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केजरीवाल ने मांगी थी 100 करोड़ की रिश्वत, सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने दिखा दिये सुबूत

केजरीवाल ने मांगी थी 100 करोड़ की रिश्वत, सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने दिखा दिये सुबूत

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में मनी लां¨ड्रग के आरोपी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अरविंद केजरीवाल ने 100 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी और हमारे पास केजरीवाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। इस बावत ईडी ने केजरीवाल पर रिश्वत लेने के आरोप लगाने वाले गवाहों के बयानों का कोर्ट में हवाला दिया।

हालांकि कोर्ट ने सिर्फ केजरीवाल पर आरोप लगाने वाले बयानों को संज्ञान में लेने और जिन बयानों में उन पर आरोप नहीं लगाए गए हैं उन्हें छोड़ दिये जाने पर ईडी को सवालों में घेरा। कोर्ट ने पूछा कि क्या ईडी ने पीएमएलए की धारा 19 के तहत केजरीवाल को दोषी मानने के कारण और विश्वास के आधार और सामग्री में दोनों तरह के बयानों पर विचार किया था। पूरी सामग्री पर विचार किया गया या नहीं।

केजरीवाल और AAP के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
ईडी की ओर से गुरुवार को कोर्ट में मामले की जांच से जुड़ी फाइलें और केस डायरी भी पेश की गई। ईडी ने कोर्ट को यह भी बताया कि जल्दी ही केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। इस पर काम चल रहा है। ईडी ने गुरुवार को केजरीवाल की याचिका की सुनवाई योग्यता पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है। साथ में यह भी कहा कि जिस तरह कोर्ट मामले की सुनवाई कर रहा है वो मिनी ट्रायल जैसा है। ऐसा नहीं किया जा सकता।

केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती
ईडी ने अंतरिम जमानत पर बाहर आने के बाद केजरीवाल द्वारा दोबारा जेल न जाने के लिए आम आदमी पार्टी को वोट देने की अपील करने के बयान का मसला उठाया लेकिन कोर्ट ने कहा वह इसमें नहीं जाएगा। मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई होगी। अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में पीएमएलए में की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी को वैध ठहराया था जिसके खिलाफ केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका की है। ईडी ने आबकारी नीति घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था।

केजरीवाल ने 100 करोड़ रुपये रिश्वत मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका के लंबित रहने के दौरान ही चुनावों के देखते हुए 10 मई को केजरीवाल को एक जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी दी थी। कोर्ट ने केजरीवाल को 2 जून को फिर समर्पण करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की पीठ कर रही है। गुरुवार को ईडी की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि ईडी के पास केजरीवाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। केजरीवाल ने 100 करोड़ रुपये रिश्वत मांगी थी और इसके परिणाम स्वरूप पैसा आया और आम आदमी पार्टी ने गोवा चुनाव में उसका इस्तेमाल किया।

चनप्रीत सिंह के पास पैसा आया था
इस मामले में आम आदमी पार्टी को अभियुक्त बनाया जाएगा। ईडी के पास प्रत्यक्ष सबूत हैं कि केजरीवाल गोवा में सात सितारा होटल में रुके थे जिसके भुगतान का कुछ हिस्सा दिल्ली के जनरल एडमिनिस्ट्रेटिव विभाग ने किया और कुछ हिस्से का भुगतान चनप्रीत सिंह ने किया जिसके पास पैसा आया था। एसवी राजू ने कहा कि ये लोग जांच में सहयोग नहीं करते।

केजरीवाल के खिलाफ अपराध का मामला
उन्होंने कोर्ट को ध्यान राघव मंगूटा के बयान की ओर दिलाया जिसमें अरविंद केजरीवाल के 100 करोड़ रुपये रिश्वत मांगे जाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह बयान जांच अधिकारी के लिए पीएमएलए की धारा 19 में गिरफ्तारी के लिए रीजन टू बिलीव है। प्रथम दृष्टि में केजरीवाल के खिलाफ धारा 4 के अपराध का मामला बनता है। पर्याप्त सामग्री है जिसके आधार पर जांच अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्टेज पर गवाहों के बयानों की सत्यता नहीं जांची जा सकती। कोर्ट केस के गुण दोष पर नहीं जा सकता।

केजरीवाल की ओर से आरोप लगाया गया
जब एएसजी राजू धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए गए राघव मंगूटा के बयानों का हवाला दे रहे थे तभी पीठ ने उनसे गवाहों के बयानों को स्वीकारने और संज्ञान में लेने को लेकर कई सवाल किये। पीठ ने कहा कि केजरीवाल की ओर से आरोप लगाया गया है कि ईडी ने गवाहों के उन पूर्व बयानों पर भरोसा नहीं किया है और उसे रिकार्ड पर नहीं लिया है जिसमें केजरीवाल पर आरोप नहीं लगाए गए हैं सिर्फ उन बयानों पर जांच एजेंसी ने विश्वास किया है जिनमें उन पर आरोप लगाया गया है, आप बताइये कि क्या फाइल में आपने उन बयानों को भी शामिल किया है या उन पर भरोसा न करने का कोई कारण दर्ज किया है।

अगर कोर्ट गिरफ्तारी रद करती है तो
जब एएसजी ने नहीं में जवाब दिया तो पीठ ने कहा कि आपको उसे फाइल में तो दर्ज करना चाहिए था, क्या आप बहस के दौरान अपने केस को इम्प्रूव कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि भले ही आपने उन बयानों पर विश्वास नहीं किया लेकिन आपको दर्ज तो करना चाहिए था कि आपने उस पर विश्वास नहीं किया है। जस्टिस खन्ना ने यह भी कहा कि अगर कोर्ट गिरफ्तारी रद करती है तो वह कह सकती है कि सुसंगत सामग्री पर विचार नहीं किया गया था।

रिश्वत की राशि तो अब घट कर 45 करोड़ रह गई
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मौजूदा मामले के बारे में ऐसा नहीं कह रहे हैं। पीठ ने यह भी कहा कि सरकारी गवाह को भिन्न मानकों पर जांचा जाता है। इस पर एएसजी राजू ने कहा कि उनके पास बयान के समर्थन के साक्ष्य भी मौजूद हैं। 100 करोड़ रिश्वत मांग गई थी। पीठ ने टिप्पणी थी कि रिश्वत की राशि तो अब घट कर 45 करोड़ रह गई है क्योंकि आपके पास मनी ट्रेल तो इतने का ही है। एसवी राजू ने कहा नहीं मनी ट्रेल 45 करोड़ का है लेकिन रिश्वत 100 करोड़ ली गई थी। राजू ने यह भी कहा कि मामले में जब्ती होना जरूरी नहीं है।

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