भारत में एक ओर तो नई कारों की बिक्री नए रिकॉर्ड बना रही है, वहीं अब सेकेंड हैंड कारें की भी लोकप्रियता बढ़ रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह नई कारों की लगातार बढ़ती कीमतें और कम बजट में अच्छी कार मिलने का विकल्प है. क्रिसिल रेटिंग्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 202627 में भारत का यूज्ड कार बाजार 7 से 9 फीसदी की दर से बढ़ सकता है. देश में 70 लाख से ज्यादा पुरानी कारों की बिक्री होने का अनुमान है.

रिपोर्ट के अनुसार, यूज्ड कार बाजार की सबसे बड़ी ताकत वे लोग हैं जो पहली बार कार खरीद रहे हैं. ऐसे खरीदार कुल बिक्री का करीब दोतिहाई हिस्सा हैं. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। नई कारों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में कम बजट वाले ग्राहक पुरानी कार खरीदना ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं. यही वजह है कि सेकेंड हैंड कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है.

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने बढ़ाया भरोसा

कुछ साल पहले तक लोग पुरानी कार खरीदने में हिचकिचाते थे, लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने यह काम काफी आसान बना दिया है. आज ग्राहक घर बैठे कार की पूरी जानकारी, सर्विस हिस्ट्री, इंस्पेक्शन रिपोर्ट और कीमत देख सकते हैं. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। इसके अलावा आसान फाइनेंस और लोन की सुविधा भी मिल रही है. इससे लोगों का भरोसा पहले के मुकाबले काफी बढ़ा है.

लगातार मजबूत हो रहा बाजार

रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय भारत के कुल यूज्ड कार बाजार में कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 26 फीसदी हो गई है. वित्त वर्ष 202122 में यह आंकड़ा सिर्फ 20 से 21 फीसदी था. हालांकि अभी भी करीब 74 फीसदी कारोबार असंगठित बाजार के जरिए होता है. यानी आने वाले वर्षों में संगठित कंपनियों के पास तेजी से बढ़ने का बड़ा मौका है.

काफी सस्ती हैं पुरानी कारें

GST में बदलाव के बाद नई और पुरानी कारों की कीमतों का अंतर थोड़ा कम जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी यूज्ड कार खरीदना काफी सस्ता पड़ता है. पुरानी हैचबैक और सेडान नई कारों के मुकाबले करीब 25 फीसदी तक सस्ती पड़ती हैं. वहीं SUV और यूटिलिटी व्हीकल खरीदने पर भी करीब 20 फीसदी तक की बचत हो सकती है. नई और पुरानी कारों की कीमतों का अंतर सिर्फ 4 से 6 फीसदी ही कम हुआ है. यानी सीमित बजट वाले ग्राहकों के लिए यूज्ड कार आज भी एक शानदार विकल्प बनी हुई है.

कम चली हुई कारें भी मौजूद

एक समय था जब सेकेंड हैंड बाजार में ज्यादातर 8 से 10 साल पुरानी कारें मिलती थीं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. आज बिकने वाली यूज्ड कारों की औसत उम्र सिर्फ करीब 4 साल रह गई है. इसका मतलब है कि ग्राहकों को पहले के मुकाबले नई और बेहतर हालत वाली कारें मिल रही हैं. इस बदलाव की वजह है कि लोग अब पहले से जल्दी अपनी कार बदल रहे हैं और कंपनियां भी लगातार नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं.