मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले हफ्ते इंदौर स्थित डेली कॉलेज को लेकर एक नई बहस छिड़ गई. दरअसल, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आयोजन को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने सिंधिया से इस बारे में बात करने और यह सवाल करने का जिक्र किया था कि ऐसा आयोजन ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में क्यों नहीं कराया जाता. इसके बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कड़े शब्दों में पलटवार किया.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, दिग्विजय सिंह ना भूलें, डेली कॉलेज भी सिंधिया परिवार की संस्था है, सिंधिया परिवार के द्वारा स्थापित की गई है. दिग्विजय सिंह कभी चीजें भूल जाते हैं, मेरा काम है कि उन्हें समयसमय पर याद दिलाना. सिंधिया के इस बयान के बाद डेली कॉलेज की स्थापना, उसके निर्माण और उसमें विभिन्न राजपरिवारों के योगदान का इतिहास एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. ऐतिहासिक दस्तावेजों और संस्थान से जुड़े विवरणों के आधार पर डेली कॉलेज के निर्माण में सिंधिया परिवार की भूमिका के महत्वपूर्ण तथ्य सामने आते हैं.

डेली कॉलेज के निर्माण की कहानी: 118 एकड़ के परिसर का ऐतिहासिक सफर

डेली कॉलेज के वर्तमान परिसर के निर्माण की प्रक्रिया बीसवीं शताब्दी के शुरुआती वर्षों में आगे बढ़ी. लगभग 118 एकड़ में फैले इस परिसर के निर्माण में डेढ़ दशक से अधिक समय लगा और नए भवन का उद्घाटन वर्ष 1916 में एक भव्य समारोह के साथ हुआ. यह संस्थान मध्य भारत में शिक्षा के विकास और तत्कालीन राजपरिवारों के शैक्षणिक योगदान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है.

निर्माण में सबसे बड़ा आर्थिक योगदान सिंधिया परिवार का

डेली कॉलेज के निर्माण में विभिन्न रियासतों और राजपरिवारों ने आर्थिक सहयोग दिया था. वर्ष 1906 में लंदन में प्रकाशित सिविल इंजीनियरिंग रिपोर्ट ऑफ बिल्डिंग के संदर्भ में उपलब्ध विवरणों के अनुसार, निर्माण के लिए सिंधिया परिवार ने सर्वाधिक पाँच लाख रुपये का योगदान दिया था. इसके मुकाबले इंदौर के होलकर परिवार ने दो लाख रुपये और रीवा के राजपरिवार ने डेढ़ लाख रुपये का योगदान दिया था. दोनों राजपरिवार को सिंधिया परिवार ही शिक्षण संस्थान के निर्माण में योगदान की लिए साथ लाए थे .

ये आंकड़े डेली कॉलेज के निर्माण में सिंधिया परिवार की आर्थिक भूमिका को रेखांकित करते हैं. महाराजा श्रीमंत माधो राव सिंधिया इस संस्थान के प्रमुख दानदाताओं और संस्थापक संरक्षकों में शामिल थे. सिंधिया परिवार का योगदान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं था. संस्थान के परिसर में ग्वालियर हाउस और सिंधिया पवेलियन जैसी संरचनाएं भी इस ऐतिहासिक जुड़ाव की पहचान हैं. प्रसिद्ध चित्रकार हर्बर्ट अर्नोल्ड ओलिवियर द्वारा बनाया गया महाराजा सिंधिया का चित्र आज भी डेली कॉलेज के हॉल में प्रमुखता से प्रदर्शित है.

डेली कॉलेज की परिकल्पना की शुरुआत कैसे हुई?

डेली कॉलेज की स्थापना की परिकल्पना का संबंध वर्ष 1870 के आसपास की उस ऐतिहासिक बातचीत से जोड़ा जाता है, जिसमें सर हेनरी डेली और ग्वालियर के महाराजा जयाजीराव सिंधिया के बीच मध्य भारत में शिक्षा के विकास पर चर्चा हुई थी.

इस बातचीत में क्षेत्र के शैक्षणिक विकास के लिए एक प्रतिष्ठित संस्थान स्थापित करने की आवश्यकता पर विचार किया गया. उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, जयाजीराव सिंधिया ने इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने की इच्छा व्यक्त की थी.

सर हेनरी डेली लंबे समय तक ग्वालियर में पदस्थ रहे थे. उनके नाम से स्थापित इस संस्थान ने आगे चलकर मध्य भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया.

इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए डेली कॉलेज के निर्माण में सिंधिया परिवार की भूमिका केवल एक दानदाता परिवार की नहीं, बल्कि संस्थान की परिकल्पना और उसके विकास से जुड़े प्रमुख संरक्षकों में से एक की भी रही है.

डेली कॉलेज से आगे भी शिक्षा के क्षेत्र में सिंधिया परिवार का योगदान

भारत में शिक्षा के विकास के लिए सिंधिया परिवार का योगदान डेली कॉलेज तक सीमित नहीं रहा. विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक संस्थाओं के विकास में भी इस परिवार की भूमिका का उल्लेख मिलता है.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सिंधिया परिवार ने पांच लाख पच्चीस हजार रुपये का योगदान दिया था. उपलब्ध विवरणों के अनुसार, बनारस के राजपरिवार के बाद यह प्रमुख योगदानों में शामिल था. महाराजा माधो राव सिंधिया को विश्वविद्यालय का प्रथम प्रोवाइस चांसलर भी नियुक्त किया गया था.

इसी तरह, उज्जैन की विक्रम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी, गजराराजा मेडिकल कॉलेज, माधव इंजीनियरिंग कॉलेज, सिंधिया पब्लिक स्कूल और सिंधिया कन्या विद्यालय जैसी संस्थाओं के विकास में भी सिंधिया परिवार से जुड़े योगदानों का उल्लेख किया जाता है.

ग्वालियर राजपरिवार की सार्वजनिक संस्थाओं के प्रति उदारता का ऐतिहासिक उल्लेख

ग्वालियर राजपरिवार के शैक्षणिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी योगदान का वर्णन करते हुए एक अंग्रेजी विवरण में कहा गया है:

The munificence of the Gwalior House has been responsible for the founding and maintenance of a number of public institutions. The familys renowned Ganga Jali Fund, with a corpus of 250 million rupees, has financed the Jiwaji University at Gwalior, Vikram University at Ujjain, Gajraja Raja Medical College, Madhav Engineering College, Scindia Public School and Scindia Kanya Vidyalaya in Gwalior, and the Samrat Ashok Institute in Vidisha. Besides, over 30 other trusts set up by the family cover a wide field of religious, social welfare and charitable activities.

इसका हिंदी अनुवाद है:

ग्वालियर राजघराने अर्थात सिंधिया परिवार की उदारता अनेक सार्वजनिक संस्थाओं की स्थापना और उनके संचालन में सहायक रही है. परिवार की प्रसिद्ध गंगाजली निधि, जिसमें 25 करोड़ रुपये की राशि थी, से ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय, उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय, गजराराजा मेडिकल कॉलेज, माधव इंजीनियरिंग कॉलेज, सिंधिया पब्लिक स्कूल और सिंधिया कन्या विद्यालय तथा विदिशा स्थित सम्राट अशोक संस्थान को आर्थिक सहायता मिली. इसके अतिरिक्त, परिवार द्वारा स्थापित 30 से अधिक न्यास धार्मिक कार्यों, सामाजिक कल्याण और परोपकारी गतिविधियों के व्यापक क्षेत्र में योगदान देते हैं.

यह विवरण सिंधिया परिवार की उस ऐतिहासिक परंपरा को रेखांकित करता है, जिसमें शिक्षा, सामाजिक कल्याण और सार्वजनिक संस्थाओं के विकास को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया.

निष्कर्ष: इतिहास के तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए चर्चा

सिंधिया रिसर्च सेंटर के मुताबिक, डेली कॉलेज के निर्माण में विभिन्न राजपरिवारों की भूमिका रही, लेकिन उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों में सिंधिया परिवार के पाँच लाख रुपये के योगदान और संस्थान की परिकल्पना से जुड़े उसके योगदान का विशेष उल्लेख मिलता है. ऐसे में डेली कॉलेज के इतिहास पर किसी भी राजनीतिक बहस को केवल आरोपप्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय ऐतिहासिक दस्तावेजों, वित्तीय योगदानों और संस्थान की स्थापना से जुड़े तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए.