Andhra Pradesh News: आम तौर पर भीख मांगकर जो पैसे प्राप्त होते हैं, उससे एक बिखारी अपना जीवन यापन करता है, लेकिन क्या आपने सुना है कि भीख मांगे वाला शख्स भीख में मांगे हुए पैसों को मंदिर के विकास में लगा दे? जाहिर है आपका जवाब ना में ही होगा, लेकिन ऐसा हुआ है. आंध्र प्रदेश में एक शख्स ने भीख मांगकर जमा किए गए 17 लाख रुपयों को मंदिर के विकास में लगा दिया.

शख्स में मंदिर में रेलिंग लगवाई, ताकि दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को समस्या न हो. ये कहानी है प्रदेश के मार्कपुरम जिले के कोल्लीमलाई के रहने वाले शिवराम रेड्डीयार की. उन्होंने पिछले पांच सालों में भीख मांगकर जमा हुए 17 लाख रुपयों को त्रिपुरंतकम गांव में स्थित बाला त्रिपुरसुंदरी देवी मंदिर के विकास में लगा दिया. ऐसा करके उन्होंने अपनी असाधारण उदारता की एक मिशाल पेश की है.
श्रद्धालुओं को होने वाली कठिनाइयों को देखा
शिवराम रेड्डीयार ने मंदिर के विकास में भीख में मांगे पैसे लगाकर एक महान मानवतावादी के रूप में ख्याति अर्जित की है. दरअसल, उन्होंने त्रिपुरसुंदरी देवी मंदिर में त्योहारों और भीड़भाड़ के समय श्रद्धालुओं को होने वाली कठिनाइयों को देखा. श्रद्धालुओं को प्रवेश के लिए धक्कामुक्की करते देख वे दंग रह गए. इसके बाद उन्होंने इसका एक स्थायी समाधान ललाशने का निश्चय किया.
लोहे की रेलिंग लगवाई
शिवराम रेड्डीयार के मन में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलिंग बनवाने का विचार आया, जिसके लिए उन्होंने पांच साल तक भीख मांगकर धन प्राप्त किया और उसे बचाया. उन्होंने अपनी निजी जरूरतों को न्यूनतम रखा. वह दिन में केवल एक बार भोजन करते. पांच वर्षों की कड़ी मेहनत और निस्वार्थ त्याग के फलस्वरूप, उन्होंने मंदिर परिसर में 17 लाख रुपये की लागत से स्थायी लोहे की रेलिंग लगवाई.
ये रेलिंग त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने में बहुत सहायक सिद्ध हुई हैं. रेड्डीयार ने कहा कि उन्होंने जो भी सेवा की है, वह माता के आशीर्वाद से ही संभव हुई है. उन्होंने विनम्रता व्यक्त करते हुए कहा, ‘माता ने ही मुझे यह सेवा करने का आदेश दिया था.’



