Bihar News : रेलवे ने कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद भागलपुर के पास गंगा पर 26.23 किलोमीटर लंबी विक्रमशिला-कटरिया न्यू डबल लाइन ब्रिज को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है। एजेंसी का चुनाव करने के लिए बोली लगाई गई है। विक्रमशिला-कटरिया रेललाइन के लिए भूमि अधिग्रहण भी चल रहा है। भू-अर्जन जल्द ही पूरा होगा।
यह बिहार में पहला रेल पुल और भागलपुर में पहला होगा। अबतक भागलपुर में विजय घाट पुल सुल्तानगंज-अगुवानी पुल और विक्रमशिला सेतु के साथ-साथ एक नया पुल भी सड़क पर है। पुल जो 26.23 किलोमीटर लंबा होगा न सिर्फ दो नेशनल हाइवे को जोड़ेगा बल्कि कोसी और सीमांचल प्रदेश के पूर्वी बिहार यानी अंग क्षेत्र से भी रेल संपर्क बनाएगा।
200 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहण की जाएगी
बहुत से मौजों में 200 हेक्टेयर से अधिक जमीन अधिग्रहण की जाएगी। टेंडर जारी कर दिया गया है पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ सतीश चंद्रा ने बताया। बता दें कि इस परियोजना को पिछले वर्ष अगस्त में मंजूरी मिली थी। विक्रमशीला-कटरिया रेलवे लाइन के अंतर्गत भागलपुर में गंगा नदी पर एक अतिरिक्त पुल का निर्माण 25497.17 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा।
नया प्रस्तावित गंगा पुल वाई आकार का होगा। इसमें पुल के दोनों ओर रेलमार्ग होगा। लाइन कटरिया और नवगछिया से उत्तर में और विक्रमशिला और शिवनारायणपुर से दक्षिण में बटेश्वर स्थान के पास जुड़ेगी। नई रेल लाइन के प्रस्ताव से गतिशीलता में सुधार और सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। मुख्य पुल की लंबाई 2.5 किलोमीटर होगी। यह पुल उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार के बीच की कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूत करेगा। पश्चिम बंगाल बिहार और झारखंड को इस पुल से कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों से भी जिले जोड़ सकेगा।
5 शहरों से रेल संपर्क हो जाएगा आसान
कोसी क्षेत्र के विभिन्न शहरों से भागलपुर गोड्डा दुमका देवघर रांची और अन्य स्थानों से रेल संपर्क सुगम होगा। इन दोनों शहरों के बीच की दूरी भी कम हो जाएगी। पुल पूर्वी और उत्तरी भारत को एक और रेलवे नेटवर्क बनाएगा। मेगा रेल कारिडोर बन जाएगा। दूसरी ओर परियोजना के पूरा होने पर भागलपुर से नई ट्रेनें चलाई जाएंगी जिससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी। यात्रियों को सुविधा मिलेगी। उधर भागलपुर विक्रमशिला मालदा मंडल में कटरिया से जुड़ जाएगा। इसके अलावा सबौर के पास एक वाई-लेग सेक्शन भी प्रस्तावित है।
यहां एक सप्ताह पहले पूर्व रेलवे महाप्रबंधक मिलिंद के देउस्कर ने भी निरीक्षण किया था। रेलमंत्री ने वर्चुअल में रेल अधिकारियों के साथ एक बैठक में भी इस मेगा ब्रिज की परियोजनाओं पर चर्चा की। 95 करोड़ किलोग्राम कार्बन का उत्सर्जन इससे कम होगा। बता दें कि परियोजना को सिर्फ वित्तीय वर्ष 2016-17 में बजट में शामिल किया गया था। बजट में चार हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव था। एक साल पहले एलाइनमेंट का ड्रोन सर्वे हुआ था। सर्वे में रेल टेल कंपनी ने पाया कि गंगा नदी क्षेत्र में अधिकांश जमीन है। इसलिए अधिग्रहण में मामला बहुत लंबा नहीं होगा।