वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट की दुनिया में अलग पहचान बना ली है। आईपीएल में बड़ेबड़े गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ अंदाज दिखाने वाले इस युवा बल्लेबाज की नजर अब भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत करने पर है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं है। इसके लिए वैभव मैदान पर बल्लेबाजी के साथ पर्दे के पीछे भी अपनी कमजोरियों को दूर करने में जुटे हैं। उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने उनकी ट्रेनिंग को लेकर कई दिलचस्प खुलासे किए हैं।

हर दिन सैकड़ों गेंदों का सामना करके तैयार हुए वैभव

वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे सिर्फ उनकी प्राकृतिक प्रतिभा नहीं, बल्कि सालों की कड़ी मेहनत भी है। उनके बचपन के कोच मनीष ओझा के मुताबिक, वैभव ने बहुत छोटी उम्र से ही बल्लेबाजी की बारीकियों पर काम करना शुरू कर दिया था। कोच ने बताया कि वैभव सूर्यवंशी एक अभ्यास सत्र में करीब 500 से 600 गेंदों का सामना करते थे।

खास बात यह थी कि वह सिर्फ सामान्य बल्लेबाजी नहीं करते थे, बल्कि जिस शॉट को बेहतर बनाना होता था, उसी पर लगातार अभ्यास करते थे। अगर उन्हें कट शॉट सुधारना होता था तो सैकड़ों गेंदें उसी शॉट के लिए खेलते थे। इसी तरह पुल शॉट और बड़े शॉट लगाने की तकनीक पर भी घंटों मेहनत करते थे। कई बार एक ही शॉट का अभ्यास करने में तीन से चार घंटे तक लग जाते थे।

मैच जैसे हालात में खुद को परखते थे युवा बल्लेबाज

वैभव सूर्यवंशी की ट्रेनिंग का एक और खास हिस्सा मैच सिमुलेशन रहा है। कोच ने बताया कि उन्हें छोटी उम्र से ही बड़े और अनुभवी गेंदबाजों के सामने खेलने का मौका दिया गया। वह अंडर19, अंडर23 और रणजी ट्रॉफी स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ अभ्यास करते थे। इस दौरान उन्हें अलगअलग परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने की जिम्मेदारी दी जाती थी।

कभी उन्हें लक्ष्य का पीछा करना होता था तो कभी मुश्किल परिस्थितियों में विकेट बचाकर खेलना पड़ता था। इस तरह वैभव सूर्यवंशी ने कम उम्र में ही दबाव में खेलने का अनुभव हासिल किया। उनकी इसी तैयारी ने बल्लेबाजी में आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद की।

भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए जारी है इंतजार

वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा को देखते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा माना जा रहा है। हालांकि, टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह पक्की करने के लिए उन्हें लगातार प्रदर्शन करना होगा। टॉप ऑर्डर में पहले से मौजूद खिलाड़ियों के कारण उनके लिए अपनी जगह बनाना चुनौतीपूर्ण है। टीम मैनेजमेंट भी युवा खिलाड़ियों को मौका देने के साथ टीम के मौजूदा संयोजन को बनाए रखना चाहता है।

ऐसे में वैभव सूर्यवंशी के लिए अपनी बल्लेबाजी में निरंतरता लाना बेहद जरूरी होगा। उनके कोच के खुलासे से साफ है कि इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे उनकी वर्षों की मेहनत छिपी है। अब देखना होगा कि यह युवा बल्लेबाज अपने प्रदर्शन से भारतीय टीम में कितनी जल्दी स्थायी जगह बना पाता है।