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बिहार में दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक पारित, जानिये नए कानून से क्या होगा फायदा …!

 

बिहार में जमीन की खरीद फरोख्त में होने वाले फर्जीवाड़े और जालसाजी को रोकने के लिए नीतीश कुमार सरकार ने बड़ा कदम उठा दिया है। विधानसभा में बुधवार को बिहार भूमि दाखिल खारिज (संशोधन) विधेयक 2021 पारित कर दिया गया। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने कहा कि नए प्रावधान से अब नक्शे का भी दाखिल खारिज होगा। डिजिटल रूप से भूखंड की वास्तविक स्थिति क्रेता को पता चल सकेगी।

यह होगा फायदा

अब दाखिल खारिज के समय दस्तावेज के साथ जमीन के उस हिस्से का नक्शा भी जुड़ जाएगा, जिसकी खरीद बिक्री हुई है। जमीन के बदले स्वरूप की चौहद्दी भी दर्ज होगी। दाखिल खारिज के मौजूदा नियम में जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं मिलती है। इससे भूमि विवाद का कारण बन जाती है। विधेयक के पारित होने के बाद बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं अधिनियम 2011 एवं नियमावली 2012 में संशोधन हो गया है।

बिहार में जमीन की खरीद फरोख्त में होने वाले फर्जीवाड़े और जालसाजी को रोकने के लिए नीतीश कुमार सरकार ने बड़ा कदम उठा दिया है। विधानसभा में बुधवार को बिहार भूमि दाखिल खारिज (संशोधन) विधेयक 2021 पारित कर दिया गया। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने कहा कि नए प्रावधान से अब नक्शे का भी दाखिल खारिज होगा। डिजिटल रूप से भूखंड की वास्तविक स्थिति क्रेता को पता चल सकेगी।

यह होगा फायदा

अब दाखिल खारिज के समय दस्तावेज के साथ जमीन के उस हिस्से का नक्शा भी जुड़ जाएगा, जिसकी खरीद बिक्री हुई है। जमीन के बदले स्वरूप की चौहद्दी भी दर्ज होगी। दाखिल खारिज के मौजूदा नियम में जमीन की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं मिलती है। इससे भूमि विवाद का कारण बन जाती है। विधेयक के पारित होने के बाद बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं अधिनियम 2011 एवं नियमावली 2012 में संशोधन हो गया है।

डिजिटल फार्म में दर्ज होगा नक्शा

इस कार्ययोजना के तहत सभी अंचल कार्यालय में सर्वे राजस्व नक्शा को साफ्टवेयर के जरिए डिजिटल फार्म में तैयार किया जाएगा। दाखिल खारिज की याचिका के साथ जमीन के हिस्से का नक्शा शामिल किया जाएगा। इस नक्शा को जमीन की रजिस्ट्री के समय भी डीड में लगाना होगा। अंचल कार्यालय में दाखिल खारिज के समय डीड के साथ भूखंड का नक्शा भी जमा करना होगा। इस व्यवस्था से रजिस्ट्री के समय ही साफ हो जाएगा कि किसी जमीन के किस हिस्से की बिक्री हुई है। इस तरह के सभी याचिका की जांच राजस्व कर्मचारी करेंगे। उनके संतुष्ट होने के बाद ही दाखिल खारिज की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

सिविल इंजीनियरों का पैनल बनेगा

भूखंड का नक्शा बनाने के लिए जिला स्तर पर सिविल इंजीनियरों का पैनल बनेगा। पैनल तैयार करने की प्रक्रिया और इसमें शामिल इंजीनियरों की संख्या राज्य सरकार समय-समय पर तय करेगी। पैनल में शामिल इंजीनियर या एजेंसी की सेवा शुल्क का निर्धारण सरकार करेगी। शुल्क की राशि रैयतों से वसूली जाएगी। इंजीनियरों अथवा एजेंसियों को जमीन की मापी के लिए इटीएस (इलेक्ट्रिानिक टोटल स्टेशन) के अलावा लैपटाप रखना होगा। ये उपकरण विभाग की ओर से अनुमोदित होंगे। 

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