दिया जाता है। परिणामस्वरूप लोग उन्हें सच मानकर उन किस्सों और कहानियों पर भरोसा करने

लोगों की आस्था आज भी बरकरार : भले ही अब गुफा के इन चमत्कारों का कोई महत्व नहीं रहा लेकिन यहां के लोगों की आस्था अब भी बरकरार है। गांववाले गुफा में नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। इस आस्था के साथ कि यहां स्थित दैविय शक्ति लोगों की पुकार सुनती है। इसलिए जब भी कोई गांव का सदस्य बीमार पड़ता है तो लोग गुफा के पास जाकर पूजा-पाठ करते हैं।

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