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बिहार के इस जिले के 12 शिक्षकों पर गिरी निलंबन की गाज, जानें क्या है पूरा मामला..

बक्सर जिले के विभिन्न स्कूलों में कार्यरत रहे सरकारी 12 शिक्षकों पर 5 साल के बाद निलंबन की गाज गिरी है। इनमें से 5 शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं, जिनमें से एक की मौत हो गई है। विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से यह मामला पूरे पांच सालों से दबा हुआ था। जिला लोक शिकायत में परिवाद दाखिल होने के बाद कमिश्नर के निर्देश पर डीएम द्वारा डीडीसी की अध्यक्षता में बनाई गई तीन सदस्यीय टीम की जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद डीएम के निर्देश पर सभी कार्यरत व सेवानिवृत्त शिक्षकों के खिलाफ निलंबन सहित अन्य कार्रवाई प्रारंभ की गई है। इससे डीईओ कार्यालय के कर्मियों की सांठगांठ से फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है।

अप्रैल 2016 में नगर के स्कूलों का हुआ था औचक निरीक्षण

डीएम के निर्देश पर 20 अप्रैल 2016 को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की गठित टीम द्वारा नगर परिषद के अंतर्गत सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया था। इसके बाद 12 शिक्षक-शिक्षिकाओं को डीईओ द्वारा निलंबित कर दिया गया था। लेकिन कार्यालय के निर्गत पंजी लिपिक वीरेंद्र प्रसाद सिंह के द्वारा निलंबन पत्र निर्गत करने के बावजूद तत्कालीन संचिका प्रभारी उदय शंकर मिश्र द्वारा निलंबन पत्र का तामिला संबंधित शिक्षक व शिक्षकों को नहीं कराया गया।

इतना ही नहीं उक्त पत्र की प्रति बीईओ, कोषागार पदाधिकारी तथा निकासी सह व्ययन अधिकारी को भी उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं उस पत्र की प्रति तत्कालीन विशेष पदाधिकारी को गोपनीय शाखा को भी नहीं दी गई। इसके चलते संबंधित शिक्षकों का वास्तविक निलंबन नहीं हो सका। जानकार बताते हैं कि आपस में सांठगांठ कर पूरी संचिका को ही कार्यालय से गायब कर दिया गया था।

लोक शिकायत में परिवाद के बाद पूरे मामले का हुआ खुलासा

इस मामले में सिमरी प्रखंड के कठार गांव निवासी अजय कुमार सिंह द्वारा जिला लोक निवारण शिकायत पदाधिकारी के यहां एक परिवाद दायर किया गया। तय समय सीमा के बाद भी जब मामले का निष्पादन नहीं हुआ तो उनके द्वारा आयुक्त पटना प्रमंडल सह प्रथम अपीलीय प्राधिकार के यहां अपील की गई।

प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश के बाद डीएम द्वारा इस पूरे मामले की जांच के लिए डीडीसी की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। इसमें डीईओ व बीईओ बक्सर सदस्य के रूप में शामिल थे। टीम ने जब पूरे मामले की गहन रूप से जांच की तो पूरे मामले का खुलासा हो सका।

इन शिक्षकों पर गिरी निलंबन की गाज

दुलारी देवी तत्कालीन प्रधान शिक्षिका अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय मठिया, प्रभा कुमारी तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक गौरीशंकर मध्य विद्यालय, ललिता जिउत तत्कालीन प्रधानाध्यापक आदर्श मध्य विद्यालय नया बाजार तथा धीरेंद्र प्रताप सिंह तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक बाल कुसुम मध्य विद्यालय बक्सर शामिल है। ये सभी चारों शिक्षक व शिक्षिकाएं सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।

इसके अलावा जिन सात अन्य शिक्षकों को निलंबित किया गया है, वह अभी कार्यरत हैं। इनमें देवंती कुमारी सहायक शिक्षक विश्वामित्र प्राथमिक विद्यालय चरित्रवन, कुमारी सावित्री सहायक शिक्षक प्राथमिक विद्यालय अमला टोली, उमेश ठाकुर सहायक शिक्षक नरेंद्र देव मध्य विद्यालय, प्रभावती देवी निलंबित सहायक शिक्षक नेहरू स्मारक मध्य विद्यालय सिद्धनाथ घाट संप्रति अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय मठिया, पार्वती कुमारी सहायक शिक्षक कन्या प्राथमिक विद्यालय बंगाली टोला, किरण कुमार बाल कुसुम मध्य विद्यालय संप्रति प्राथमिक विद्यालय अमला टोली तथा सोना कुमारी जिउत सहायक शिक्षक जवाहर मध्य विद्यालय, बक्सर शामिल हैं।

सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों के खिलाफ डीईओ द्वारा विभिन्न पत्रों के द्वारा बिहार पेंशन नियमावली नियम 46 बी के तहत विभागीय कार्रवाई संचालित की गई है। वही कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही के अधीन भी रखा गया है।

दो कर्मियों की संलिप्तता हुई उजागर

इस पूरे मामले में डीईओ कार्यालय के दो कर्मी की संलिप्तता उजागर हुई है। इसके बाद उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गाज गिरी है। इनमें से एक स्थानांतरण होने के बाद दूसरे जिला से सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। कार्यालय लिपिक वीरेंद्र प्रसाद सिंह के विरुद्ध डीईओ द्वारा प्रपत्र क गठित कर आरडीडीई के यहां रिपोर्ट भेजा गया था।

इसके बाद क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक द्वारा उन्हें निलंबित करते हुए विभागीय कारवाई के अधीन किया गया है। वहीं, तत्कालीन संचिका प्रभारी उदय शंकर मिश्र का स्थानांतरण डीईओ कार्यालय पटना हो गया था, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस मामले में उन्हें भी दोषी मानते हुए डीईओ द्वारा बिहार पेंशन नियमावली नियम 43 बी के तहत विभागीय कार्रवाई संचालित करने के लिए डीईओ पटना को प्रतिवेदित किया गया है। 

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