फेस्टिव सीजन में कार और बाइक खरीदने वालों के लिए कंपनियां और डीलरशिप कई तरह के डिस्काउंट और ऑफर्स दे रही हैं. हालांकि, सिर्फ बड़ी छूट देखकर गाड़ी खरीदना समझदारी नहीं है. कई बार इंश्योरेंस, एक्सेसरीज, लोन और दूसरे चार्ज के नाम पर ग्राहकों से एक्स्ट्रा पैसे वसूले जाते हैं. ऐसे में जरूरी है कि गाड़ी खरीदते वक्त कुछ सावधानियां रखना चाहिए.

कम से कम तीन डीलरशिप से लें कीमत
कार या बाइक खरीदने से पहले एक ही मॉडल और वैरिएंट की कीमत कम से कम तीन डीलरशिप से पता करें. सभी से लिखित ऑनरोड कीमत मांगें. इसमें एक्सशोरूम कीमत, रजिस्ट्रेशन चार्ज, इंश्योरेंस और दूसरे खर्च शामिल होने चाहिए. जैसे एक शोरूम 50 हजार रुपए की छूट दे रहा है, जबकि दूसरा 65 हजार रुपए की छूट दे सकता है. यह भी देखें कि कहीं ज्यादा डिस्काउंट देने वाला डीलर दूसरे चार्ज बढ़ाकर आपसे एक्स्ट्रा पैसे तो नहीं ले रहा है.
इंश्योरेंस और कार लोन को कम्पेयर करें
डीलरशिप से ही इंश्योरेंस खरीदना जरूरी नहीं है. ग्राहक अपनी पसंद की किसी भी इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ले सकते हैं. अलगअलग कंपनियों के प्रीमियम और मिलने वाली सुविधाओं की तुलना करके बेहतर ऑप्शन सिलेक्ट किया जा सकता है. कई कंपनियां फेस्टिव सीजन में इंश्योरेंस पर भी अच्छा डिस्काउंट दे सकती हैं. इसी तरह कार लोन लेते समय अलगअलग बैंकों की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और कुल चुकाई जाने वाली रकम की तुलना जरूर करें.
जरूरत नहीं तो एक्सेसरीज न खरीदें
कई डीलरशिप ग्राहकों को सीट कवर, फ्लोर मैट, मड फ्लैप, डोर वाइजर और एक्सेसरीज के पैकेज बेचती हैं. इनकी वजह से कार की कीमत में 20 हजार से 35 हजार रुपए या इससे ज्यादा का खर्च जुड़ सकता है. इसलिए एक्सेसरीज खरीदने से पहले हर सामान की अलगअलग कीमत पूछें. जो चीजें जरूरी नहीं हैं, उन्हें खरीदने से मना कर दें. इससे आप हजारों रुपए बचा सकते हैं.
डिलीवरी से पहले गाड़ी की अच्छी तरह जांच करें
नई कार या बाइक की डिलीवरी लेते समय जल्दबाजी बिल्कुल न करें. गाड़ी को दिन की रोशनी में चेक करें, ताकि स्क्रैच, डेंट, पेंट की खराबी और टायर या शीशे में किसी तरह की परेशानी आसानी से दिखाई दे सके. इसके अलावा ओडोमीटर, हेडलाइट, इंडिकेटर, म्यूजिक सिस्टम और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स भी चेक करें. गाड़ी की मैन्युफैक्चरिंग डेट और टायर जैसे जरूरी पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग डेट भी जरूर देखें.
सभी जरूरी डोक्यूमेंट्स लेना न भूलें
कार की डिलीवरी लेते समय इनवॉइस, इंश्योरेंस पॉलिसी, ओनर मैनुअल और वारंटी से जुड़े सभी दस्तावेज जरूर लें. साथ ही यह भी चेक करें कि डीलर ने जिन एक्सेसरीज और फीचर्स का वादा किया है, उनका जिक्र बिल या डिलीवरी चेकलिस्ट में किया गया है या नहीं. अक्सर डीलरशिप पर भीड़ और जल्द डिलीवरी देने के दबाव में कई ग्राहक गाड़ी और दस्तावेजों की जांच नहीं करते. बाद में सर्विसिंग के दौरान उन्हें परेशानी होती है. इसलिए ग्राहकों को जल्दबाजी करने के बजाय गाड़ी की हर चीज अच्छी तरह जांचने के बाद ही डिलीवरी लेनी चाहिए.



