Vrindavan Sri Radha Damodar Temple Jal Yatra Festival: वृंदावन में ब्रज की प्राचीन वैष्णव परंपरा के अनुरूप नगर के सप्त देवालयों में प्रमुख श्री राधा दामोदर मंदिर में ज्येष्ठ मास के पावन अवसर पर जलयात्रा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और वैदिक रीतिरिवाजों के साथ धूमधाम से संपन्न हुआ। भीषण ग्रीष्म ऋतु में ठाकुर श्री राधा दामोदर लाल को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित इस दिव्य उत्सव में देशविदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

धूमधाम से मनाया गया श्री राधा दामोदर मंदिर का जलयात्रा महोत्सव, सप्त पवित्र नदियों के जल से हुआ महाअभिषेक​
धूमधाम से मनाया गया श्री राधा दामोदर मंदिर का जलयात्रा महोत्सव, सप्त पवित्र नदियों के जल से हुआ महाअभिषेक​

क्यों मनाया जाता है जलयात्रा महोत्सव

मंदिर के सेवायत निताई गोस्वामी ने बताया कि यह महोत्सव मंदिर के सेवायत आचार्य तरुण गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि ब्रज में ठाकुर जी को साक्षात जीवंत स्वरूप मानकर उनकी सेवा की जाती है। इसी भाव के अनुरूप ज्येष्ठ मास की प्रचंड गर्मी में भगवान को शीतलता एवं सुख प्रदान करने के लिए प्रतिवर्ष जलयात्रा उत्सव का आयोजन किया जाता है।

आकर्षक जल फव्वारों से होती है सजावट

उत्सव के अंतर्गत मंदिर परिसर एवं गर्भगृह को विशेष रूप से शीतल वातावरण प्रदान करने के लिए आकर्षक जल फव्वारों से सजाया गया। फव्वारों से गिरती जलधाराओं ने पूरे मंदिर परिसर को मनोहारी और भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

जलयात्रा महोत्सव का प्रमुख आकर्षण ठाकुर श्री राधा दामोदर लाल का दिव्य महाअभिषेक रहा। वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य सेवायत आचार्यों ने ठाकुर जी का भारत की सप्त पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया। इसके पश्चात मौसमी फलों के रस, केवड़ा, गुलाब जल तथा शीतलता प्रदान करने वाली आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों से युक्त पवित्र जल से भगवान का अभिषेक संपन्न कराया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “राधा दामोदर लाल की जय” एवं “राधेराधे” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

श्री राधा दामोदर लाल की अलौकिक छवि के दर्शन कर भावविभोर हो उठे श्रद्धालु

महाअभिषेक के उपरांत ठाकुर जी के समक्ष रंगबिरंगे सुगंधित देशीविदेशी पुष्पों एवं हरित लताओं से सुसज्जित भव्य फूल बंगला सजाया गया। इस दिव्य श्रृंगार में विराजमान ठाकुर श्री लाल की अलौकिक छवि के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

इस अवसर पर ठाकुर जी को सत्तू, आम का पना, चंदन का शरबत एवं विभिन्न मौसमी फलों का शीतल भोग अर्पित किया गया। तत्पश्चात यही प्रसाद मंदिर में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के मध्य वितरित किया गया।

सेवायतों ने बताया कि ब्रज की यह सेवा परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसमें भगवान की सेवा एक जीवंत एवं आत्मीय भाव से की जाती है। इसी सनातन परंपरा का अनुपम उदाहरण है, जो भक्त और भगवान के मधुर एवं प्रेमपूर्ण संबंध का सजीव प्रतीक माना जाता है।