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बिहार लौटे प्रवासी: छठ के बहाने बंट रही अपनों से मिलन की खुशियां, गांवों में उत्सवी माहौल


पूर्णिया। आस्था का महापर्व छठ के बहाने ग्रामीण क्षेत्रों में अपनों से मिलन की खुशियां भी बंटती है। असीम आस्था के चलते प्रवासी मजदूरों की घर वापसी से इस पर्व का रंग और गहरा हो जाता है। रोटी के लिए परिवार से दूर रहने की विवशता पर छठ अल्प विराम लगा संबंधित परिवारों की खुशियों को दुगुना कर देता है। ऐसे लोगों के घर वापसी से गांवों में उत्सवी माहौल बन जाता है।

सोमवार को भी जारी रहा लोगों के घर लौटने का सिलसिला

बता दें कि महापर्व छठ से क्षेत्र के लोगों की असीम आस्था जुड़ी हुई है। आस्था के कारण प्रवासी मजदूर भी हर हाल में इस महापर्व में घर आते हैं। दीपावली के पूर्व से ही यह रफ्तार शुरु हो जाती है। दीपावली बाद तो यह रफ्तार पूरी तरह तेज हो जाती है। सोमवार को भी ऐसे लोगों के घर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। सीमांचल एक्सप्रेस सहित कई अन्य साधनों से काफी संख्या में सोमवार को ऐसे लोग अपने-अपने घर पहुंचे। मोटे अनुमान के मुताबिक अब जिले के पांच लाख से अधिक लोग रोजी-रोटी की तलाश में महानगरों सहित कुछ अन्य प्रांतों में रहते हैं। रोजगार की कमी के चलते इनमें अधिकांश लोग साल में एक बार छठ तो दूसरी बार होली में घर लौटते हैं। ऐसे में उनके परिवार के लोगों को भी इन पर्वों का बेसब्री से इंतजार रहता है और उनके घर लौटने पर परिवार की खुशियां दुगुनी हो जाती है।

क्या कहते हैं प्रवासी मजदूरबंगलौर में राज मिस्त्री का काम करने वाले पूर्णिया पूर्व के संजय चौहान ने कहा कि रोटी के लिए बाहर रहना उनकी विवशता है। ऐसे में छठ व होली का बेसब्री से वे लोग भी इंतजार करते हैं। छठ में घर आना तय होता है। होली में यदा-कदा नहीं भी आ पाते हैं। उनके परिवार में गत दो पुश्त से छठ पर्व मनाया जा रहा है। अभी उनकी पत्नी पानी में खड़ी होती है। ऐसे में छठ में घर आना लाजिमी है। घर आने पर निश्चित रुप से बच्चों सहित परिवार के अन्य लोगों से मिलने का मौका मिलता है और हर पल यादगार हो जाता है। घर बच्चे सहित अन्य सदस्य भी उनके आने से काफी खुश होते हैं। केनगर के राकेश मुनि ने कहा कि वे गत दस साल से दिल्ली में काम कर रहे हैं। हर साल छठ में घर आना तय है। उनकी मां छठ करती है और वे खुद सूप आदि घाट तक ले जाते हैं। उनके व उनके बच्चे के लिए ही मां छठ करती है, ऐसे में छठ में कहीं नहीं रुक सकते हैं। इस बहाने घर में चंद दिन बीताने का भी मौका मिलता है। इन्हे भी जरूर पढ़ें

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