उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. आरोप है कि SIR के दौरान करीब 16.18 लाख लोगों ने अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए ड्राफ्ट लिस्ट आने से पहले ही आवेदन किया. आमतौर पर जिन लोगों का नाम वोटर लिस्ट में नहीं होता है, वे ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद क्लेम्स और ऑब्जेक्शंस के दौरान नाम जुड़वाने का दावा करते हैं. सवाल यह है कि इन लोगों के Form6 ड्राफ्ट लिस्ट आने से पहले ही क्यों लिए गए?

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि SIR के दौरान यूपी की वोटर लिस्ट से करीब 2.89 करोड़ नाम हटाए गए थे. इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने Form6 के जरिए अपना नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए आवेदन किया. रिपोर्टर्स कलेक्टिव की एक रिपोर्ट ने इन आंकड़ों और आवेदन की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए हैं.

हालांकि, यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 6 अक्टूबर 2026 को इन आरोपों को खारिज कर दिया. आयोग का कहना है कि 16.18 लाख Form6 मसौदा वोटर लिस्ट जारी होने के बाद नहीं लिए गए थे, बल्कि SIR के enumeration phase के दौरान ही BLO ने घरघर जाकर इन्हें जमा किया था.

1. आखिर 16.18 लाख वोटर्स के नाम जोड़ने का मामला क्या है?

विवाद की शुरुआत 16.18 लाख Form6 से हुई है. Form6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नया नाम जोड़ने के लिए किया जाता है. इसे ऐसे समझिए. मान लीजिए किसी गांव के रामलाल का नाम 27 अक्टूबर 2025 की मौजूदा वोटर लिस्ट में नहीं है. SIR के दौरान BLO उसके घर पहुंचता है. रामलाल बताता है कि वह वोट देने के लिए पात्र है, लेकिन उसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है. ऐसे में उसका सामान्य enumeration form पहले से प्रिंट नहीं हो सकता था. इसलिए BLO उससे नाम जोड़ने के लिए Form6 ले सकता था.

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच ऐसे पात्र लोगों से करीब 16.18 लाख Form6 लिए गए. यानी आयोग का दावा है कि ये आवेदन मसौदा सूची आने के बाद अचानक नहीं आए थे. इन्हें SIR की शुरुआती enumeration प्रक्रिया के दौरान ही BLO ने घरघर जाकर लिया था.

हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. 16.18 लाख Form6 मिलने का मतलब यह नहीं है कि 16.18 लाख नाम पक्के तौर पर वोटर लिस्ट में जुड़ गए. Form6 के बाद आवेदन की जांच और मंजूरी की प्रक्रिया होती है.

2. किस बात को लेकर हो रहा है विवाद?

सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि SIR के दौरान यूपी की वोटर लिस्ट में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ. SIR से पहले यानी 27 अक्टूबर 2025 को यूपी में करीब 15.44 करोड़ वोटर्स थे. प्रक्रिया के दौरान करीब 2.89 करोड़ नाम मौजूदा सूची से बाहर हो गए. इसके बाद नए नाम जोड़ने के लिए Form6 के आवेदन भी बड़ी संख्या में आए.

रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने करीब 71 लाख Form6 के डेटा का विश्लेषण किया और आवेदन की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि किसी भी विधानसभा क्षेत्र में 6 जनवरी 2026 से पहले के डेटा का पैटर्न साफ तौर पर नहीं दिखा.

इसके अलावा 6 जनवरी 2026 को बीजेपी की यूपी में हुई बैठक का भी जिक्र किया गया, जिसमें हर बूथ पर 200 नए वोटर्स जोड़ने की बात सामने आने का दावा है. यहीं से सवाल खड़ा होता है कि क्या चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में नए नाम जोड़ने की कोशिश हुई?

3. चुनाव आयोग का इस पूरे मामले पर क्या कहना है?

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 6 अक्टूबर को जारी प्रेस रिलीज में सोशल मीडिया पर चल रही ‘16.18 लाख रहस्यमय वोटर्स’ वाली बात को गलत और भ्रामक बताया है.

मसौदा वोटर लिस्ट 6 जनवरी 2026 को जारी हुई. आयोग का कहना है कि मसौदा सूची जारी होने से पहले eroll को तय समय पर फ्रीज किया जाता है. इसलिए उस समय तक मिले कुछ Form6 का नाम तुरंत मसौदा सूची में दिखाई देना जरूरी नहीं था.

इसके बाद 6 जनवरी को मसौदा सूची जारी होने के बाद क्लेम्स और ऑब्जेक्शंस की अवधि में मिले Form6 को Form9 की लिस्ट के तौर पर वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया.

आयोग ने यह भी कहा कि Form6 स्वीकार करने का कोई तय प्रतिशत नहीं होता. हर आवेदन को नियमों के मुताबिक जांचने के बाद ही स्वीकार किया जाता है. यानी आयोग का कहना है कि 16.18 लाख Form6 का पहले लिया जाना चुनावी नियमों का उल्लंघन नहीं है.

4. क्या 16.18 लाख नाम जोड़ने में कोई गड़बड़ी साबित हुई है और अब आगे क्या होगा?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि 16.18 लाख नाम गलत तरीके से जोड़ दिए गए हैं. रिपोर्टर्स कलेक्टिव की रिपोर्ट ने आवेदन की टाइमिंग, डेटा और नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं, चुनाव आयोग का जवाब है कि 16.18 लाख Form6 SIR के enumeration phase में ही नियमों के तहत लिए गए थे.

सबसे अहम सवाल अब यह है कि इन 16.18 लाख Form6 में से कितने आवेदन स्वीकार हुए, कितने खारिज हुए और आखिर कितने नाम फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल हुए. आयोग की 6 अक्टूबर की प्रेस रिलीज में इन 16.18 लाख आवेदनों का ऐसा पूरा ब्रेकअप नहीं दिया गया है.

यानी विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि 16.18 लाख Form6 क्यों लिए गए. असली सवाल यह भी है कि इन आवेदनों का आगे क्या हुआ. आयोग ने कहा है कि SIR की प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी रही और अभी तक किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति ने यूपी में इस तरह का आधिकारिक आरोप नहीं लगाया है.