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Rajasthan News: जयपुर से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. जयपुर फैमिली कोर्ट-2 ने तलाक के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शादीशुदा होने के बावजूद दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखना, उसके नाम की मेहंदी लगाना और उसे पति के रूप में स्वीकार करना सामान्य दोस्ती की सीमा से परे है. कोर्ट ने इन परिस्थितियों को व्यभिचार (एडल्ट्री) से जुड़ा आचरण माना. साथ ही, पति को लंबे समय तक दांपत्य साहचर्य से वंचित रखना भी मानसिक क्रूरता के दायरे में माना.

जज विशाल भार्गव की अदालत ने पति की तलाक याचिका स्वीकार करते हुए दंपती की शादी समाप्त कर दी. पति ने 27 जनवरी 2023 को तलाक के लिए याचिका दायर की थी. दोनों की शादी मई 2013 में हुई थी.

दूसरे पुरुष के साथ गोवा में फेरे लेने की बात स्वीकार की

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, पत्नी ने स्वीकार किया था कि उसने दूसरे पुरुष के साथ गोवा में फेरे लिए और उसके साथ वैवाहिक संबंधों जैसा व्यवहार किया. उसने उस पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत भी रखा और अपने हाथ पर उसके नाम की मेहंदी लगाई.

अदालत ने माना कि पत्नी का यह आचरण सामान्य मित्रता तक सीमित नहीं था. कोर्ट के अनुसार, पत्नी ने पति के प्रति अपने वैवाहिक दायित्वों का उचित निर्वहन नहीं किया.

पति और सास-ससुर के साथ व्यवहार भी बना आधार

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने पति को दांपत्य साहचर्य से वंचित रखा. इसके अलावा, नाबालिग बेटे की उचित देखभाल नहीं करने और पति के माता-पिता के साथ अनुचित एवं अपमानजनक व्यवहार करने की बात भी सामने आई.

अदालत के अनुसार, इन सभी घटनाओं की श्रृंखला ने पति के लिए वैवाहिक जीवन में मानसिक शांति, विश्वास और संबंध बनाए रखना कठिन बना दिया. कोर्ट ने इन परिस्थितियों को मानसिक क्रूरता मानते हुए तलाक की अर्जी मंजूर कर ली.

2019 से शारीरिक संबंध नहीं बनाने का आरोप

पति ने अदालत में दावा किया था कि पत्नी ने वर्ष 2019 से उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया था. उसके मुताबिक, दोनों के बीच पिछले चार वर्षों से शारीरिक संबंध नहीं बने थे. हालांकि, अदालत ने इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया.

सवा साल से अलग रह रहे थे दंपती

कोर्ट ने दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कहा कि पति-पत्नी करीब सवा साल से अलग रह रहे थे. दोनों का बेटा वर्ष 2018 में पैदा हुआ था. ऐसे में जनवरी 2023 में तलाक की याचिका दायर किए जाने के समय बच्चे की उम्र करीब छह साल थी.

अदालत ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद पति की तलाक याचिका स्वीकार कर ली और करीब 13 साल पुराने वैवाहिक संबंध को समाप्त कर दिया.