बॉलीवुड में सितारों को धमकाने और उनके घरों के बाहर फायरिंग की घटनाओं के बीच एक बार फिर लॉरेंस बिश्नोई गैंग चर्चा में है. एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई है. टाइगर के फायरिंग की जिम्मदारी बिश्नोई गैंग ने लिया है. टाइगर श्रॉफ के मामले के बाद से बॉलीवुड एक्टर्स की सुरक्षा पर कई सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, ये पहली बार नहीं है, जब बिश्नोई गैंग ने किसी बॉलीवुड एक्टर को निशाना बनाया है. आइए जानें, गैंग की पूरी डिटेल.

18 अक्टूबर की शाम टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर तीन शूटरों ने फायरिंग की. इस दौरान एक्टर के ड्राइवर और एक ऑटो ड्राइवर के घायल होने की खबर है. इस मामले के बाद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिश्नोई गैंग के मेंबर अनिल पंडित ने इसकी जिम्मेदारी ली है. जिसके बाद से एक बार फिर बिश्नोई गैंग के काम करने के तरीके पर ध्यान खींचा है, जिसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला होने का दावा किया जाता है.

गैंग का सरगना है लॉरेंस बिश्नोई

सबसे पहले गैंग के बारे में बात करें, तो इसका सरगना लॉरेंस बिश्नोई है. शुरुआती पढ़ाई अबोहर में करने के बाद वो चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज पहुंचा और बाद में पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की. कॉलेज की राजनीति के दौरान उसकी मुलाकात गोल्डी बराड़ से हुई. इसके बाद दोनों के नाम आपराधिक गतिविधियों से जुड़ने लगे. बिश्नोई के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसका गैंग देश के अलगअलग राज्यों में सक्रिय है.

  • टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर सामने आई.
  • सोशल मीडिया पर बिश्नोई गैंग से जुड़े व्यक्ति ने घटना की जिम्मेदारी ली.
  • लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क कई राज्यों और विदेशों तक फैला होने का दावा है.
  • दाऊद, छोटा राजन और लॉरेंस गैंग के नेटवर्क और काम करने के तरीकों में अंतर है.

साबरमती जेल में बंद है लॉरेंस

29 मई 2022 को पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में भी लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ का नाम सामने आया था. इसके अलावा, एक्टर सलमान खान को धमकियां देने और अक्टूबर 2024 में बाबा सिद्दीकी की हत्या के मामले में भी बिश्नोई गैंग की भूमिका जांच के दायरे में रही है. फिलहाल लॉरेंस साबरमती जेल में बंद है. इन चर्चाओं के बीच ये भी सवाल सामने आ रहा है कि आखिर बिश्नोई गैंग दाऊद और छोटा राजन के गिरोह से किस तरह से अलग है.

तीनों गिरोह में कितने मेंबर्स हैं?

सबसे पहले गैंग के मेंबर्स की बात करें, तो ANI की 2023 की चार्जशीट के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क में 600 से 700 से ज्यादा शूटर होने का दावा किया गया था. साथ ही ये भी बताया जाता है कि इस गैंग की पकड़ कई राज्यों में फैली हुई है. वहीं दाऊद इब्राहिम गैंग की बात करें, तो उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 1990 के दशक की शुरुआत तक गैंग में करीब 5,000 सदस्य थे. इसका वित्तीय नेटवर्क दुबई तक फैला हुआ था और वसूली, तस्करी जैसे अपराधों से इसकी कमाई होती थी.

छोटा राजन गैंग की बात करें, तो पहले छोटा राजन दाऊद के गैंग में था, लेकिन बाद में इससे अलग होने के बाद उसने अपना गैंग बनाया. इसका नेटवर्क मुंबई के अंडरवर्ल्ड और विदेशों में मौजूद संपर्कों पर आधारित था. हालांकि, इसके सदस्यों की कुल संख्या का कोई स्पष्ट, विश्वसनीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

लॉरेंस के गैंग में कहां के लोग शामिल हैं?

लॉरेंस बिश्नोई गैंग की शुरुआत पंजाब से हुई और बाद में नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों तक फैल गया. कथित तौर पर गैंग में 700 शूटरों में से लगभग 300 पंजाब से थे. वहीं दाऊद इब्राहिम गैंग की शुरुआती जड़ें मुंबई के अंडरवर्ल्ड में थीं.

इसमें महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश समेत अलगअलग क्षेत्रों के लोग शामिल थे. 1992 के बाद गैंग में शरद शेट्टी को छोड़ सभी मुसलमान थे. छोटा राजन का गिरोह दाऊद की डीकंपनी से अलग होने के बाद बना. इसकी जड़ें मुंबई के स्थानीय अपराध जगत में थीं, इसमें सभी हिंदू सदस्य थे.

तीनों गैंग के मकसद में अंतर क्या है?

मुंबई में अंडरवर्ल्ड की शुरुआत 1960 के दशक में हुई. इस वक्त करीम लाला, हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार का यहां दबदबा था. तीनों साउथ इंडियन थे, इसके बाद मराठी भावनाओं के साथ दाऊद यहां आए. इसी गैंग में छोटा राजन था और वो दाऊद का राइट हैंड था. साल 1992 में दंगा हुआ बॉम्बे में, जिसमें दाऊद का नाम आया.

कॉर्पोरेट स्टाइल में काम करता है बिश्नोई गैंग

इस दंगे के बाद गुट बंट गया, एक छोटा राजन और दूसरा दाऊद का. छोटा राजन ने एक हिंदू गुट बना, जिसमें सारे शूटर हिंदू थे. वहीं दाऊद गैंग में सिर्फ मुस्लिम शूटर थे. वहीं बिश्नोई गैंग की बात करें, तो ये गैंग कॉर्पोरेट स्टाइल में काम करता है. इस गैंग की शुरुआत समाज का ध्यान केंद्रित करने के लिए किया गया था, लेकिन बाद में ये गैंग जातिगत मुद्दों को लेकर चर्चा में रहने लगा. हालांकि, सारे गैंग का मकसद लोगों के बीच डर फैलाना और वसूली करना रहा है.