
IPS Dr. Anil Kumar: आजमगढ़ l उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ हत्याकांड ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया. आरोपी अरविन्द ने पत्नी, बेटे और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी और आखिर में खुद एनकाउंटर में मारा गया. परिवार के सदस्यों की मौत के दो बच्चियां अकेली रह गई हैं. जिसे एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने गोद लेने का फैसला लिया है. साथ ही अन्य एक महीने की सैलरी एफडी करने का निर्णय लिया है. आजमगढ़ पुलिस फोर्स ने भी एक दिन का वेतन दिलाने का ऐलान किया है.
आईपीएस ने दो बच्चियो को लिया गोद
आजमगढ़ हत्याकांड में 10 साल की परी और 9 महीने की शांभवी ने अपने पुरे परिवार को खो दिया है. ऐसे में दोनों बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने का जिम्मा आजमगढ़ पुलिस ने लिया है. 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी अनिल कुमार ने दोनों बच्चियों को गोद लेने का ऐलान किया है. दोनों बच्चियों का पालन-पोषण करेंगे और माता-पिता की तरह रखेंगे.
साथ ही अपनी एक महीने की तनख्वाह उनके नाम एफडी करने का फैसला किया है. बच्चियों के 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद यह धनराशि उनके उपयोग में लाई जा सकेगी. प्रेरित होकर पूरी आजमगढ़ पुलिस फोर्स ने भी एक दिन का वेतन इन मासूमों के नाम करने का निर्णय लिया है. अपने इस फैसले से आईपीएस अधिकारी अनिल कुमार सुर्खियों में बने हुए हैं. लोग उनकी तारीफ़ कर रहे हैं.
कौन है आईपीएस अनिल कुमार
आईपीएस अनिल कुमार 2016 बैच के अधिकारी हैं. वो मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले है. स्कूल की पढाई के बाद उन्होंने उन्होंनेउन्होंने डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर से MBBS की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भी प्रैक्टिस की. कुछ समय अस्पतालों में काम किया और मरीजों का इलाज किया. इसके बाद उनकी रुचि सिविल सर्विस में हुई. जिसके बाद वो यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने लगे.
वर्ष 2016 में उनका चयन IPS के लिए हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला. वह चंदौली के SP और फिर प्रतापगढ़ के SP रह चुके हैं. वर्तमान में आजमगढ़ SP की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
क्या है पूरा मामला
पूरा मामला जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर अहिरौला थाना क्षेत्र का है. वारदात मंगलवार शाम करीब 6 बजे की है. मृतकों में आरोपी अरविंद सिंह (42), पत्नी बबीता सिंह (40), बेटा शौर्य (9), पंडित महेंद्र पाठक (60) और छितौना भटौली गांव के अखिलेश मिश्रा (55) शामिल है.
परिवार को था भूत का शक
जानकारी के मुताबिक़, परिवार को शक था कि आरोपी को उसके भाई सुनील की आत्मा परेशान कर रही है. बालासाहेब ठाकरे के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) थे. जिसकी 2018 में अरविंद के चचेरे भाइयों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसलिए उसकी पत्नी और मां समला देवी (70) घर में महामृत्युंजय जाप करा रही थीं.
घर में कराई जा रही थी पूजा
पूजा 4 दिन से चल रही थी. जिससे आरोपी नाराज था. सोमवार को भी उसने पूजा न करने की चेतावनी दी थी. मंगलवार को पूर्णाहुति थी. जिसमे आरोपी की पत्नी माँ बच्चे और तीन पंडित उनके पुत्र हिमांशु मिश्रा और एक अन्य पंडित पूजा करा रहे थे. महामृत्युंजय जाप करा जा रहा था. तभी आरोपी आया और पंडितों से आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया.
गुस्से में आरोपी ने मारी गोली
बहस बढ़ने पर लाइसेंसी राइफल निकाल लाया और फायरिंग शुरू कर दी. जिसमे पत्नी और दो पंडितों की मौत हो गयी. गोलीबारी की आवाज सुनकर आसपास के लोग आये. भीड़ को आता देख आरोपी अरविंद ने खुद को तीन बच्चों के साथ कमरे में कैद कर लिया था. पड़ोसियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की.
आरोपी अरविंद अपने 3 बच्चों सहित कमरे में बंद हो गया था जिसे बाहर निकालने का प्रयास किया गया. उसे चेतावनी भी दी गयी लेकिन इसके बाद भी उसने अपने एक बच्चे को गोली मार दी गई.
जिसके बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की जिसमें आरोपी अरविंद घायल हो गया. आरोपी और घायल बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी. जबकि दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.


