श्रीलंका की जीत के बावजूद टीम इंडिया को इस मुकाबले से 3 बड़ी और सकारात्मक चीजें मिली है। टीम को मावी के रूप में एक हरफनमौला मिला है, वहीं मुश्किल समय में टीम का इम्तिहान भी हुआ है।

गुरुवार रात श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टी20 में भले ही टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन हार्दिक पांड्या एंड कंपनी इस हार के बाद भी गम में नहीं होगी। दरअसल, श्रीलंका की जीत के बावजूद भारत को इस मुकाबले से 3 बड़ी और सकारात्मक चीजें मिली है। श्रीलंका ने इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 207 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था, इस स्कोर का पीछा करते हुए टीम इंडिया निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 190 ही रन बना पाई। भारत को 16 रनों से पुणे टी20 में हार का सामना करना पड़ा। तीन मैच की यह सीरीज अब 1-1 की बराबरी पर है और सीरीज का आखिरी और निर्णायक मुकाबला शनिवार 7 जनवरी को राजकोट में खेला जाना है।


अपने डेब्यू मुकाबले में 4 विकेट हॉल लेने वाले 24 साल के मावी ने दूसरे टी20 में अपने बल्ले से भी कमाल दिखाया। जब टीम इंडिया मुश्किल में फंसी हुई थी तब दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने आकर 15 गेंदों पर 2 चौकों और इतने ही गगनचुंबी छक्कों की मदद से 26 रनों की पारी खेली। इन दोनों मैचों में अगर शिवम मावी के प्रदर्शन पर गौर किया जाए तो उन्हें हार्दिक पांड्या के बैकअप के रूप में तैयार किया जा सकता है। टीम इंडिया पिछले कुछ समय से पांड्या का बैकअप तलाशने में लगी है। हार्दिक जैसा ऑलराउंडर जब भी टीम से बाहर होता है तो भारतीय टीम का संतुलन बिगड़ जाता है, ऐसे में मावी को उनके बैकअप के तौर पर तैयार किया जा सकता है।

सूर्यकुमार यादव और अक्षर पटेल की तूफानी बल्लेबाजी

टी20 फॉर्मेट में टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों की भूमिका काफी अहम होती है। अकसर देखा गया है कि जब ऊपरी क्रम के बल्लेबाज निराश करते हैं तो अन्य बल्लेबाज भी दबाव नहीं झेल पाते और टीम लो स्कोर पर ही सिमट जाती है। मगर पुणे टी20 में इसके विपरीत हमें कुछ देखने को मिला। 57 रनों पर आधी भारतीय टीम पवेलियन लौटने के बाद सूर्यकुमार यादव और अक्षर पटेल ने 6ठें विकेट के लिए 91 रनों की तूफानी साझेदारी की। सूर्या ने 51 तो अक्षर ने 65 रन बनाए। इन दोनों खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस से यह साफ होता है कि टीम इंडिया अब किसी भी इम्तिहान के लिए तैयार है।

मुश्किल समय में हुआ टीम का टेस्ट

सीरीज के पहले मुकाबले से कप्तान हार्दिक पांड्या कहते हुए नजर आ रहे हैं कि वह हर समय टीम को मुश्किल स्थिति में डालना चाहते हैं। दरअसल, टीम द्वीपक्षीय सीरीज में तो पिछले कुछ समय से लाजवाब प्रदर्शन करती आ रही है, मगर जब बात बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में चुनौतियों की आती हैं तो वहां टीम इंडिया फेल हो जाती है। भविष्य को देखते हुए हार्दिक पांड्या अभी से ही टीम को हर मुश्किल स्थिति में खिलाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले टी20 में वानखेड़े जैसे मैदान पर जहां लक्ष्य का पीछा करना आसान माना जाता है, वहां टीम ने 162 रन डिफेंड किए। वहीं पुणे में टॉस जीतने के बावजूद हार्दिक पांड्या ने कप्तानी चुनी। हार्दिक हर मौके पर अपनी टीम को टेस्ट करना चाहते हैं और अभी तक खिलाड़ी कुछ हद तक सफल रहे हैं।

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