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बिहार में गाड़ी खरीदने का नियम ‘बदला’, आम आदमी को झटका, सरकारी अफसर को छूट ;

 

PATNA- बिना बीमा शोरूम से निजी वाहन नहीं आ सकते, सरकारी काे छूट!पैसे बचाने के लिए परिवहन विभाग ने सरकारी बसाें-वाहनाें को इन्श्योरेंस से दे रखी है छूट : राज्य में आम नागरिकों के लिए परिवहन कानून अलग है और सरकारी वाहनों के लिए अलग। केंद्रीय परिवहन कानून के तहत देश या बिहार में काेई भी वाहन शोरूम सड़क पर सभी संबंधित टैक्स जमा कर परिवहन विभाग से रजिस्टर्ड होता है। रजिस्ट्रेशन के लिए वाहन का बीमा होना भी अनिवार्य है। सभी निजी या कॉमर्शियल वाहनों के लिए यह नियम सख्ती से अमल में भी है।

लेकिन, बिहार में पथ परिवहन निगम की बसों और सरकार के सभी वाहनों काे इससे छूट है। वैसे, जब निजी वाहन सरकारी काम या विभागों की सेवा में लिए जाते हैं, तब सभी टैक्स के साथ बीमा कागजात जमा करना अनिवार्य है। सरकारी वाहनों से दुर्घटना के शिकार लोगों के परिजन भरपाई के लिए चक्कर लगा थक-हार कर न्याय की आस ही छोड़ देते हैं। कई ऐसे पीड़ित परिवार हैं, जो इस अंधा कानून के कारण ट्रिब्यूनल और विभाग का चक्कर लगा कर थक चुके। कई लाेग क्लेम ही नहीं करते। सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले में दुर्घटना में माैत के 20 क्लेम केस वर्षों से लंबित हैं। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन विभाग से क्लेम के पेंडिंग केस की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

सभी सरकारी वाहनों का 2010 तक बीमा होता था। सरकार के तत्कालीन सचिव (व्यय) मिहिर कुमार सिंह ने 16 जुलाई 2012 को सभी विभागों के प्रधान सचिव, विभागाध्यक्ष, कमिश्नर और डीएम को लिखे पत्र में सरकार की नीति की जानकारी दी। कहा- सरकारी संपत्ति का बीमा नहीं कराया जाए। सरकारी या विभागीय वाहनों के संबंध में वित्त विभाग के नियम 442 के तहत बीमा छूट की बात कही। परिवहन आयुक्त ने पथ परिवहन निगम के प्रशासक को मोटर वाहन अधिनियम के तहत निगम की बसों को थर्ड पार्टी इंश्योरेंस से भी छूट की जानकारी दी। लेकिन, निगम की बस के दुर्घटनाग्रस्त होने पर अपने कोष से देनदारी भुगतान की भी शर्त लगाई गई।

केंद्र के निर्देश के अनुरूप विभाग से मार्गदर्शन लेंगे : मैं अभी नया आया हूं। मुझे इस संबंध में विशेष जानकारी नहीं है। केंद्र सरकार ने थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराने का नियम जारी किया है, तो इसकी पहल के लिए परिवहन विभाग से मार्गदर्शन मांगा जाएगा। – सनी सिंह, प्रशासक, पथ परिवहन निगम

सरकार खुद गारंटी लेती है, इसलिए बीमा की जरूरत नहीं : डीटीअाे
फर्स्ट पार्टी इंश्योरेंस में गाड़ी की कीमत और दुर्घटना में मृतक काे मुआवजे की गारंटी होती है। जबकि, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में सिर्फ दुर्घटना से मौत होने पर मुआवजा मिलता है। रकम इंश्योरेंस कंपनी देती है। सरकारी वाहनों का इसलिए इंश्योरेंस नहीं किया जाता, क्योंकि इसकी गारंटी सरकार लेती है। पीड़ित थर्ड पार्टी को ट्रिब्यूनल के निर्देश पर मुआवजा भुगतान का नियम है। -जयप्रकाश नारायण, डीटीओ, मुजफ्फरपुर

नए नियम में कम से कम थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के निर्देश के तहत किसी भी सरकारी या निजी छोटे-बड़े वाहनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना अनिवार्य है। कोई भी वाहन बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं चलाया जा सकता। लेकिन, बिहार में सरकारी बसों-वाहनों काे छूट है। इन्हे भी जरूर पढ़ें

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