सोने की कीमतों में मचा हाहाकार, खरीदनें दौडे लोग-जानें भारी गिरावट के 5 कारण
Gold prices in turmoil; people rush to buy—find out the 5 reasons behind the sharp decline.

सोने की गिरती कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। निवेशकों की नजर लगातार सोने पर है। वे इस इंतजार में हैं कि इसकी कीमतें कब बढ़ेंगी। इस साल जनवरी के आखिर में सोने का भाव एमसीएक्स पर प्रति 10 ग्राम करीब 1.76 लाख रुपये पहुंच गया था। यह इसका ऑल टाइम हाई भी है। आज सोमवार को सुबह 10:30 बजे एमसीएक्स पर इसका भाव मामूली तेजी के साथ 1.38 लाख रुपये से थोड़ा ऊपर था। लेकिन सोने की कीमत अपने पीक से अब तक करीब 22 फीसदी नीचे गिर गई है।

सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वजहें हैं। इनमें 5 कारण प्रमुख हैं:

1. अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी।

2. अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलना।

3. केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी धीमी पड़ना।

4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी।

5. निवेशकों का मुनाफावसूली करना।

ड्यूटी बढ़ने के बाद भी सस्ता हुआ सोना
कैपिटलमाइंड के फाउंडर दीपक शेनॉय ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि जनवरी के रेकॉर्ड से सोना करीब 20% गिर चुका है। उनके मुताबिक, सरकार की ओर से मई में इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% किए जाने के बावजूद सोने का भाव ड्यूटी बढ़ने से पहले के स्तर से भी नीचे आ गया है। शेनॉय ने निवेशकों को यह भी याद दिलाया कि सोने में लंबे समय तक रिटर्न नहीं मिलने या नुकसान होने की स्थिति रह सकती है।

धनतेरस पर सोना खरीदें या नहीं?
धनतेरस, दिवाली और शादी के सीजन में सोने की मांग बढ़ती है। कीमतों में गिरावट से गहने खरीदने की योजना बना रहे लोगों को राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोने में निवेश करने वाले लोग एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चार से छह हिस्सों में बांटकर अगले तीन से छह महीनों में खरीदारी करें। इससे अगर कीमतें और गिरती हैं, तो निवेशक को कम भाव पर भी खरीदने का मौका मिल सकता है।

क्या सोना फिर रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में जल्द ही पुराना रेकॉर्ड टूटने की संभावना कम है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने की कीमतें 2027-28 तक पुराने रेकॉर्ड स्तर की ओर लौट सकती हैं। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,900 से 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि सोने को दोबारा रेकॉर्ड स्तर तक पहुंचने में एक साल से ज्यादा समय लग सकता है। इसके लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दौर खत्म होना और मौद्रिक नीतियों का ज्यादा अनुकूल होना जरूरी होगा।

पोर्टफोलियो में कितना सोना रखें?
पहले एक्सपर्ट्स आमतौर पर निवेश पोर्टफोलियो का 5-10% हिस्सा सोने में रखने की सलाह देते थे। हालांकि मौजूदा अनिश्चितता को देखते हुए कुछ एक्सपर्ट्स इसे बढ़ाकर 15% तक रखने की बात कह रहे हैं। जानकारों के मुताबिक इक्विटी में ज्यादा निवेश करने वाले निवेशक 5 से 10% सोना रख सकते हैं। वहीं कम जोखिम लेने वाले निवेशक 10 से 15% तक सोना रख सकते हैं।