नई दिल्ली: लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पारित होने के बाद आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इसे लेकर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने गुरुवार को कहा कि वे इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे और सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे।
मुस्लिमों के हितैषी बेनकाब- चंद्रशेखर आजाद
आजाद ने जेडीयू और टीडीपी जैसी पार्टियों पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि जो पहले मुस्लिम आरक्षण और उनके विकास की बात करती थीं, वे अब इस विधेयक के समर्थन में खड़ी हैं। उन्होंने कहा, “कल जो पार्टियां मुसलमानों को मुख्यधारा में लाने की बात कर रही थीं, उन्होंने ही अब धोखा दे दिया। लेकिन अब वे बेनकाब हो गई हैं। हम इस अन्याय के खिलाफ अदालत भी जाएंगे और सड़क पर उतरकर विरोध भी करेंगे।”
सच्चर समिति का दिया हवाला
इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 और मुसलमान वक्फ विधेयक पर विचार के लिए प्रस्ताव रखा। उन्होंने सच्चर समिति की 2006 की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन रिपोर्ट के अनुसार, 4.9 लाख वक्फ संपत्तियों से अनुमानित 12,000 करोड़ रुपये की आय थी। आज, वक्फ संपत्तियों की संख्या 8.72 लाख तक पहुंच गई है, जिससे इस आय का आंकड़ा कई गुना बढ़ने का अनुमान है।
आधी रात तक चला सत्र
लोकसभा में इस विधेयक पर भारी बहस हुई। इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने जहां इसका पुरजोर विरोध किया, वहीं भाजपा और सहयोगी दलों ने पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार का हवाला देते हुए इसे समर्थन दिया।
क्या बदलेगा नया बिल?
सरकार का कहना है कि यह 1995 के वक्फ अधिनियम में सुधार लाने के लिए लाया गया है। इसके तहत वक्फ बोर्डों की कार्यक्षमता बढ़ाई जाएगी।
संपत्तियों के पंजीकरण में पारदर्शिता आएगी। तकनीक के इस्तेमाल से प्रबंधन को आधुनिक बनाया जाएगा। हालांकि, विपक्ष इसे मुसलमानों के अधिकारों पर हमला बता रहा है और कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कर रहा है।
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