जरांगे की प्रमुख मांग है कि जिन पात्र मराठा लोगों के कुनबी रिकॉर्ड पहले से उपलब्ध हैं, उन्हें जल्द जाति प्रमाणपत्र जारी किया जाए। उन्होंने दावा किया कि लगभग 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र लोगों को प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए।
मनोज जरांगे ने जाति सत्यापन समिति को समाप्त करने की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि वैध दस्तावेज होने के बावजूद कई दावों को खारिज किया जा रहा है, जिससे मराठा समुदाय के युवाओं को आरक्षण का लाभ मिलने में देरी हो रही है।
आंदोलनकारी नेता ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मराठा आरक्षण से जुड़े लंबित मुद्दों का ठोस समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जा सकता है। उन्होंने समर्थकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
जरांगे ने कहा कि सरकार का कोई प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए आता है तो बातचीत की जाएगी, लेकिन उसे केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस समाधान के साथ आना होगा। उनके नए आंदोलन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण का मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है।