
Sunlight For Better Sleep: आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहतमंद रह पाना चुनौती बन गया है. सेहत फिट रखने के लिए लोग सुबह से लेकर शाम तक न जाने क्या-क्या करते हैं. मगर, सुबह की धूप संजीवनी साबित हो सकती है. दरअसल, सुबह की हल्की धूप सिर्फ शरीर को गर्माहट देने का काम नहीं करती, बल्कि यह दिमाग के लिए भी एक तरह का ‘नेचुरल अलार्म’ है. अगर सुबह उठते ही मोबाइल देखने की आदत है और दिन का ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर गुजरता है, तो अपनी दिनचर्या में महज 15 मिनट की नेचुरल रोशनी शामिल करना फायदेमंद हो सकता है.
न्यूरोलॉजी और स्लीप मेडिसिन से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह की रोशनी शरीर की आंतरिक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को सही तरीके से सेट करने में मदद करती है, जिसका असर मूड, जागरूकता और रात की नींद पर पड़ सकता है. अब सवाल है कि आखिर, सुबह की धूप क्यों जरूरी है? 15 मिनट धूप का क्या असर हो सकता है? धूप लेने का सही तरीका क्या है? पढ़िए न्यूरोलॉजिस्ट की रिपोर्ट-
क्यों जरूरी है सुबह की धूप?
हमारे दिमाग में मौजूद बॉडी क्लॉक रोशनी और अंधेरे के संकेतों के आधार पर शरीर को बताती है कि कब जागना है और कब आराम करना है. आंखों के जरिए मिलने वाली प्राकृतिक रोशनी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती है. खासतौर पर सुबह की रोशनी शरीर की सर्केडियन घड़ी को दिन के समय के साथ सिंक्रोनाइज करने में मदद करती है.
नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन के अनुसार, सुबह पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी लेने से बॉडी क्लॉक को संकेत मिलता है कि दिन शुरू हो चुका है. इससे दिन में अलर्टनेस और मूड बेहतर रखने में मदद मिल सकती है, जबकि रात में रोशनी कम रखना सोने की प्रक्रिया को आसान बना सकता है.
15 मिनट धूप का क्या असर हो सकता है?
2026 में यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स की एक विशेषज्ञ सलाह में सुबह कम से कम 15 मिनट प्राकृतिक रोशनी लेने की बात कही गई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह की रोशनी दिमाग को ‘अब जागने का समय है’ का संकेत देती है और सर्केडियन रिदम को मजबूत करने में मदद कर सकती है. कुछ न्यूरोलॉजिस्ट भी सुबह उठने के शुरुआती समय में 10 से 20 मिनट प्राकृतिक रोशनी लेने की सलाह देते हैं. इसका उद्देश्य शरीर की आंतरिक घड़ी को दिन-रात के प्राकृतिक चक्र के साथ बेहतर ढंग से जोड़ना है.
नींद से कैसे जुड़ी है धूप?
सर्केडियन रिदम सही रहने पर शरीर में नींद-जागने का चक्र भी बेहतर तरीके से संचालित होता है. सुबह की रोशनी दिन में जागरूकता बढ़ाने वाले संकेत देती है और शाम होते-होते शरीर को नींद के लिए तैयार होने में मदद करती है. शोध में सुबह की रोशनी और नींद के समय तथा नींद की गुणवत्ता के बीच संबंध भी पाया गया है.
धूप लेने का सही तरीका क्या है?
सुबह उठने के बाद बाहर खुले स्थान पर करीब 15 मिनट नेचुरल रोशनी लेना आसान तरीका हो सकता है. खिड़की के पीछे बैठने की तुलना में बाहर की नेचुरल रोशनी अधिक प्रभावी होती है. हालांकि, सूरज को सीधे आंखों से देखने की कोशिश बिल्कुल न करें. तेज धूप में त्वचा और आंखों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें. वहीं, रात के समय कमरे की तेज रोशनी और मोबाइल-स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना भी जरूरी है, क्योंकि देर रात की रोशनी शरीर की प्राकृतिक नींद प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है.
कब ले डॉक्टर की सलाह?
हेल्थ एक्पर्ट की मानें तो दिन की शुरुआत 15 मिनट की प्राकृतिक रोशनी से करना एक आसान आदत हो सकती है. हालांकि, लगातार अनिद्रा, अत्यधिक दिन में नींद या लंबे समय से मूड संबंधी परेशानी हो तो केवल धूप पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.



