Supreme Court ने किया साफ, पत्नी की ऐसी संपत्ति पर पति का नहीं कोई हक

Supreme Court ने किया साफ, पत्नी की ऐसी संपत्ति पर पति का नहीं कोई हक

Himachali Khabar : (supreme court news)। संपत्तियां कई तरह की होती हैं और हर तरह की संपत्ति को लेकर उस पर अधिकारों को भी कानून में स्पष्ट रूप से बताया गया है। इन प्रावधानों से ही पता चलता है किस प्रोपर्टी (property rights) पर किसका कितना अधिकार है। पत्नी की विशेष संपत्ति को लेकर भी कानून में स्पष्ट रूप से अधिकारों को बताया गया है।

कानून में कहा गया है कि पत्नी की इस संपत्ति पर पति का कोई हक नहीं होता और इस पर वह दावा भी नहीं जता सकता। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले (Husband Wife Property Dispute) में फैसला सुनाकर इस बात का प्रमाण दिया है। इस फैसले की हर तरफ चर्चा हो रही है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बात-

केरल के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने स्त्रीधन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। यह फैसला खूब चर्चाओं में रहा है। इस मामले में  पत्नी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि उसके पति (husband wife joint property) ने शादी की पहली रात ही उसे उपहार में मिले गहने अपनी मां को दे दिए थे। इसके बाद उसे गहनों की सुरक्षा करने की बात कही गई। कुछ दिन बाद मां-बेटे ने वे गहने कर्ज चुकाने के लिए यूज कर लिए।

इसके बाद महिला ने कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने सभी आरोप सही पाने के बाद पति को अपनी पत्नी का स्त्रीधन (stridhan kya hai) लौटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पति मुश्किल के समय में अपनी पत्नी की सहमति से स्रीधन यूज तो कर सकता है पर यह उधार के रूप में होगा यानी उसे वह चुकाना ही होगा।  स्त्रीधन पर पति-पत्नी का नहीं, बल्कि अकेली पत्नी का ही अधिकार (women’s property rights) होता है।

स्त्रीधन में क्या है शामिल-

स्त्रीधन में महिला को शादी से पहले या शादी के बाद उपहार (marriage gift) के तौर पर मिलने वाली सभी चीजें स्त्रीधन (stridhan ke adhikar) कहलाती हैं। इनमें साड़ी, गहने और अन्य सामान आते हैं। यहां तक के उपहार में दी गई प्रॉपर्टी तक स्त्रीधन कहलाती है। ये चीजें बेशक महिला को ससुराल से मिली हों या कहीं और से। कानूनी तौर पर भी ये सभी चीजें स्त्रीधन में आती हैं।

दहेज और स्त्रीधन में अंतर-

दहेज और स्रीधन (dowry and stridhan) में कई लोगों को असली अंतर ही नहीं पता। कई लोग इसे समान ही समझते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। दहेज लेना और देना गैरकानूनी है लेकिन स्त्रीधन के लिए ऐसा प्रावधान नहीं है। इसे लिया जा सकता है और दिया भी । स्त्रीधन तो एक उपहार कहलाता है जो स्नेह के कारण देते हैं। इस पर शादी से पहले व बाद में महिला का ही पूरी तरह से अधिकार (woman property rights) होता है। 

कानून में स्‍त्रीधन को लेकर प्रावधान – 

– कानून में स्त्रीधन को लेकर महिलाओं के हक भी बताए गए हैं। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 (Hindu Succession Act, 1956) और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955) में इस बारे में प्रावधान किया गया है। इसके तहत महिला को स्त्रीधन को अपनी मर्जी अनुसार इस्तेमाल करने का हक है। वह उसे किसी को आगे उपहार में भी दे सकती है, इसके अलावा बेचने का अधिकार भी रखती है। ससुराल पक्ष और पति का इस पर कोई अधिकार नहीं होता।

– विवाह के बाद महिला ने स्रीधन को किसी के पास रख भी देती है तो भी अधिकार (mahilao ke adhikar) उसी का रहेगा, जिसके पास रखा है वह तो केवल स्त्रीधन का रक्षक कहा जा सकता है। अधिकतर महिलाएं सास के पास स्त्रीधन (stridhan) को रख देती हैं, लेकिन सास का इस पर कोई अधिकार नहीं होता। अगर पति इस स्त्रीधन को कर्ज आदि उतारने के लिए उपयोग करता है तो बाद में लौटाने के प्रति भी जिम्मेदार है। उसे पत्नी को यह लौटाना होगा। 

– कई बार देखने में आता है कि ससुराल वाले महिला के स्त्रीधन (stridhan par adhikar) को रख लेते हैं और बाद में देने से मना कर देते हैं। ऐसी स्थिति में महिला केस कर सकती है। महिला की अपने पति से अलग होने की स्थिति बन जाती है तो  वह ससुराल छोड़ते समय पूरे का पूरा स्त्रीधन वापस ले सकती है। इस पर जबरन कोई अधिकार नहीं जता सकता।

महिला के निधन के बाद स्त्रीधन किसका?

ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि अगर महिला की मौत हो जाती है तो स्त्रीधन किसका होता है। स्त्रीधन पर केवल महिला का ही पूरे जीवन तक कानूनी अधिकार होता है। उसके निधन के बाद उसके उत्तराधिकारियों का उस पर अधिकार होगा। अगर महिला ने वसीयत (property will) लिखी है तो फिर स्त्रीधन का बंटवारा वसीयत पर निर्भर करता है।

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