हर व्यक्ति की हथेली में उंगलियों के नीचे का हिस्सा थोड़ा ऊंचा होता है। हस्तरेखा शास्त्र में इन्हें पर्वत कहा जाता है। उंगलियों के अनुसार इन पर्वतों के नाम ग्रहों के आधार पर मध्यमा अंगुली के ठीक नीचे वाले पर्वत को शनि पर्वत कहते हैं। आज हम आपको इस पर्वत से जुड़ी शुभ और अशुभ बातें बताने जा रहे हैं।

शनि पर्वत का महत्व-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है, लेकिन हाथ में शनि पर्वत का न होना कुछ राशियों के लिए अशुभ संकेत होता है। शनि पर्वत के बिना व्यक्ति के जीवन में कोई भी उल्लेखनीय कार्य नहीं होता है। यदि शनि पर्वत सामान्य स्थिति में है तो यह व्यक्ति के भाग्य का अच्छी तरह से समर्थन करता है। भाग्य रेखा इस पर्वत तक पहुंचती है।

शनि जैसे एकांत से प्रभावित लोग अपने आप में खोए हुए और भाग्य और परिस्थितियों का अनुसरण करते हैं। शंका और अविश्वास इनके स्वभाव में होते हैं। उनका मन गुप्त विद्याओं में बहुत रुचि रखता है। शोरगुल और सामान्य जीवन से दूर वह अपना समय किताबों और प्रयोगशालाओं में बिताना पसंद करते हैं। वे जादूगर, इंजीनियर, शोधकर्ता, ज्योतिषी आदि बन सकते हैं।

यदि शनि पर्वत ऊंचा हो

पंडित जोशी के अनुसार यदि हथेली में शनि उच्च का हो तो यह ऊपर बताए गए लक्षण और भी खतरनाक हो जाते हैं। ऐसे लोग खुद के साथ-साथ दूसरों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। वे आत्महत्या भी कर सकते हैं। मानसिक जगत का प्रभुत्व उन्हें अध्ययनशील बनाता है और व्यावहारिक जगत का विकास उन्हें आर्थिक रूप से सफल बनाता है। नीच स्थान का आधिपत्य हो तो जातक अपराधी प्रवृत्ति का होता है।

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