Jaipur News: जयपुर में 19 साल के युवक रीतुराज लोहार की मौत के बाद मुहाना थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं. परिवार का आरोप है कि रीतुराज को पुलिस ने अवैध हिरासत में रखकर बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और वह कोमा में चला गया. करीब 13 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद सोमवार को उसकी मौत हो गई. परिवार का यह भी आरोप है कि पुलिस ने घटना को छिपाने के लिए उन्हें बताया कि रीतुराज को सांप ने काट लिया है और अस्पताल में एंटीवेनम के इंजेक्शन लगवाए गए. मामले में राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर और जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है. हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

17 सितंबर को दुबई से जयपुर लौटे थे पिता

मृतक रीतुराज के पिता प्रकाश लोहार मंदसौर के रहने वाले हैं और दुबई में काम करते हैं. परिवार के मुताबिक, प्रकाश 17 सितंबर को दुबई से जयपुर लौटे थे. एयरपोर्ट के बाहर तीन पुलिसकर्मियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए उन्हें रोका और सामान की तलाशी ली. प्रकाश के मुताबिक, दुबई में काम करने वाले मनोज नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें सोने की चेन लाने के लिए पैसे भेजे थे. पैसे को लेकर विवाद हुआ और इसी मामले में पुलिस उन्हें एक होटल लेकर गई. होटल में भी उनकी तलाशी ली गई, उनके साथ मारपीट की गई. जब इस बारे में उनके बेटे रीतुराज को जानकारी मिली तो वह भी मंदसौर से जयपुर पहुंचा. इसके बाद रीतुराज भी पुलिस के संपर्क में आया.

22 सितंबर को थाने ले जाने का आरोप

परिवार के अनुसार, 22 सितंबर को भीलवाड़ा के मनोज ने मुहाना थाने में प्रकाश लोहार के खिलाफ शिकायत दी थी. शिकायत में उस पर दुबई से सस्ता सोना लाने के नाम पर 22 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया था. इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुबह करीब 10:30 बजे कुछ लोगों को थाने बुलाया. दोपहर करीब 12 बजे प्रकाश के बेटे रीतुराज को भी थाने लाया गया. थाने में रीतुराज के साथ मारपीट की गई. करीब साढ़े तीन बजे एक संतरी की नजर उस पर पड़ी तो वह बेसुध हालत में मिला. इसके बाद पुलिस उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंची.

हालत बिगड़ी तो निजी अस्पताल ले गई पुलिस

रीतुराज को पहले मुहाना के लकी अस्पताल ले जाने की बात सामने आई. वहां हालत गंभीर होने पर उसे सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय दूसरे निजी अस्पताल, नारायणा अस्पताल ले जाया गया. नारायणा अस्पताल में उसकी हालत और बिगड़ गई और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया. बाद में अस्पताल ने उसे सवाई मानसिंह अस्पताल रेफर कर दिया. रीतुराज करीब 13 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा. सोमवार को उसकी मौत हो गई. दोनों निजी अस्पतालों में इलाज का कुल खर्च करीब 98,500 रुपए आया, जिसका भुगतान पुलिस की ओर से किया गया.

परिवार को बताया सांप ने काटा

रीतुराज के परिवार ने पुलिस पर मामले को छिपाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया. परिवार के मुताबिक, जब उन्हें अस्पताल बुलाया गया तो पुलिस की ओर से बताया गया कि रीतुराज को सांप ने काट लिया है. अस्पताल में एंटीवेनम के करीब 10 इंजेक्शन भी लगवाए गए. हालांकि, नारायणा अस्पताल और सवाई मानसिंह अस्पताल में किए गए सीटी स्कैन में सिर में चोट की बात सामने आई. इसके बाद मामले को लेकर परिवार ने पुलिस पर सवाल उठाए. पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार को रीतुराज का शव परिजनों को सौंप दिया गया. परिवार शव लेकर मंदसौर रवाना हो गया.

मां बोली 10 लाख लेकर समझौते का दबाव बनाया

रीतुराज की मां हेमा ने आरोप लगाया कि अस्पताल में पुलिसकर्मी उन पर समझौते का दबाव बनाने पहुंचे थे. पुलिस ने उन्हें 10 लाख रुपये लेकर मामला खत्म करने के लिए कहा. हेमा का आरोप है कि उनसे दबाव में एक एफआईआर पर हस्ताक्षर भी करवाए गए. उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए तो उनके बेटे जैसी हालत उनकी भी कर दी जाएगी.

कांग्रेस ने भी पुलिस पर उठाए सवाल

इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि युवक की मौत पुलिस हिरासत में हुई और पूरे मामले में पुलिस की भूमिका की जांच होनी चाहिए. खाचरियावास ने चेतावनी दी कि अगर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और परिवार को न्याय नहीं मिला तो कांग्रेस आंदोलन करेगी.

मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

रीतुराज की मौत के मामले में राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है. आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर और जयपुर जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर मामले में रिपोर्ट मांगी है. आयोग की ओर से पूरे मामले की जांच किसी आईपीएस अधिकारी से कराने की बात भी कही गई है. इससे अब पुलिस की कार्रवाई और युवक की मौत से जुड़े आरोपों की जांच की मांग तेज हो गई है.