उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल थमता दिखाई दे रहा है. कांग्रेस आलाकमान की आपत्ति और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की चिट्ठी के बाद हरीश रावत ने अपनी आगे की 9 प्रस्तावित धन्यवाद यात्राएं स्थगित कर दी हैं. हरीश रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि उन्होंने नौ और यात्राओं की योजना बनाई थी और इनके आयोजन की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई थी.

शैलजा ने जताई थी कड़ी आपत्ति

हालांकि अब उन्होंने इन यात्राओं को स्थगित करने का फैसला किया है. इससे पहले हरीश रावत ने अपनी यात्रा को लेकर उठे सवालों पर सफाई भी दी थी और कहा था कि उनके कार्यक्रम को गलत समझा गया. दरअसल, हरीश रावत ने उत्तराखंड में 1 अक्टूबर से ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया था. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने 1 अक्टूबर को उन्हें पत्र लिखकर यात्रा रोकने को कहा था.

प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की आपत्ति थी कि इन कार्यक्रमों को लेकर न तो प्रदेश प्रभारी से चर्चा हुई और न ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ समन्वय किया गया. पार्टी नेतृत्व ने चुनावी साल में कांग्रेस संगठन के समानांतर व्यक्तिगत कार्यक्रम चलाने पर भी सवाल उठाए थे.

पहले रावत ने दिखाई थी तल्खी

हालांकि शुरुआत में हरीश रावत ने आलाकमान की आपत्ति के बावजूद अपनी यात्रा जारी रखी. 5 अक्टूबर को उन्होंने जसपुर से हल्द्वानी तक यात्रा शुरू की. इसके बाद रामनगर में उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया. इसी दौरान कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत से मुलाकात की और साफ संदेश दिया कि उत्तराखंड में चुनावी अभियान सभी नेताओं को साथ लेकर, कांग्रेस के बैनर तले और संगठन की तय योजना के मुताबिक चलाया जाएगा.

अब रावत ने दिया स्पष्टीकरण

आलाकमान के साथ बातचीत और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया के बीच हरीश रावत ने अपना रुख बदला है. उन्होंने आगे की नौ यात्राओं को स्थगित करने का फैसला किया है. रावत ने यह भी संकेत दिया कि उनका मकसद कांग्रेस से अलग कोई समानांतर राजनीतिक गतिविधि खड़ी करना नहीं था, बल्कि जनता से संवाद और पार्टी को सक्रिय करना था. हरीश रावत लंबे समय से उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में रहे हैं.