पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ योजना यानी नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम को मंजूरी दे दी है. यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य देश के अपतटीय क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देना है. इस योजना पर वित्त वर्ष 203031 तक कुल 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू एक्सप्लोरेशन और उत्पादन में तेजी लाने, तकनीकी नेतृत्व को बढ़ावा देने और विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

इस ‘समुद्र मंथन’ योजना से भारत के तेल भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल से अधिक की वृद्धि होने का अनुमान है, साथ ही इससे ऑफशोर एक्सप्लोरेशन गतिविधियों का काफी विस्तार होगा और घरेलू तेल और गैस उत्पादन में वृद्धि होगी.

अमित शाह ने क्या कहा?

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 84,084 करोड़ की ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी मिलने से देश की विकास यात्रा को नई गति मिलेगी. भारत की विशाल अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाने वाली यह योजना घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ावा देगी और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगी, जिससे मोदी जी के ‘विकसित भारत’ के विजन को तेजी से साकार करने में मदद मिलेगी’.

The Union Cabinet’s approval of the ₹84,084 crore ‘Samudra Manthan’ Scheme gives fresh impetus to our nation’s growth. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।

Unlocking India’s vast offshore energy potential, the scheme will boost domestic oil and gas production while generating employment at scale, to achieve Modi pic.twitter.com/XEFvfau9dK

— Amit Shah July 31, 2026

दरअसल, भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है और होर्मुज स्ट्रेट, लाल सागर और काला सागर मार्गों की संभावित नाकाबंदी के साथ वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा खतरे में होने के कारण भारत अपनी तेल और गैस आपूर्ति को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है.

स्वदेशी मैन्यूफैक्चरिंग को मिलेगी मजबूती

इस योजना से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहलों के तहत स्वदेशी मैन्यूफैक्चरिंग को मजबूती मिलने और ऑफशोर टेक्नोलॉजी और सेवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम के निर्माण की उम्मीद है. इसके अलावा इससे एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन वैल्यू चेन में पर्याप्त निवेश आकर्षित होने की संभावना है, जिससे इंडस्ट्री, इनोवेशन और आर्थिक विकास के लिए लॉन्ग टर्म अवसर खुलेंगे.

‘समुद्र मंथन’ योजना के फायदे

  • इससे हाइड्रोकार्बन भंडार के लगभग 600+ मिलियन टन तेल के संचय में तेजी आएगी
  • इससे वार्षिक उत्पादन में 1015 मिलियन टन प्रति ई. की वृद्धि होगी, जिसकी अधिकतम क्षमता 20 मिलियन टन प्रति ई. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। है
  • घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात को कम करने से वार्षिक विदेशी मुद्रा की बचत होगी
  • इससे एक्सप्लोरेशन और मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा
  • इससे जीडीपी में मजबूत वृद्धि होगी
  • इससे विद्युत एवं तेल उत्पादन के क्षेत्र में में रोजगार पैदा होंगे