किडनैपर होने के शक में 16 लोगों को मौत के घाट उतारा, कंधे और सिर पर टायर रखकर…….

Mob Killed 16 People: अफ्रीकी देश नाइजीरिया से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। भीड़ ने किडनैपर होने के शक में 16 लोगों की हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ितों में से कुछ के कंधों और सिर पर टायर रखकर आग लगा दी गई जिसके कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में मारे गए लोग देश के उत्तरी हिस्से से थे। बताया जा रहा है कि मृतकों की गाड़ी मे तलाशी के दौरान हथियार मिले थे जिसके कारण भीड़ ने उनपर हमला बोल दिया। 16 लोगों को मौत के घाट उतारासोशल मीडिया […]
किडनैपर होने के शक में 16 लोगों को मौत के घाट उतारा, कंधे और सिर पर टायर रखकर…….किडनैपर होने के शक में 16 लोगों को मौत के घाट उतारा, कंधे और सिर पर टायर रखकर…….

Mob Killed 16 People: अफ्रीकी देश नाइजीरिया से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। भीड़ ने किडनैपर होने के शक में 16 लोगों की हत्या कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ितों में से कुछ के कंधों और सिर पर टायर रखकर आग लगा दी गई जिसके कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में मारे गए लोग देश के उत्तरी हिस्से से थे। बताया जा रहा है कि मृतकों की गाड़ी मे तलाशी के दौरान हथियार मिले थे जिसके कारण भीड़ ने उनपर हमला बोल दिया।

16 लोगों को मौत के घाट उतारा
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में पीड़ितों के साथ बेहद क्रूरता से बर्ताव करते हुए और फिर उन्हें बुरे तरीके से पीटते और टायरों की आग में झोंकते हुए नजर आ रहे हैं। यह घटना नाइजीरिया में पिछले एक दशक से बढ़ती भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा का हिस्सा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देश के दक्षिणी हिस्से में ऐसे हमले अक्सर चोरी और जादू-टोने के आरोपों पर आधारित होते हैं जबकि उत्तर में कथित ईशनिंदा के मामलों में लिंचिंग होती है।

सोशल मीडिया पर दिखा आक्रोश
हमले के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। नाइजीरिया के उत्तरी हिस्से के राजनेताओं ने इन हत्याओं की कड़ी निंदा की है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि नाइजीरिया में ऐसी घटनाएं पहले भी घट चुकी हैं। 2012 में, रिवर स्टेट की राजधानी पोर्ट हरकोर्ट यूनिवर्सिटी के चार छात्रों को लुटेरा होने के शक में बेरहमी से पीट-पीट कर मार डाला गया था। उस समय भी पूरे देश में भारी गुस्सा और आक्रोश फैल गया था, और न्यायिक प्रणाली के बारे में तीव्र बहस शुरू हो गई थी। कई लोगों का मानना ​​है कि उस घटना में मारे गए पीड़ितों को कभी सच्चा न्याय नहीं मिला।