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बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी पर हुआ नाव हादसा कई परिवारों को ऐसा जख्म दे गया है, जिसे भर पाना शायद कभी संभव नहीं होगा. मंगलवार को जिन घरों से बच्चे खुशी-खुशी भोज खाने के लिए निकले थे, वहां अब चीख-पुकार और मातम पसरा है. परिवार के लोगों को इंतजार था कि बच्चे भोज खाकर हंसते-मुस्कुराते हुए लौटेंगे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी जिंदगी में ऐसा अंधेरा छाने वाला है, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी.

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इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद गांव से सामने आई है. यहां रामप्रवेश राय उर्फ राजा के परिवार के सात बच्चों की मौत ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया. जिस घर में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब अपनों को खोने का गम है. किसी की आंखें अपने बच्चे को तलाश रही हैं, तो कोई इस सदमे में बदहवास है कि आखिर एक साथ इतने मासूम बच्चों को कैसे खो दिया.

भोज खाने की खुशी मातम में बदली, एक परिवार के सात बच्चे काल के गाल में समाए..

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रामपुर श्यामचंद गांव के लोगों के लिए मंगलवार का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. करीब 20 बच्चे नाव से भोज खाने के लिए निकले थे. उनके मन में खुशी थी और घरवालों को उनके लौटने का इंतजार. लेकिन गंगा नदी में उनकी नाव हादसे का शिकार हो गई. इस दुर्घटना में 13 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है. इनमें सात बच्चे रामप्रवेश राय उर्फ राजा के परिवार के बताए जा रहे हैं.

एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत की खबर ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया. जिन मासूमों को कुछ देर पहले तक परिवार के लोग खुशी-खुशी विदा कर रहे थे, उनके लिए अब आंसू बहाए जा रहे हैं. बच्चों के जाने से परिवार में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है.

भोज खाने के लिए घर से निकले इन बच्चों को अंदाजा भी नहीं था कि उनका यह सफर आखिरी साबित हो सकता है. परिवार के लोगों ने भी शायद कभी नहीं सोचा होगा कि बच्चों के लौटने से पहले ही ऐसी खबर आ जाएगी, जो उनकी पूरी दुनिया बदलकर रख देगी. हादसे के बाद गांव में चीख-पुकार मची है. जिन घरों में बच्चों के आने की राह देखी जा रही थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है.

आखिर क्यों हुआ हादसा?

गंगा नदी में हुए इस हादसे ने जहां कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, वहीं ग्रामीणों में भारी आक्रोश भी है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस नाव से लोग नदी पार करने के लिए आते-जाते थे, वह काफी पुरानी और जर्जर थी. ग्रामीणों का दावा है कि नाव बदलने के लिए कई बार आवेदन भी दिया गया था, लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया.

लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पुरानी नाव को बदल दिया गया होता, तो शायद इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था. बच्चों की मौत के बाद ग्रामीणों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि जब नाव की हालत को लेकर पहले से शिकायतें की जा रही थीं, तो उन्हें गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया.

हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों के लिए यह सिर्फ अपनों को खोने का मामला नहीं है. उनके मन में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई. ग्रामीणों का आरोप है कि अगर उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान दिया गया होता, तो शायद आज कई परिवारों के बच्चे उनके बीच होते.

क्या लिया जाएगा कोई एक्शन?

नाव हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है. लोगों का आरोप है कि लापरवाही के कारण इतनी बड़ी त्रासदी हुई. इसी नाराजगी के बीच ग्रामीणों ने संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग भी की है.

स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या उठे सवाल?

ग्रामीणों के गुस्से की एक बड़ी वजह हादसे के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सामने आए सवाल भी हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में केवल एक डॉक्टर मौजूद थे. उनका यह भी दावा है कि मौके पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी. इसके अलावा अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर और वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं की कमी होने का आरोप भी लगाया गया है.

इन आरोपों ने ग्रामीणों की नाराजगी को और बढ़ा दिया. लोगों का सवाल है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद घायलों और प्रभावित लोगों को जरूरी मेडिकल सर्विस समय पर उपलब्ध कराने के इंतजाम क्यों नहीं थे. हालांकि, ये सभी बातें स्थानीय लोगों की ओर से लगाए गए आरोप हैं.

डीएम को गांव वालों ने खदेड़ा?

हादसे के बाद जब प्रशासनिक स्तर पर हालात का सामना करना पड़ा, तो ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया. स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कथित लापरवाही को लेकर लोगों ने डीएम का जमकर विरोध किया. उनके खिलाफ नारेबाजी भी की गई. विरोध इतना तेज था कि डीएम को वापस लौटना पड़ा.

इस घटना के बाद गांव में गम और गुस्सा, दोनों का माहौल बना हुआ है. एक तरफ परिवार अपने बच्चों को खोने के सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रामीण इस हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं. लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि जिन समस्याओं के बारे में पहले से शिकायत किए जाने का दावा किया जा रहा है, उन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

गांव वालों की क्या है मांग?

फिलहाल, हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के शव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रखे गए हैं. ग्रामीण शवों को उठाने नहीं दे रहे हैं. इससे वहां तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. लोग प्रशासन से जवाबदेही तय करने और अपनी मांगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. रामपुर श्यामचंद गांव में इस समय हर तरफ दुख का माहौल है. जिन बच्चों की हंसी से घर गुलजार रहते थे, उनके जाने से परिवारों की खुशियां छिन गई हैं. रामप्रवेश राय उर्फ राजा के परिवार के सात बच्चों की मौत ने एक ही घर को ऐसा दर्द दिया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है.